पहले डॉक्टर बना फिर बेटे ने UPSC निकाली:पिता के लिए तीन बेटों में से दो डॉक्टर और एक इंजीनियर बना, एक ने UPSC क्लियर की, दूसरा तैयारी में जुटा

झुंझुनूं2 महीने पहले
दीपक पिता सत्यकुमार के साथ।

झुंझुनूं के बड़ागांव के पूर्व सरपंच और आर्मी से रिटायर सत्यकुमार के बेटे दीपक कुमार ने यूपीएससी में 694वीं रैंक हासिल की है। डॉ. दीपक फिलहाल सराय के सरकारी अस्पताल में मेडिकल​​​​ ​ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. दीपक ने पहले डॉक्टर बनकर अपने पिता का सपना पूरा किया। फिर यूपीएससी क्लियर की। दरअसल, पिता जब आर्मी में थे तो उनके हिसाब से डॉक्टर या इंजीनियर ही सब कुछ होते थे। उन्होंने बेटों को कहा कि आपको डॉक्टर या इंजीनियर ही बनना है।

पिता के कहने पर तीन बेटों में से एक बेटा इंजीनियर और दो डॉक्टर बन गए। तीनों ने डिग्री लाकर अपने घर की दीवार पर टांग दी। जब यही पिता आर्मी से रिटायर होने के बाद गांव के सरपंच बनें तो उन्हें सिविल सर्विसेज की उपयोगिता का पता चला। तब उन्होंने फिर बेटों से सिविल सर्विस में जाने की इच्छा जताई। एक बेटे ने यूपीएससी क्लियर कर अपने पिता का सपना दोबारा पूरा कर दिया है। दूसरा बेटा इसकी पूरी तैयारी में लगा हुआ है।

बेटों ने दीवार पर टांग दीं डिग्रियां
दीपक के पिता सत्यकुमार ने बताया कि उन्हें इस बात का फख्र है कि बेटे ने दूसरी बार उनकी इच्छा को पूरा किया है। जब वे आर्मी में थे तब उन्होंने अपने बेटों से इंजीनियर और डॉक्टर बनने के लिए कहा था। तीनों बेटों ने दिन-रात एक कर यह डिग्री हासिल की और घर की दीवार पर टांग दी। सत्यकुमार का सबसे बड़ा बेटा भरत कुमार इंजीनियर है। दूसरा बेटा डॉ. दीपक और तीसरे नंबर का बेटा डॉ. मनोज, दोनों एमबीबीएस डॉक्टर हैं।

पिता के लिए क्लियर किया यूपीएससी
पूर्व सरपंच सत्यकुमार ने बताया कि जब गांव के लोगों ने उन्हें सरपंच बनाया तो आए दिन उनका आरएएस और आईएएस अधिकारियों से मिलना होता था। तभी उन्होंने अपने बेटों को सिविल सर्विस में जाने के लिए मोटिवेट किया। सबसे छोटे बेटे डॉ. मनोज ने हां कर दी और अपने साथ बड़े भाई डॉ. दीपक को भी यूपीएससी की तैयारी में लगा दिया। तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद विफलता मिलने से डॉ. दीपक ने हार नहीं मानी। इस बार चौथे प्रयास में एग्जाम को क्लियर कर लिया।

तीनों बेटों की डिग्रियां दिखाते पिता सत्यकुमार।
तीनों बेटों की डिग्रियां दिखाते पिता सत्यकुमार।

छोटे भाई ने हमेशा मोटिवेट किया
डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि एमबीबीएस के बाद उन्होंने कभी भी सिविल सर्विसेज के बारे में नहीं सोचा। पिता के कहने के बाद छोटे भाई ने खूब मोटिवेट किया। साथ ही पढ़ाई में भी साथ दिया, जिसके कारण वे सफल हो पाए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें मौका मिला तो वे नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए काम करेंगे। निचले स्तर के लोगों का लिविंग स्टैंडर्ड यूरोप और यूएसए के तर्ज पर या फिर उससे भी अच्छा बनाने के लिए काम करेंगे। 29 साल के डॉ. दीपक कुमार की स्कूली शिक्षा मिलिट्री स्कूल चहल सोलन में हुई। इसके बाद उन्होंने पीएमटी का एग्जाम क्लियर किया।

परिवार के साथ दीपक कुमार।
परिवार के साथ दीपक कुमार।

कमियों को अवसरों में बदलें युवा
युवाओं को लेकर डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि युवाओं को सरकार की कमियों, समाज की कमियों, परिवार की कमियों या फिर अन्य कमियों का रोना नहीं रोना चाहिए। उन्हें अपनी कमियों को अवसर बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। ऐसे युवाओं को सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि बंदिशों से घबराएं नहीं। उन्हें अवसरों में बदलें।

रिपोर्ट- लालचंद मीणा