पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

राजस्थान की ताम्र नगरी:यह तांबे का पहाड़, देश में सबसे बड़ी और गहरी भूमिगत खदानें केवल यहां

झुंझुनूं13 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर के लिए यह फोटो पाठक जयप्रकाश सोनी ने की। - Dainik Bhaskar
भास्कर के लिए यह फोटो पाठक जयप्रकाश सोनी ने की।
  • झुंझूनूं के खेतड़ी क्षेत्र में अरावली श्रृंखला के नीचे सवा तीन सौ किमी दायरे में फैली हैं तांबे की 300 से अधिक सुरंगे

सूरज की पहली किरण के साथ सोने सी आभा में दमकती यह पहाड़ियां राजस्थान में अरावली पर्वत माला का हिस्सा हैं। झुंझुनूं जिले के खेतड़ी और आसपास के हिस्से में तांबे के अकूत भंडार हैं। यह पूरा क्षेत्र ताम्र नगरी कहलाता है और देश का 50 प्रतिशत तांबा इन्हीं पहाड़ों से निकाला जाता है। इन पहाड़ियों में खनन का काम भारत सरकार का उपक्रम हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड करता है।

खेतड़ी की इस माइंस को खेतड़ी कॉपर कॉर्पोरेशन (केसीसी) कहा जाता है। इस पहाड़ के नीचे खेतड़ी व कोलिहान क्षेत्र में करीब 324 किमी के दायरे में 300 से अधिक भूमिगत खदानें हैं। जहां समुद्र तल से माइनस 102 मीटर की गहराई पर तांबा निकाला जाता है। ऐसे में यह देश की पहली सबसे बड़ी व सबसे गहरी तांबे की माइंस हैं।

यहां से निकाले गए तांबे की गुणवत्ता के कारण यह लंदन मेटल एक्सचेंज की ए ग्रेड में शामिल है और इसी कारण देश में सुरक्षा उपकरण इसी तांबे से बनाए जाते हैं। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के तहत ही मध्यप्रदेश में मलारखंड और झारखंड में घाटशिला भी तांबे की माइंस हैं। मलारखंड ओपन कास्ट माइंस है। जिसे अब भूमिगत किया जा रहा है जबकि घाटशिला भूमिगत माइंस है। जो अभी बंद है।

माइंस में 50 साल पुरानी तकनीक ट्रोलियों से अयस्क निकाले जाते हैं।
माइंस में 50 साल पुरानी तकनीक ट्रोलियों से अयस्क निकाले जाते हैं।

अब तक 54.11 मिलियन टन अयस्क उत्पादन हुआ

  • यहां 1972 से अब तक 54.11 मिलियन टन अयस्क उत्पादन हुआ। जिसमें पांच लाख टन तांबा मिला।
  • वर्तमान में यहां 76 मिलियन टन अयस्क मौजूद है। जिसमें 1.2 प्रतिशत तांबा निकलेगा।
  • यहां से हर साल केंद्र व राज्य सरकार को डेढ़ सौ करोड़ का टैक्स मिलता है।

तांबा उत्पादन में देश में दूसरे नंबर पर

  • प्रतिमाह यहां से एक लाख टन अयस्क का उत्पादन हो रहा है। जिसे बढ़ा कर प्रति माह 2.5 लाख टन करने की योजना है।
  • हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड की मलारखंड़ शाखा तांबा उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है जबकि केसीसी प्रोजेक्ट दूसरे नंबर है।
  • केसीसी से निकाला जाने वाला तांबा देश में सबसे अच्छी क्वालिटी का है। इसका उपयोग अंतरिक्ष, रेल्वे, डिफेंस, हवाई जहाज, बिजली उपकरण, इलेक्ट्रीकल वाहनों में किया जाता है।

केसीसी प्रोजेक्ट की खदानें देश में एक मात्र भूमिगत खदानें हैं। जहां आज भी ट्रोलियों से अयस्क का परिवहन करते हैं। यहां के अयस्क में सल्फाईड कॉपर की मात्रा होती है। ऐसे में यह अयस्क अच्छी तरह से गलने में सहायक होता है।- रजनीश सीगड, मुख्य प्रबंधक (खदान) केसीसी

इनपुट : विकास पारीक, खेतड़ी नगर

खबरें और भी हैं...