राम वनवास की कथा सुनाई:भडाैंंदा खुर्द में रामकथा में विभिन्न प्रसंगाें का हुआ मंचन राम-सीता विवाह के साथ केवट प्रसंग की सुनाई कथा

झुंझुनूं2 महीने पहले
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  • कथावाचक बाेले, माता-पिता का अनुसरण करने वाली संतान यश की भागीदार हाेती है

जिले के भड़ौदा खुर्द में लामिया बालाजी मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में बुधवार काे राम-सीता विवाह के साथ राम वनवास की कथा सुनाई गई। इस दाैरान रामकथा के विभिन्न प्रसंगाें का मनमाेहक मंचन भी किया गया। नेपाल प्रवासी भामाशाह सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि कथा वाचक महाराज सज्जन दाधीच ने रामकथा के विभिन्न प्रसंग सुनाते हुए भगवान श्रीराम ने पिता के दिए वचन काे पूरा करने के लिए 14 साल वन में जाना स्वीकार किया।

इससे ये समझना चाहिए कि माता पिता की आज्ञा हरेक संतान के लिए सर्वाेपरी हाेती है। उन्हाेंने आधुनिक जीवन शैली के बारे कहा कि आज संतान अपने माता-पिता और गुरू की अवज्ञा करती है। जिसके कारण से वे जीवन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन माता-पिता के शुद्ध आचरण का अनुसरण करने वाले जीवन में सफलता और यश काे हासिल करते है।

पंडित दाधीच ने बताया कि भक्त केवट की मनमानी ये सिद्ध करती है कि भगवान भक्तों के अधीन है। कथा के दौरान विभिन्न झांकियां निकाली गई। महंत जगदीश प्रसाद स्वामी ने बालाजी की विशेष आरती की। मुख्य यजमान अनिल दाधीच व पूनम देवी थे।

रामकथा में अहिल्या उद्धार, पुष्प वाटिका, सीता द्वारा गिरिजा पूजन, धनुष यज्ञ प्रसंग का मंचन भी किया गया। इस दाैरान सुधीर शर्मा, रोहिताश रोहिला, नरेंद्र झाझड़िया, प्रभातीलाल जांगिड़, शीशराम झाझड़िया, सूबेदार शमशेर सिंह, सुरेश शर्मा, रामनिवास दाधीच सहित अन्य ग्रामवासी मौजूद थे।

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