आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी मामला:सोसाइटी के सदस्यों ने झुंझुनूं एसपी मनीष त्रिपाठी को सौंपा ज्ञापन, सदस्यों को राहत दिलवाने की मांग

झुंझुनूं2 महीने पहले
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ज्ञापन देने पहुंचे लोग। - Dainik Bhaskar
ज्ञापन देने पहुंचे लोग।

अपने निवेशकों से 14 हजार करोड़ का घोटाला करने वाली बहुचर्चित आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर सोसाइटी के सदस्यों ने आज झुंझुनूं एसपी मनीष त्रिपाठी को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में जिला प्रशासन से सोसायटी के निवेशकों को राहत देने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि सोसाइटी का गठन 1999 में हुआ था और सोसाइटी से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं।

झूठे आरोपों के कारण सोसाइटी पर प्रतिबंध लगा दिया गया। साल 2018 में भ्रामक खबरों के चलते सोसाइटी से जुड़े वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों और सहयोगी ऋणी कंपनियों के विरुद्ध आनन-फानन में विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा कार्यवाही की गई और सदस्यों के हितों को पूरी तरह से अनदेखा किया गया। जिससे उनके जीवन भर की गाढ़ी कमाई संकट में पड़ गई।वहीं सहकारिता विभाग द्वारा भी बिना किसी पूर्व हिदायत और सूचना के लिक्विडेटर की नियुक्ति कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली गई। जिससे सदस्यों का सहकारिता विभाग से भी विश्वास उठने लगा है और वे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। सदस्यों ने झूठी शिकायतों के निस्तारण कर नियमानुसार सोसाइटी को चालू करने की मांग की है

14 हजार करोड़ का घोटाला

इस बड़े घोटाले की अगर बात करें तो राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, नई दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा में हजारों लोगों ने इस मामले में शिकायत दर्ज करवाई थी।उसके बाद इस मामले की तफ्तीश के लिए ईडी ने इस केस को टेकओवर किया था।इस मामले में कार्रवाई को अंजाम देते हुए ईडी अब तक करीब 1,489 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अटैच कर चुकी है। इस मामले की तफ्तीश के दायरे में सात राज्यों की करीब 19 जिलों से संबंधित मामले को ईडी के जांचकर्ताओं ने खंगाला और तमाम सबूतों को इकट्ठा किया। क्योंकि इस घोटाला के अंतर्गत सात राज्यों के अंदर फर्जीवाड़े को अंजाम देते हुए आम लोगों को ज्यादा से ज्यादा ब्याज देने के नाम पर ठगा गया था।

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