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हमारी मातृ सैन्य शक्ति:प्रदेश में पहली बार सैनिक स्कूल में पढ़ेंगी यह आठ बेटियां, फाइटर पायलट, नेवी ऑफिसर और लेफ्टिनेंट बन देश सेवा करना है सपना

झुंझुनूं20 दिन पहलेलेखक: श्रीकांत पारीक
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गोलू। - Dainik Bhaskar
गोलू।

देश के इतिहास में पहली बार सैनिकों स्कूलों में बेटियों की भी पढ़ाई होने जा रही है। इन स्कूलों में दस प्रतिशत सीट बेटियों के लिए आरक्षित की गई है। जिसके बाद झुंझुनूं के सैनिक स्कूल में इसी सत्र से दस बेटियों का चयन भी हो चुका है। इनमें से आठ बेटियाें का प्रवेश अंतिम रूप से फाइनल हो चुका है। आज से नवरात्रि शुरू होने जा रहे हैं और शक्ति का प्रतीक हैं।

यह बेटियां भी एक तरह से देशभर की उन तमाम बेटियों का प्रतीक हैं जो खुद कमजोर नहीं समझती और अपने बूते देश की सेवा करना चाहती हैं। इसलिए आज के इस खास अवसर पर दैनिक भास्कर आपको उन आठ बेटियों से मिलाने जा रहा है जो यहां के सैनिक स्कूल में पढ़ेंगी और आगे जाकर देश की भावी सैन्य अफसर भी बन सकेंगी।

गाेलू-

गोलू एयरफाेर्स में जाना चाहती हैं। कहती है कि आसमान की ऊंचाइयों को छूना चाहती हूं। इसलिए वायु सेना में पायलट बनना चाहती है।

पूजा यादव-
पूजा सेना में कमीशन पाना चाहती है। पूजा बताती है कि बेटियों के नाम जो बंदिशे थी उन्हें तोड़ नए आयाम बनाऊंगी।

वृतिका सिंह-
वृतिका इंडियन नेवी ज्वाइन करना चाहती है। वृतिका के हौंसले जितने बुलंद हैं। वह समंदर की उतनी ही गहराइयों को नापना चाहती है।

मुस्कान चाैधरी
इंडियन आर्मी में ऑफिसर बनने का सपना। मुस्कान चाहती है कि जब देश पर मर मिटने की बात हो तो सबसे पहले उसका नाम लिया जाए।

सुहानी मेहरा
इंडियन आर्मी में डाॅक्टर। सुहानी बताती है एमबीबीएस तो कहीं से भी कर सकती थी, लेकिन चाहती हूं देश के सैनिकों की सेवा करुं।

साक्षी यादव
लेफ्टिनेंट बनने का सपना। साक्षी हर उस बेटी के लिए एक उदाहरण बनना चाहती है। जो बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करना चाहती है।

कुमारी डिंपल
सपना: फाइटर पायलेट। कुमारी डिंपल आसमान को थर्रा देना चाहती है। ऐसी उड़ान भरना चाहती है जो उसे सबसे बड़ी ऊंचाइयों पर ले जाए।

दाेरम सिंह
सपना : स्कवाड्रन लीड़र। दोरम सिंह का सपना है कि वह भारतीय सेना में सबसे ऊंचे पदों पर पहुंचे। दिन रात उसके लिए तैयारी करती है।

दस सीटों के लिए आए थे 445 बेटियाें के आवेदन
प्रदेश में झुंझुनूं व चितौड़गढ़ में दो सैनिक स्कूल हैं। झुंझुनूं का सैनिक स्कूल दोरासर में है। जहां पिछले साल से छात्राओं के प्रवेश शुरू किए गए। यहां दस सीटों के लिए छात्राओं के कुल 445 आवेदन आए। यानी एक सीट पर करीब 44 बेटियों के बीच टक्कर हुई। यहां लड़कों की 90 सीटों के लिए 1902 आवेदन आए थे।

2019 में मिजोरम से हुई थी बेटियों की शुरूआत
पहले देश के सैनिक स्कूलों में बेटियों को प्रवेश नहीं दिया जाता था। 2019 में मिजोरम के चिंगचिप सैनिक स्कूल से इसकी शुरूआत हुई। 2020 से देश के पांच सैनिक स्कूलों में इसकी शुरूआत हुई। जिसमें झुंझुनूं भी शामिल था। अब देश के सभी सैनिक स्कूलों में इसकी शुरूआत हो चुकी है।

सैनिक स्कूल कैंपस अब बेटियों के अनुकूल

सैनिक स्कूल कैंपस में बेटियों के लिए कई अहम बदलाव किए गए हैं। महिला टीचर्स के साथ महिला स्टाफ की नियुक्ति हाे रही है। स्कूल में दाे आया, एक महिला हाॅस्टल मैटर्न, महिला पीटीआई और नर्सिंग सिस्टर होगी। अलग से हाॅस्टल बनाया गया है।

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