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काेराेना का पाॅजिटिव इफेक्ट:कोरोना काल में सरकारी अस्पतालाें में 15 फीसदी प्रसव बढ़ गए, क्योंकि दिन-रात मौजूद रहा स्टाफ

झुंझुनूं10 दिन पहले
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  • कोरोना के डर के कारण सरकारी अस्पतालों में पहुंचे लोग

काेराेना संक्रमण के कारण सरकारी अस्पतालाें में हाेने वाले डिलीवरी की संख्या में बढ़ाेतरी देखने काे मिली है। पिछले साल की तुलना में इस साल सरकारी अस्पतालाें में 15 फीसदी संस्थागत प्रसव बढ़े हैं। इसमें ये भी दिलचस्प है कि निजी अस्पतालाें में इस दाैरान हाेने वाले प्रसव में 11 फीसदी की गिरावट आई है। इस दाैरान जिले में पिछले साल की तुलना में प्रसव में चार फीसदी गिरावट आई है।

चिकित्सा विभाग से जुटाए गए आंकड़ाें काे देखें ताे 2019 में मार्च से सितंबर तक जिले में 15888 डिलीवरी हुई थी। इनमें सरकारी अस्पतालाें में 6016 और निजी अस्पतालाें में 9872 प्रसव हुए। इसी अवधि के दाैरान इस साल 15147 प्रसव हुए हैं। इनमें सरकारी अस्पतालाें में 6891 और निजी अस्पतालाें में 8857 डिलीवरी हुई है। इस तरह सरकारी अस्पतालाें में पिछले साल की तुलना में 875 ज्यादा प्रसव हुए।

निजी अस्पतालाें में 1015 कम डिलीवरी इस साल हुई है। इस तरह 2019 के सात महीनाें के प्रसव की तुलना में इस बार 740 यानी 15148 प्रसव ही हुए। इसमें 4.66 फीसदी की गिरावट आई। सरकारी स्तर प्रसव सुविधा जिले के 145 अस्पतालाें में हैं। इनमें 112 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 27 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, एक जिला अस्पताल, एक सेटेलाइट अस्पताल और चार अरबन पीएचसी संस्थागत प्रसव कराती है। इनके अलावा जिले के 592 सब सेंटरों में अधिकांश में सामान्य डिलीवरी कराई जाती है।
ये हैं तीन बड़े कारण, जिनसे प्रसव बढ़े

1 लाॅकडाउन के दाैरान वाहन नहीं चलना काेराेना के चलते लाॅकडाउन के दाैरान निजी अस्पतालाें तक आने के लिए वाहनाें की सुविधाएं चुनिंदा लाेगाे के लिए उपलब्ध रही। इस कारण सरकारी अस्पतालाें में प्रसव अधिक हुए। संक्रमण के ड़र से गर्भवतियाें और उनके परिवार ने बड़े अस्पतालाेंं की लंबी दूरी तय नहीं कर नजदीक स्वास्थ्य केन्द्राें पर ही प्रसव कराएं।

2 अस्पताल में स्टाफ की दिन रात तैनाती काेराेना के चलते प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्राें की पूरी माॅनिटरिंग हाे रही थी। इस दाैरान स्टाफ भी दिन रात माैजूद रहता है। गांवाें के अस्पतालाें में काेराेना काल में डाॅक्टराें और नर्सिंग स्टाफ का ठहराव लगभग 24 घंटे हाेने से प्रसव बढ़े हैं। साथ ही कोरोना संक्रमण का निशुल्क इलाज भी सरकारी अस्पतालों में ले गया।

3 लॉकडाउन में निजी अस्पतालाें का मना
सरकारी अस्पतालों में प्रसव बढ़ने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण ये भी है कि लॉकडाउन के दौरान निजी अस्पतालों ने प्रसव से कराने से किनारा कर लिया था। इसके पीछे संक्रमण रोकने के लिए प्रशासन की सख्ती रही। भीलवाड़ा में निजी अस्पताल से संक्रमण फैलने के बाद प्रशासन ने इन पर शिकंजा कस दिया था। इसलिए ये टाल रहे थे।

जिले में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है। इसके पीछे वजह सुविधाओं व प्रशिक्षित स्टाफ है। काेराेना के दाैर में भी जिले में सराहनीय काम किया है।
-डाॅ. छाेटेलाल गुर्जर, सीएमएचओ, झुंझुनूं
^बीडीके अस्पताल में प्रसव की संख्या बढ़ने काे देखते हुए जयपुर से विशेष परमिशन ली है, जिससे डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं काे समय पर बैड दिया जा सके। इसलिए दाे दिन में डिस्चार्ज कर रहे हैं।
-डाॅ. एसके कालेर, पीएमओ, बीडीके

बेड कम होने से बीडीके जैसे अस्पतालों में प्रसूताओं को दो दिन में ही दे रहे हैं छुट्‌टी

संस्थागत प्रसव के पीछे काेराेना इफेक्ट माना जा रहा है। निजी अस्पतालाें ने लाॅकडाउन के दाैरान संक्रमण काे देखते हुए केस नहीं लिए जिसके चलते संस्थागत प्रसव बढ़ गए। मार्च से जिले में काेराेना ने अपना असर दिखाना शुरू किया था। मार्च से लेकर सितंबर तक हर महीने सरकारी अस्पतालाें में प्रसव पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुए हैं। पिछले साल मार्च में सरकारी अस्पतालाें में 728 प्रसव हुए थे जाे इस बार 773 हुए। इसी तरह अप्रैल में पिछले साल के 676 की तुलना में 777, मई में 770 की बजाय 909, जून में 785 की जगह 831, जुलाई में 965 की बजाय 1110, अगस्त में 1040 के मुकाबले 1277 और सितंबर में 1052 की तुलना में 1214 प्रसव कराए गए।

निजी अस्पतालाें में अप्रैल से जून तक कम हुए प्रसव : इसी तरह काेराेना दाैर में अप्रैल से लेकर जून तक निजी अस्पतालाें में काेराेना का असर प्रसव की संख्या पर दिखाई दे रहा है। 2019 में जहां अप्रैल से जून तक 3507 प्रसव हुए थे जाे इस साल काेराेना की वजह से घट कर 2970 ही रह गए। यह पिछले साल के मुकाबले 537 कम हैं। महीने के हिसाब से देखें ताे निजी अस्पतालाें में 2019 के अप्रैल में 983 प्रसव की जगह 864, मई में 1253 की जगह 1130, जून में 1271 की जगह 976 प्रसव ही हुए। निजी अस्पतालाें में 11 प्रतिशत गिरावट आई है। पिछले साल की तुलना में सरकारी अस्पतालाें में 875 डिलीवरी ज्यादा हुई हैं।

संस्थागत प्रसव बढ़ गए हैं, इसलिए दाे दिन में दे रहे छुट्टी
जिले के सरकारी अस्पतालाें में प्रसव की संख्या अभी भी बढ़ रही है जिसके चलते डिलीवरी के लिए आनी वाली गर्भवतियाें काे परेशानी नहीं हाे, इसके लिए प्रसूताओं काे तीन दिन की जगह दाे दिन में डिस्चार्ज कर रहे हैं। इसके लिए चिकित्सा विभाग ने उच्चाधिकारियाें से इसके लिए विशेष अनुमति ली क्योंकि जननी सुरक्षा याेजना में 72 घंटे बाद ही प्रसूता काे डिस्चार्ज किया जाता है। लेकिन बैड की संख्या सीमित हाेने के चलते ऐसा करना पड़ रहा है।

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