महिला शक्ति को नमन:मिलकर बदलाव की शुरुआत; बेटियों को दीजिए ऐसे घर, मोहल्ले और गांव जैसा सम्मान

झुंझुनूं9 महीने पहले
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बेटियों का गांव : नूआं जहां प्रशासनिक, सैन्य, न्यायिक, शिक्षा समेत हर क्षेत्र में बेटियां आगे - Dainik Bhaskar
बेटियों का गांव : नूआं जहां प्रशासनिक, सैन्य, न्यायिक, शिक्षा समेत हर क्षेत्र में बेटियां आगे
  • महिला दिवस पर आज जिले के ऐसे गांव-मोहल्ले की कहानी जो जाने जाते हैं बेटियों के काम पर

झुंझुनूं. महिला सशक्तिकरण की दिशा में छोटी छोटी शुरूआत भी बड़ी मिसाल बन सकती हैं और यह शुरूआत हम अपने घरों, परिवारों, मौहल्लों और गांव से कहीं से भी कर सकते हैं। आज महिला दिवस पर हम आपको कुछ ऐसी ही कहानियों से रुबरु करवा रहे हैं जिन्होंने रुढ़ीवादिता से परे जाकर बेटियों को आगे बढ़ाने उन्हें बराबरी का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। आज ये बेटियों का घर, बेटियों का मोहल्ला या बेटियों का गांव बन गए हैं। यकीन मानिए, जिस दिन हर घर, मोहल्ला और गांव इनके जैसा हो जाएगा उस दिन महिलाओं को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकेगा।

बेटियों का घर : घर में चार बेटियां, चारों को पढ़ाया, सभी राजकीय सेवा में हैं अधिकारी

महिलाओं के प्रति सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा में घर-परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसी का सबसे बड़ा उदाहरण है बिरमी गांव का चाहर परिवार। यह परिवार पूर्व सरपंच भगवानसिंह चाहर का है। इनके चार बेटियां और एक बेटा है। परिवार हमेशा से ग्रामीण परिवेश में रहा। जहां बेटियों को लेकर कई तरह की बंदिशें और रिवाजें रहती हैं, लेकिन भगवानसिंह चाहर ने उनसे परे जाकर बेटे के साथ-साथ बेटियों को भी पढ़ाया लिखाया। उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। हर मुकाम पर हौंसला बढ़ाया। आज पांचाें भाई भाई बहन सरकारी सेवाओं में अच्छे पदों पर हैं। सबसे बड़ी बेटी मंजू चाहर राजस्थान लेखा सेवा की अधिकारी हैं।

अभी राजस्थान खादी ग्रामोद्योग बाेर्ड जयपुर में वित्तीय सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं। उनसे छाेटी सुमन चाहर राजस्थान सहकारी सेवा की अधिकारी हैं। वे केंद्रीय सहकारी बैंक में अधिशासी अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। भगवान सिंह की तीसरे नंबर की बेटी कुसुम चाहर राजस्थान वाणिज्य कर सेवा की अधिकारी हैं। वर्तमान में एसीटीओ के पद पर कार्यरत हैं। चाैथे नंबर की अंबिका चाहर स्कूल व्याख्याता हैं। वे भाैतिक विज्ञान की चूरू में व्याख्याता हैं। भगवान सिंह का बेटा प्रदीप चाहर अध्यापक है।

बेटियों का मोहल्ला : मित्तल कॉलोनी, जहां मिलकर होती है पढ़ाई, 9 बेटियां सीए बनी

जब महिला सम्मान और अधिकारों की शुरूआत घर से होगी तो यकीनन हमारा मौहल्ला, हमारी कॉलोनी भी इसी दिशा में आगे बढ़ेगी। ऐसा ही सबसे बड़ा उदाहरण है झुंझुनूं में पुराना बस स्टेंड के पास मित्तल काॅलाेनी का। जहां हर घर में बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरुकता है। कॉलोनी में 400 से ज्यादा परिवार रहते हैं। जिनमें करीब नौ बेटियां सीए हैं। किसी परिवार में एक, ताे किसी में दाे-दाे बेटियां सीए हैं। ऐसे ही परिवारों में बारदाना व्यापारी सुशील केडिया ने बताया कि वे दोनों बेटियों शालू केडिया और सीमा को पढ़ने का अवसर दिया। दोनों बिना किसी कोचिंग के आज सीए हैं। शालू अभी जीएसटी विशेषज्ञ के रुप में तथा सीमा हरि भक्ति कंपनी मुंबई की कंपनियों में जॉब कर रही है।

इसी प्रकार इस कॉलोनी में अशोक मोदी की पुत्री चंद्रभागा मोदी, नारायण प्रसाद खंडेलिया की पुत्री काजल खंडेलिया, शशिकांत पंसारी की पुत्री प्रतिभा पंसारी, रामगोपाल ढंढ़ारिया की पुत्री रक्षा ढंढ़ारिया व संत कुमार ढंढ़ारिया की पुत्री अंतिमा ढंढ़ारिया भी सीए हैं। इनमें से अधिकांश सीए बेटियां मुंबई, गुरुग्राम, दिल्ली में जॉब करती हैं। यहा की अन्य कई बेटियां भी सीए की तैयारी कर रही हैं।

बेटियों का गांव : नूआं जहां प्रशासनिक, सैन्य, न्यायिक, शिक्षा समेत हर क्षेत्र में बेटियां आगे
ऐसी ही कहानी है मंडावा के समीप नूआ गांव की। शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र हो जिसमें यहां की बेटियां आगे ना बढ़ी हों। प्रशासनिक सेवाएं, सैन्य सेवाएं, न्यायिक सेवाएं, शिक्षा, चिकित्सा हर क्षेत्र में यहां की बेटियों आगे हैं। नूआ पंचायत की 50 से अधिक बहू- बेटियां शिक्षक व कर्नल आईआरएस व आरजेएस हैं। जनहित एकता समिति अध्यक्ष जाकिर झुंझुनूवाला ने बताया कि नुआ की इशरत अहमद सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं। इस पद पर पहुंचने वाली वे प्रदेश की पहली मुस्लिम महिला हैं। इनके अलावा प्रवीण बानाे आरजेएस सेवा की अधिकारी है। वे वर्तमान में (डीग) भरतपुर में ऐसीजेएम पद पर कार्यरत हैं।

इसी तरह सेवानिवृत्त कलेक्टर अशफाक खान की बेटी फरहा खान आईआरएस सेवा की अधिकारी है और अभी सहायक आयुक्त उदयपुर में कार्यरत है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन अयूब खान की पुत्रवधू शबनम खान झुंझुनूं में स्कूल व्याख्याता हैं। गांव की सरपंच नाहिद बना बताती हैं कि गांव की बेटी बहूओं को आगे बढ़ाने के लिए यहां का हर परिवार जागरुक है। गांव की एक अन्य महिला शबनम बानाे भी हिस्ट्री की व्याख्याता है। इसके अलावा गांव की बेटी राजबाला वर्मा जयपुर में सीआई है।

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