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खरीद केन्द्राें पर सन्नाटा पसरा:समर्थन मूल्य से अधिक हैं बाजार में सरसों के दाम, इसलिए 8 दिन में 13 किसान ही केंद्रों पर बेचने पहुंचे

झुंझुनूं10 दिन पहले
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  • सरकारी केन्द्राें पर समर्थन मूल्य कम हाेने से निजी व्यापारियाें काे बेच रहे हैं किसान सरसाें
  • रजिस्ट्रेशन और टोकन लेने में आ रही परेशानियों के कारण भी केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं किसान

राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले में समर्थन मूल्य पर चना और सरसाें की खरीद को लेकर बनाए गए खरीद केंद्रों के शुरू हाेने के बाद भी किसान उपज लेकर नहीं पहुंच रहे हैं। जिले में 16 खरीद केन्द्राें में से केवल तीन पर अब तक 13 किसानाें ने ही चना बेचा है। 12 खरीद केन्द्राें पर ताे अभी तक एक भी किसान नहीं पहुंचा। इसके पीछे बड़ी वजह बाजार में सरसों के दाम समर्थन मूल्य से अधिक हाेना है। इसलिए किसान मंडी काे प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों के ढुल-मुल रवैये के कारण रजिस्ट्रेशन व टोकन को लेकर आ रही परेशानी भी बड़ा कारण है।

जिसके चलते खरीद केन्द्राें पर सन्नाटा पसरा हुआ है। जींस बेचने में हो रही देरी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जिले में चना और सरसाें खरीद के लिए क्रय विक्रय व ग्राम सेवा सहकारी समितियाें के माध्यम से राजफैड ने 16 खरीद केन्द्र स्थापित किए गए हैं। इनमें झुंझुनूं मंडी, आबूसर, बिरमी, डूंडलाेद, नवलगढ़, मुकुंदगढ़, उदयपुरवाटी, गुढा़गाैड़जी, भाटीवाड़, चिड़ावा, बजावा, जसरापुर, सूरजगढ़, भैंसावता, लीखवा और पचेरी कलां में खरीद केन्द्र बनाए जा चुके हैं। लेकिन इनमें से 13 खरीद केन्द्राें पर एक भी किसान नहीं आया है।

जिले में सरकारी खरीद केन्द्राें पर उपज बेचने के लिए 668 किसानाें ने पंजीयन कराया है। इनमें सर्वाधिक पंजीयन सूरजगढ़ में 290 किसान पंजीकरण करा चुके हैं। झुंझुनूं में 67, आबूसर में 45, बिरमी में 17, डूंडलाेद में 129, उदयपुरवाटी में 19, गुढ़ा में 44, भाटीवाड़ में 16, चिड़ावा में 6, जसरापुर में 10, भैसावता में 5, लीखवा में 3 और पचेरी कलां में 17 किसानाें ने पंजीकरण कराया हैं। वही नवलगढ़, मुकुंदगढ़ और बजावा में अब तक एक भी किसान का पंजीकरण नहीं हाे पाया हैं। वही 13 किसान उपज बेचने के लिए खरीद केन्द्राें तक आए हैं। इसमें डूंडलाेद और आबूसर में 6-6 तथा झुंझुनूं में एक किसान ने 207.50 क्विटंल चना बेचा हैं।

सरसाें का मंडी भाव ज्यादा, किसान वहां जा रहे हैं
सरकारी खरीद केन्द्राें पर सरसाें का समर्थन मूल्य मंडी से कम हैं। सूत्राें ने बताया कि मंडी में सरसाें 5350 रुपए से 5400 रुपए प्रति क्विटंल के भाव से खरीदी जा रही हैं। जबकि सरकार ने उसके लिए 4650 रुपए प्रति क्विटंल का समर्थन मूल्य तय किया हैं। वही चने काे लेकर भी किसानाें के सामने कई परेशानी आ रही हैं। सरकारी खरीद केन्द्राें पर चना माेटा हाेने या नमी हाेने के कारण ठेकेदार खरीद नहीं कर रहे हैं। इससे किसान परेशान हाेकर निजी व्यापारियाें काे उपज बेचने काे मजबूर हाे रहे हैं।

चने का समर्थन मूल्य 5100 रुपए प्रति क्विटंल तय किया गया हैं। जबकि मंडी में व्यापारी 5150 रुपए के भाव से चने की खरीद कर रहे हैं। किसानाें ने बताया कि सरकारी खरीद केन्द्राें पर ठेकेदार माैके पर नहीं मिल रहे हैं। जिसके कारण किसान परेशान हाेकर निजी व्यापारियाें के पास जा रहे हैं। दूसरा सरकारी खरीद के बाद भुगतान काे लेकर समस्या हाेती हैं। ताे वही व्यापारी किसानाें काे नकद भुगतान दे रहे हैं।

जिले के 16 खरीद केंद्र पर आठ दिन में कम ही किसानों ने अपना अनाज बेचा है। इसका मुख्य कारण है कि समर्थन मूल्य की तुलना में बाजार भाव ज्यादा है। समर्थन मूल्य की तुलना में सरसों का भाव में ज्यादा अंतर है तो चना के भाव भी करीब-करीब बराबर से ही है।
-संदीप शर्मा, रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां

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