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संवेदनाहीनता:बेटे के शव के लिए अस्पताल के बाहर रोता रहा पिता, डेढ़ लाख देने पर 24 घंटे बाद मिला

सिंघाना/झुंझुनूंएक महीने पहले
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अस्पताल के बाहर बिलखता बेबस पिता। - Dainik Bhaskar
अस्पताल के बाहर बिलखता बेबस पिता।
  • बिल जमा करवाने के लिए पैसे नहीं थे तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पिता को नहीं मिला बेटे का शव

अस्पताल के अंदर जवान बेटे का शव और बाहर सड़क पर बिलखता पिता। बेटे की मौत से एकदम बदहवास और बेबस। बेबसी गरीबी की। जिसके कारण वह बेटे का शव भी नहीं ले पा रहा था। बुधवार देर रात इस पिता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जिसके बाद सरकार से लेकर समाज तक खत्म होती जा रही संवेदनहीनता पर लोगों ने कई सवाल भी उठाए।

जानकारी के अनुसार सिंघाना थाना क्षेत्र के कलाखरी निवासी सुरेश कुमार सैन के बेटे दीपक कुमार ने 29 मई को घरेलू विवाद को लेकर अपने कमरे में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। समय रहते घर वालों ने उसे देख लिया और तुरंत ही फंदे से उतारकर सिंघाना अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टर्स ने बताया कि फंदा लगाने की वजह से उसके गले की नस टूट चुकी है और उसे जयपुर रैफर कर दिया।

जिस पर परिजन उसे दुर्लभ जी अस्पताल लेकर आए। जहां वह 19 दिन भर्ती रहा और 16 जून बुधवार को दोपहर ढाई बजे उसकी मौत हो गई। सुरेश कुमार ने बताया कि बेटे के इलाज के लिए वह अस्पताल को साढ़े चार लाख रुपए दे चुका था। बेटे की मौत के बाद अस्पताल वालों ने शव देने से पहले डेढ़ लाख रुपए और जमा करवाने को कहा। उस वक्त मेरे पास एक रुपया नहीं था। ऐसे में मैं दिनभर यहां वहां भटकता रहा। थक हारकर रात को अस्पताल के बाहर रोने लगा। इस बीच रिश्तेदारों और कुछ मिलने वालों की मदद से पैसे एकत्रित हुए तो गुरुवार दोपहर उसे शव मिला।

महीने के छह हजार कमाता है पिता, बेटे के इलाज के लिए ब्याज पर लेने पड़े पैसे
सुरेश कुमार सिंघाना के पास ही एक निजी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। जिसके लिए उसे महीने के छह हजार रुपए मिलते हैं। परिवार में पत्नी है। दीपक के अलावा एक बेटा और एक बेटी और हैं। इसी नौकरी में किसी तरह परिवार को पाला पोसा। अप्रैल में दीपक की शादी के वक्त स्कूल वालों ने कुछ मदद की। इलाज के लिए भी कुछ रुपए दिए।

सुरेश सैन ने बताया कि बेटे के इलाज के लिए उसने अस्पताल में अलग अलग दिन कुल साढ़े चार लाख रुपए के करीब जमा करवाए। इनमें से एक लाख रुपए 15 जून को ही दिए थे। यह रकम उसने गांव में लोगों से ब्याज पर ली है। 16 जून को उसे बताया गया कि बेटे की मौत हो गई है और डेढ़ लाख रुपए जमा करवाने को कहा।

बेटे का शव लेने के लिए 24 घंटे तक भटकता रहा : सुरेश सैन के अनुसार दीपक की मौत बुधवार दोपहर ढाई बजे हुई। इसके बाद उसने साथ आए परिवार वालों को झुंझुनूं गांव भेज दिया उसने बताया कि अस्पताल वालों को देने के लिए उसकी जेब में कुछ भी नहीं था जबकि उसे डेढ़ लाख रुपए चुकाने थे। ऐसे में वह यहां से वहां घूमता रहा। कुछ मिलने वाले लोगों को फोन भी किए, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली।

रात को वह अस्पताल के बाहर बैठकर रोने लगा तो वहां आए कुछ मीडियाकर्मियों ने उससे सारी जानकारी ली और वीडियो बनाया। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो सवेरे अस्पताल वाले भी हरकत में आए। सवेरे रिश्तेदारों की मदद से पैसों का इंतजाम हुआ तो उसने अस्पताल में जमा करवाए और फिर गुरुवार दोपहर उसे बेटे का शव मिला।

ढाई महीने पहले ही हुई थी बेटे की शादी
जिस जवान बेटे का शव लेने के लिए पिता को इतना बेबस होना पड़ा उसकी शादी महज ढाई महीने पहले 4 अप्रेल को हुई थी। इस साधारण से परिवार की बेटे की शादी खुशियां अब तक चल रही थी। दीपक ने बीएसी नर्सिग का कोर्स कर रखा था और जयपुर में मेडिकल विभाग में काम करता था। उसकी पत्नी पूजा ने भी नर्सिंग कोर्स किया हुआ है।

बताया जा रहा है परिवार में किसी बात को लेकर मामूली विवाद हो गया था। जिस पर दीपक ने 29 मई को कमरे में फांसी का फंदा लगा लिया। अस्पताल में 19 दिन तक इलाज के बाद उसकी मौत हो गई।

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