धर्म - आस्‍था:चार दिसंबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, हमारे यहां दिखेगा नहीं

झुंझुनूं10 महीने पहले
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अगले माह 4 तारीख को इस साल का आखिरी सूर्यग्रहण होगा। - Dainik Bhaskar
अगले माह 4 तारीख को इस साल का आखिरी सूर्यग्रहण होगा।

अगले माह 4 तारीख को इस साल का आखिरी सूर्यग्रहण होगा, लेकिन हमारे यहां यह दिखाई नहीं देने से इसका असर नहीं होगा और ना ही सूतक लगेगा। इसी माह में 8 दिसंबर को विवाह पंचमी आएगी। पंडित हनुमान सहल के अनुसार इस दिन भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था। इसके साथ ही मार्गशीर्ष माह के अब शेष दिनों में भगवान विष्णु और भगवान शिव की विशेष आराधना का भी अवसर मिलेगा।

30 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी होगी। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा का महत्व है। इसके दो दिन बाद ही मार्गशीर्ष कृष्णा त्रयोदशी को प्रदोष व्रत रहेगा। जो भगवान शिव को प्रसन्न करने का विशेष दिन होता है। इसे मास शिवरात्रि भी माना जाता है ।

उत्पन्ना एकादशी, सूर्यग्रहण, विनायक चतुर्थी, विवाह पंचमी, मोक्षदा एकादशी पर्व आएंगे

30 नवंबर : उत्पन्ना एकादशी व्रत रहेगा। मार्गशीर्ष महीने में कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी और शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-उपासना की जाती है।

2 दिसंबर : मार्गशीर्ष कृष्णा त्रयोदशी प्रदोष व्रत रहेगा। यह भगवान शिव को समर्पित होगा। इसी दिन मास शिवरात्रि है, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। यह व्रत कृष्णपक्ष चतुर्दशी को रखा जाता है।

4 दिसंबर : इस बार अमावस्या के साथ सूर्य ग्रहण भी लगेगा। यह साल का आखिरी सूर्य ग्रहण है। दृश्यमान नहीं होने से सूतक नहीं लगेगा।

7 दिसंबर : मार्गशीर्ष मास शुक्ल पक्ष में विनायक चतुर्थी रहेगी। यह भगवान श्रीगणेश की पूजा-उपासना के लिए श्रेष्ठ है।

8 दिसंबर : विवाह पंचमी रहेगी। मान्यता है कि मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को भगवान श्रीराम और माता सीता का स्वयंवर-विवाह हुआ था।

9 दिसंबर : स्कन्द षष्ठी पर शिवनन्दन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है।

11 दिसंबर : मास- दुर्गाष्टमी रहेगी।

14 दिसंबर : मार्गशीर्ष शुक्ला एकादशी गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और उपासना की जाती है।

16 दिसंबर : सूर्य की धनु संक्रांति और प्रदोष व्रत रहेगा। सूर्य देव वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे।

18 दिसंबर : मार्गशीर्ष पूर्णिमा दत्तात्रेय जंयती या दत्त जयन्ती रहेगी। 18 दिसंबर को ही पूर्णिमा या सत्यनारायण व्रत है ।

19 दिसंबर : सुबह 10:5 बजे तक पूर्णिमा रहेगी। जिसके बाद पौष कृष्णा प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी। मंदिरों में विविध अनुष्ठान होंगे।

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