चिकित्साकर्मियों ने लिया नेत्रदान का संकल्प:25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा, नेत्रदान के लिये प्रोत्साहित करने के लिये झुंझुनूं सीएमएचओ के 3 चिकित्साकर्मियों की पहल

झुंझुनूं2 महीने पहले
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हमारे बाद भी इस खूबसुरत दुनिया को हमारी आंखों से कोई देख सके इसलिए नेत्रदान करना बहुत जरुरी हैं। 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा मनाया जाता है। इस दौरान नेत्रदान के लिये लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं सीएमएचओ ऑफिस स्वस्थ्य विभाग में कार्यरत तीन चिकित्साकर्मियों जिनमें डॉ संदीप रूहेला, डॉ. महेश कड़वासरा एवं शीशपाल सैनी ने अनूठी पहल की है। तीनों चिकित्साकर्मियों ने आज बीडीके अस्पताल पहुंचकर नेत्रदान का संकल्प पत्र भरकर अस्पताल के पूर्व पीएमओ और नेत्र विभाग के अध्यक्ष डॉ शीशराम गोठवाल को सोंपा।

इस मौके पर नेत्र रोग विशेषज्ञ वीर सिंह झाझड़िया, चंचल झांझडा भी मौजूद रहे।डॉ शीशराम गोठवाल ने तीनों का आभार जताते हुए बताया कि नेत्रदान में व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का वचन देता है। उन्होंने बताया कि भारत में लाखों लोगों को दोबारा अपनी आंखों की रोशनी हासिल करने के लिए कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत है। दुर्भाग्य से 10 प्रतिशत से भी कम लोगों को इसका लाभ मिल पाता है और बहुत सारे लोगों को दृष्टिहीन रहना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में 1.2 करोड़ लोग कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार कर रहे हैं।

सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि व्यापक जागरूकता की कमी चलते लोग नेत्रदान नही करतें है इसी जागरूकता को बढाने के लिये 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेत्रदान जागरूकता पखवाडा मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि कार्यालय के तीन साथियों डॉ संदीप रूहेला, डॉ. महेश कड़वासरा एवं शीशपाल सैनी ने नेत्रदान के लिये रजिस्ट्रेशन करवाया है जिससे नेत्रदान जागरूकता में बढोतरी होगी और लोग इनसे प्रेरणा लेकर नेत्रदान के लिये आगे आयेंगे।

ऐसे होती है नेत्रदान की प्रक्रिया

वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ शीशराम गोठवाल ने बताया कि किसी पुरुष या महिला द्वारा मृत्यु के बाद आंख दान करने की प्रक्रिया को आई डोनेशन कहा जाता है। समाज के हित में किया जाने वाली यह चैरिटी पूरी तरह से स्वैच्छिक होती है और यह समाज सेवा का बेहतरीन माध्यम है। ऐसे में इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि लोग इस तरह की चैरिटी के लिए आगे आएं। एक व्यक्ति के नेत्रदान से कई बार दो व्यक्तियों की जिंदगी में उजाला होता है।

इसके लिये नजदीकी आई बैंक में रजिस्ट्रेशन फॉर्म भर कर देना पडता है।इसके बाद वहां से मिले लेटर की एक प्रति स्वयं के पास रखी जाती है।मरणोपरान्त निकट संबंधी की सूचना पर आई बैंक अस्पताल की टीम द्वारा नेत्रदान करने के इच्छुक व्यक्ति की आंखें दान करवाई जाती है। कोई जरूरी नहीं है कि इसके लिए पहले से रजिस्ट्रेशन कराया जाए। बिना रजिस्ट्रेशन के भी मृत व्यक्ति की इच्छानुरूप नजदीक आई बैंक में सूचना कर नेत्रदान कियर जा सकता है।

कौन कर सकता आई डोनेट है

डॉ शीशराम गोठवाल ने बताया कि नेत्रदान किसी भी उम्र के पुरुष या महिला कर सकते हैं। हाइपरटेंशन, डायबिटीज, अस्थमा और ट्यूबरक्यूलोसिस आदि से पीड़ित भी स्वेच्छा से मृत्यु के बाद आंख दान कर सकते हैं। चश्मा पहनने वाले भी दूसरे के जीवन में रोशनी ला सकते हैं। जीवित व्यक्ति आई डोनेट नहीं कर सकता यह कानून के खिलाफ है।सिर्फ मृत्यु के बाद ही आंखें दान की जा सकती है।

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