इंतजामों की फूली सांसें:बीडीके में एक दिन में 38 मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर लेना पड़ा, बेड कम पड़े तो बैंच पर लिटाया

झुंझुनूं6 महीने पहले
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झुंझुनूं, बीडीके अस्पताल के कोविड वार्ड में बेड कम पड़े तो अटेंडेंट बैंच पर मरीज को लिटाकर देनी पड़ी ऑक्सीजन। - Dainik Bhaskar
झुंझुनूं, बीडीके अस्पताल के कोविड वार्ड में बेड कम पड़े तो अटेंडेंट बैंच पर मरीज को लिटाकर देनी पड़ी ऑक्सीजन।

जिले के सबसे बड़े बीडीके अस्पताल में एक ही दिन में 38 नए मरीज आ गए और फिर यहां तमाम व्यवस्थाएं बिगड़ गई। सवेरे तक अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व किए गए 84 बेड में से 66 बेड खाली थे। इन 38 मरीजों के आने के बाद ऑक्सीजन बेड भर गए। जिसके कारण जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरुरत थी उन्हें बैंच पर लिटाया गया और ऑक्सीजन दी गई।

चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें से कई मरीजों का ऑक्सीजन सेचुरेंशन 30 से 80 के बीच था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एक ही दिन में जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं का यह आलम हो गया तो आखिर इतने दिन से सरकार और चिकित्सा विभाग कोरोना के इलाज के लिए कौन से इंतजाम कर रहा था। बुधवार को ऐसे ही हालात के बीच विभाग के संयुक्त निदेशक ने भी निरीक्षण किया।

इस दौरान पीएमओ डॉ. वीडी वाजिया ने उन्हें स्थिति के बारे में बताया और जेजेटी के अस्पताल में ऑक्सीजन की व्यवस्था कर मरीजाें को रखने का सुझाव दिया। इसके साथ ही यह भी कहा कि बीडीके अस्पताल में केवल गंभीर मरीजों को लाया जाए। पीएमओ ने बताया कि जिन निजी अस्पतालों में मरीज भर्ती थे। उन्होंने एक ही दिन में कई मरीजों को बिना रैफरल कार्ड ही रैफर कर दिया। जो उन्हें नहीं करना चाहिए था। इससे भी स्थिति बिगड़ी।

222 पॉजिटिव मिले, यह अब तक का रिकॉर्ड, गंभीर मरीज बढ़े तो पैदा होगा ऑक्सीजन का संकट

जिले में बुधवार को रिकॉर्ड 222 नए मरीज मिले। यह पहला मौका है जब पिछले 13 महीने में एक ही दिन में इतने मरीज सामने आए हैं। जिले में अब तक सर्वाधिक मरीज 165 मिले थे। जो मंगलवार को सामने आए थे। सबसे ज्यादा नए केस झुंझुनूं शहर और उदयपुरवाटी ब्लाॅक में मिले हैं। सीएमएचओ डाॅ. छाेटेलाल गुर्जर ने बताया कि जिले के नवलगढ़ में 19, चिड़ावा में 13, उदयपुरवाटी में 35, मलसीसर में छह, सूरजगढ़ में 23, झुंझुनूं ग्रामीण में 33, झुंझुनूं शहर में 46, बुहाना में 23 नए पाॅजिटिव मिले हैं।

उन्होंने बताया कि बीडीके अस्पताल की काेराेना यूनिट में एक काेराेना मरीज की माैत हाे गई। इस बीच बीडीके अस्पताल में एक साथ इतने मरीज आने के बाद ऑक्सीजन किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। अस्पताल में बना ऑक्सीजन प्लांट हर दिन 35 बडे सिलेंडर ऑक्सीजन का उत्पादन करने में सक्षम है।

रेफर होकर आए 38 कोरोना पॉजिटिव
जानकारी के अनुसार ऑक्सीजन वाले 38 से ज्यादा मरीजाें काे गंभीर हालत में बीडीके अस्पताल में लाया गया। इनमें ज्यादातर मरीज निजी अस्पतालाें से रेफर हाेकर आए हैं। इन मरीजाें काे उनके परिजन उनकाे लेकर बीडीके अस्पताल में पहुंचे। एक साथ इतने मरीजों के आने से अस्पताल में हड़कंप मच गया। रीजाें काे उपलब्ध ऑक्सीजन बैड पर एडमिट कर ऑक्सीजन सपाेर्ट दिया गया। ऑक्सीजन बेड के भर जाने के बाद अब अन्य मरीजाें काे बेड के बीच पाटियाें पर एडमिट कर ऑक्सीजन लगाई गई।

ऐसे बिगड़े हालात, अचानक आए मरीज
बीडीके अस्पताल में 70 ऑक्सीजन बेड हैं। इनमें काेराेना मरीजाें के लिए 30 बेड की अलग यूनिट बनी हुई है। ताे 40 बैड आईएलआई या एचसीटी में संक्रमण वाले आईएलआई मरीजाें के लिए है। मंगलवार व बुधवार काे 24 घंटे के दाैरान बीडीके में आईएलआई के 50 से ज्यादा मरीज पहुंच गए। जिनकाे आईएलआई बेड पर एडमिट किया गया। इसके बाद भी मरीजाें के आने पर उनको बैंच पर ऑक्सीजन लगाई गई। 2 बजे तक आईएलआई व काेराेना यूनिट में 88 से ज्यादा मरीज आए।

सीधी बात, डाॅ. वीडी बाजिया, पीएमओ
सवाल :
38 नए मरीजों के आने से व्यवस्थाएं बिगड़ गई?
पीएमओ : अभी 88 मरीज काेराेना व काेराेना जैसे लक्षणाें वाले हैं। मरीजाें की संख्या ज्यादा हाेने से बैंच पर ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर इलाज किया गया। ।

सवाल: क्या ये सिस्टम फेलियर नहीं है?
पीएमओ: अस्पताल में सीमित सुविधाएं है और अन्य मरीजाें काे भी एडमिट करना पड़ता है। ऑक्सीजन बेड 70 हैं और उनके फुल हाेने के बाद बिना बेड इलाज करना पड़ रहा है।

सवाल: अब क्या इंतजाम, क्योंकि मरीज बढ़ सकते हैं।
पीएमओ : संयुक्त निदेशक काे आज पूरी स्थिति बता दी। जेजेटी के अस्पताल में ऑक्सीजन की व्यवस्था कर मरीजाें काे रखा जा सकता है। जब निजी अस्पतालाें काे काेविड डेडिकेटेड अस्पताल बना दिया गया है ताे वे मरीजाें काे पूरा इलाज करें वे डिस्चार्ज क्यूं कर रहे है।

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