भास्कर पड़ताल:जो सिलेंडर सप्लायर की गाड़ी से जाने चाहिए वे रास्ते से ही निजी अस्पतालों की एंबुलेंस में रखे

झुंझुनूं6 महीने पहले
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जिले में ऑक्सीजन की किल्लत के बीच भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। जिसके बाद इसकी कालाबाजारी से इंकार नहीं किया जा सकता। शहर के रीको एरिया में एक निजी शांकभरी ऑक्सीजन प्लांट हैं। कोरोना संकट के कारण अब यहां से प्रशासन की निगरानी में सिलेंडर की सप्लाई होती है। जाे वैंडर्स के जरिए निजी अस्पतालों तक पहुंचाई जाती है।

पिछले दो दिन से भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि प्लांट के बाहर कुछ दूरी पर कभी दिन में तो कभी रात के समय निजी अस्पतालों की कुछ एंबुलेंस पहुंच रही हैं और उनमें प्लांट से निकले टैंपो से ऑक्सीजन के सिलेंडर भरे जा रहे हैं। जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं किया जा सकता। शहर में तीन वैंडर्स हैं। उनके जरिए ही यहां से सिलेंडर की आपूर्ति होनी चाहिए। इसकी निगरानी के लिए 13 नोडल अधिकारी और दो ऑडिट कमेटी बनी हैं। प्रशासन ने दाे अधिकारी लगा रखे हैं। वहीं दाे शिक्षक व एक आरएसी जवान की टीम तैनात रहती है। सवाल उठता है कि इस तरह से बीच रास्ते से ऑक्सीजन के सिलेंडर क्यों रखे गए।

प्रक्रिया : कमेटी जारी करती है सिलेंडर, सप्लायर पहुंचाता है
जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन की किल्लत काे देखते हुए जिला परिषद सीईओ जयप्रकाश नारायण काे नाेडल अधिकारी बनाया हुआ है। प्लांट से भरे ऑक्सीजन सिलेंडराें काे सीधे सप्लायर काे भिजवाया जाता है। सप्लायर कांट्रेक्ट वाले अस्पतालाें काे ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करता है। सिलेंडर देने के बाद निजी अस्पताल का अधिकृत व्यक्ति उसकी रसीद देता है। जाे वापस जमा करानी पड़ती है। ऑक्सीजन सिलेंडराें की संख्या तय करने के लिए एक कमेटी बनी हुई है। जाे ऑक्सीजन की आवश्यकता वाले मरीजाें की संख्या के आधार पर ऑक्सीजन सिलेंडर जारी करती है।

जिले में पिछले दो दिन से बीडीके अस्पताल और अन्य निजी अस्पतालों में कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ी है। बुधवार को सामने आया कि यदि ऐसे ही हालात रहे तो हमारे यहां भी ऑक्सीजन की किल्लत हो सकती है। अभी हमारे यहां प्रतिदिन 375 से 400 ऑक्सीजन सिलेंडर का उत्पादन हाे रहा है। जबकि 339 के लगभग सिलेंडर का उपयाेग हाे रहा है। हालांकि मांग व खपत में अंतर बेहद कम है, लेकिन इस तरह की तस्वीरें कालाबाजारी को लेकर कई सवाल खड़ा करती हैं।

  • दैनिक भास्कर की टीम शहर के रीकाे में बने निजी ऑक्सीजन प्लांट के पास पहुंची ताे प्लांट से कुछ दूरी पर लाेडिंग टेम्पाें से ऑक्सीजन के सिलेंडर एंबुलेंस में रखवाए जा रहे थे। जब वहां मौजूद एक व्यक्ति से इसके बारे में पूछा गया तो वह वहां से रवाना हो गया।
  • थाेडी देर बाद दाे अन्य निजी अस्पतालाें की एंबुलेंस वहां पहुंची। इनके आने से पहले ही यहां से सिलेंडर लेकर टैंपों रवाना हो गया था। ऐसे में यह दोनों एंबुलेंस खाली ही वापस लौट गई। अब सवाल यह उठता है कि इस तरह से यह सिलेंडर किसे और क्यों दिए जा रहे थे।

सीधी बात, डाॅ. छोटेलाल गुर्जर, सीएमएचओ
Q : जिले में ऑक्सीजन की किल्लत की स्थिति क्यों हाे रही है?

A: सिलेंडर का रिजर्व स्टाॅक नहीं है। हर दिन खपत के बराबर उत्पादन हाे रहा है। जिससे कई बार किल्लत हाे जाती है।

Q : प्लांट के पास से ही निजी अस्पतालाें काे सिलेंडर दिए जा रहे है?
A: प्लांट से वैंडर काे ही सिलेंडर देते है और वाे अपने अधीन निजी अस्पतालाें काे डिमांड के हिसाब से भेजते हैं। उनकी क्या व्यवस्था रहती है यह उनका काम है। इस तरह की बात है तो जांच करवा लेंगे।

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