दुष्कर्म के मामले में फैसला:मासूम से दुष्कर्म के जिस आरोपी के खिलाफ परिवार रिपोर्ट नहीं दे रहा था उसे मृत्यु तक जेल

नवलगढ़2 महीने पहले
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आरोपी भागीरथ नायक। - Dainik Bhaskar
आरोपी भागीरथ नायक।
  • दुष्कर्म के मामले में पोक्सो कोर्ट ने चार माह में सुनाई सजा

चार माह पूर्व नवलगढ़ के निकट बड़वासी में ढाई साल की मासूम से दुष्कर्म के मामले में पाेक्साे काेर्ट झुंझुनूं ने आरोपी भागीरथ नायक (30) निवासी बड़वासी को माैत तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी पीड़िता की मां का रिश्ते में मामा लगता है और उसने घर में ही मासूम के साथ दरिंदगी की। घटना 21 मार्च 2021 की है।

आरोपी के रिश्तेदार ही होने के कारण परिवार वाले इसकी रिपोर्ट तक नहीं दे रहे थे, लेकिन ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस पीड़िता के घर पहुंची। गंभीर मासूम को अस्पताल में भर्ती करवाया। इसके कुछ ही देर बाद आरोपी को पकड़ लिया था। एसपी मनीष त्रिपाठी ने सीआई सुनील शर्मा को केस ऑफिसर नियुक्त किया था।

घटना के 17 दिन बाद ही पुलिस ने इसमें चालान पेश कर दिया था, लेकिन कोरोना के कारण सुनवाई नहीं होने से देरी हुई। पोक्सो कोर्ट ने आरोपी मौत तक कैद की सजा सुनाई। मामले में पीड़िता की ओर से पैरवी विशिष्ट लाेक अभियाेजक लाेकेंद्र सिंह शेखावत ने की।

ऐसे मिली सख्त सजा

प्रत्यक्षदर्शी गवाह पीड़िता के दस साल के मामा की काउंसलिंग के बाद करवाई गई थी गवाही
पुलिस के लिए यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि यह आशंका थी कि आरोपी के रिश्तेदार ही होने से कहीं कोर्ट में गवाह बदल ना जाए। इसलिए सबसे पहले पुलिस ने घटना के दिन ही मौके से तमाम फोरेसिंग सबूत तो जुटाए। मामले में मौके पर मौजूद मासूम के दस साल के मामा की गवाही महत्वपूर्ण थी।

पुलिस ने बयानों से पहले उसकी मनोचिकित्सक के सामने काउंसलिंग करवाई और मनोचिकित्सक के सामने ही बयान दर्ज किए। बच्ची के पांच वर्षीय भाई की भी काउंसलिंग की गई थी। जांच में सामने आया कि मासमू के लहुलुहान होने पर परिजन एक मेडिकल से दवा लेने गए थे। पुलिस ने मेडिकल संचालक को भी बतौर गवाह पेश किया।

परिवार वाले मामला ही दर्ज नहीं करवा रहे थे उन्हें समझाया, ठोस सबूत जुटाए

सुनील शर्मा | सीआई, नवलगढ़

यह केस हमारे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। हमें प्रारंभिक सूचना पीड़िता के परिवार ने नहीं दी थी बल्कि गांव के किसी अन्य व्यक्ति से मिली थी। जिस पर हम देर रात पीड़िता के घर पहुंचे तो परिवार वाले दुखी व सहमे हुए थे। हमने मासूम के बारे में पूछा। कमरे में जाकर देखा तो वह लहुलुहान मिली। हम समझ गए कि सूचना सही थी, लेकिन परिवार वाले आरोपी के रिश्तेदार ही होने से मामला दर्ज नहीं करवाना चाहते थे। हमने उन्हें समझाया। तब जाकर वे माने। इसके बाद मासूम को अस्पताल पहुंचाया। रात को ही एसपी साहब मनीष त्रिपाठी और डीएसपी साहब सतपालसिंह मौके पर आ गए थे। उनके निर्देशन में मौके से सारे सबूत जुटाए। इसके बाद सात दिन में ही 25 गवाहों के बयान करवाए। हमने 157 पेज की चार्जशीट तैयार की। डीएसपी साहब ने 17 दिन में ही चालान पेश किया। हमारी कोशिश थी कि जल्द से जल्द सजा मिले।

साढे चार माह में आया तीसरा ऐसा फैसला

  • 17 मार्च को पोक्सो कोर्ट ने दुष्कर्मी को फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला महज 26 दिन में सुनाया गया। आरोपी शाहपुर निवासी सुनील कुमार ने 19 फरवरी को खेत के पास खेल रही पांच साल की मासूम से दरिंदगी की थी। दुष्कर्मी अभी जेल में है।
  • 18 मार्च काे पाेक्साे काेर्ट ने आठ साल की मासूम से दुष्कर्म के आरोपी हाेशियार सिंह उर्फ धर्मपाल को मरते दम तक कारावास की सजा सुनाई थी। मामला नवलगढ़ के खिरोड़ के समीप की ढाणी का था।