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विरोध:चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने को लेकर डॉक्टरों ने काली पट्टी बांध जताया विरोध

झुंझुनूंएक महीने पहले
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झुंझुनूं. राजकीय बीडीके अस्पताल में काली पट्‌टी बांधकर विरोध जताते डॉक्टर। - Dainik Bhaskar
झुंझुनूं. राजकीय बीडीके अस्पताल में काली पट्‌टी बांधकर विरोध जताते डॉक्टर।
  • सरकारी व प्राइवेट चिकित्सकों ने सुबह आठ बजे से दस बजे तक बंद रखी ओपीडी

अस्पतालों में चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर सरकारी व निजी अस्पताल के डॉक्टरों न शुक्रवार को दो घंटे काली पट्टी बांधकर व दो घंटे ओपीडी बंद रखकर विरोध जताया। इसके बाद आईएमए व अरिस्दा के पदाधिकारियों ने कलेक्टर यूडी खान को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। जिसमें अस्पताल में चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय स्तर पर एक सख्त कानून बनाने की मांग की है।

जिसमें दोषियों को दस वर्ष की जेल की सजा के साथ जुर्माना लगाने तथा तोड़ फोड़ करने से होने वाली हानि की वसूली का सख्त प्रावधान हो तथा कानून को आईपीसी व सीआरपीसी में शामिल कर पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन देने वालों में आईएमए के सचिव डॉ. ढाका, अरिस्दा के सचिव डॉ. राजेंद्र ढाका, प्रवक्ता डॉ. कैलाश राहड़ आदि सहित अन्य डॉक्टर शामिल थे।

कोरोना में जान गंवाने वाले डॉक्टर को शहीदों के रूप में मिले पहचान

डॉ. लालचंद ढाका ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान जिन डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज करते हुए अपनी जान गंवाई है। उनके बलिदान को उचित स्वीकृति के साथ कोविड शहीदों के रुप में पहचाना जाना चाहिए। उनके परिवारों को सरकार द्वारा विधिवत समर्थन किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से चलाई गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना अहम योजना है। ऐसे परिवारों को बीमा लाभ दिया जा रहा है।

कोरोना की पहली लहर में देश के 754 डॉक्टर जान गंवा चुके थे। लेकिन योजना के प्रक्रियात्मक कार्यान्वयन में विभिन्न बाधाओं के कारण इस योजना में केवल 168 डॉक्टरों के परिवार ही आवेदन कर पाए है। केंद्रीय स्वास्थ्य खुफिया ब्यूरो के माध्यम से सभी पीडितों की पहचान और सत्यापन कर एक प्रभावी तंत्र बनाने के साथ सभी परिवारों को सहायता के दी जाए।

डॉ. ढाका ने बताया कि आईएमए व अरिस्दा का मानना है कि देश में महामारी से उबरने व लोगों की रक्षा करने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र हथियार है। सरकार ने राज्यों व निजी अस्पतालों पर 50 प्रतिशत टीके छोड़े बिना 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए सार्वभौमिक मुफ्त टीकाकरण को बढ़ावा देना चाहिए। कोविड-19 के बाद फेफड़ों के फाइब्रोसिस, बढ़ी हुई थ्रोम्बोटिक घटनाओं और फंगस संक्रमण की जटिलता बढ़ रही है।

इसके लिए डॉक्टरों को तैयार करने की जरूरत है। म्यूकोर्मिककोसिस कवक रोग के लिए आवश्यक दवा आसानी से उपलब्ध नहीं है। इन दवाओं के आयात और साथ ही स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए। इस पोस्ट कोविड-19 की जटिलता का विस्तार से अध्ययन करने के साथ चिकित्सा के सभी विषयों में उपचार करने के लिए एक अलग शोध प्रकोष्ठ की स्थापना करें।

राजकीय बीडीके अस्पताल में पीएमओ डॉ. वीडी बाजिया, डॉ. राजेंद्र ढाका, डॉ. जयसिंह, डॉ. सहीराम, डॉ. राजवीर राव, डॉ. जगदेव सिंह, डॉ. असलम, डॉ. नेमीचंद कुमावत, डॉ. शक्तिसिंह, डॉ. रामस्वरूप पायल ने सीकेआरडी अस्पताल में डॉ. संतोष ढाका, डॉ. बबीता सहित स्टाफ सदस्यों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।

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