पहल / जो जहां पहुंच गया उसे वहीं रोजगार मिल जाए और उद्यमियों को कामगार मिल सके, इसलिए लघु उद्योग भारती ने बनवाया एप

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  • उद्यमियों को अपने गृह क्षेत्र में स्टार्ट अप की मिलेगी मदद, लघु उद्योग भारती मुहैया करवाएगी तकनीकी सहयोग

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 07:28 AM IST

झुंझुनूं. कोरोना महामारी के दौर में इन दिनों विभिन्न राज्यों से अपने गृह राज्य में पहुंच रहे लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके और वहां की लघु एवं सूक्ष्म औद्योगिक इकाइयों को उनकी जरूरत के अनुसार कामगार मिल जाए, इसके लिए लघु उद्योग भारती ने एक एप बनाया है। इससे कुशल, अकुशल व तकनीकी जानकार लोगों को उनके गृह क्षेत्र में ही काम मिल सकेगा। विभिन्न राज्यों से आ रहे प्रवासी उद्यमी अपने क्षेत्र में ही कोई छोटा मोटा व्यवसाय करना चाहेंगे तो उन्हें स्टार्ट अप में मदद मिलेगी। लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष घनश्याम ओझा की पहल पर संस्था की जोधपुर इकाई ने यह एप तैयार करवाया है। इस एप से अधिकाधिक लोगो‌ं को जोड़ने के लिए लघु उद्योग भारती की झुंझुनूं इकाई की विशेष बैठक में विचार मंथन किया गया। संस्था का जिला अध्यक्ष महेश कैंया और सचिव कृष्ण कुमार रींगसिया की मौजूदगी में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए आयोजित बैठक में उद्यमियों ने कहा कि प्रधानमंत्री के आर्थिक पैकेज में भी लघु एवं सूक्ष्म इकाइयों का बढ़ावा देने की बात कही है।
हर हाथ को काम और उद्योग को कामगार मिलेगा
इस एप के माध्यम से उद्यमियों को उनकी मांग के अनुरूप कारीगर, कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइवर, हैल्पर, मशीन ऑपरेटर, फोरमैन, बाबू मिल सकेंगे तो इस तरह की श्रेणी के लोगों को अपने घर के आसपास काम मिल सकेगा। जिले में करीब चार सौ छोटी-मोटी इकाइयां हैं जिनमें वर्तमान में 70 फीसदी से ज्यादा में काम शुरू हो चुका है, लेकिन वहां उनकी जरूरत के 50 फीसदी ही कामगार मिल पाए हैं क्योंकि बहुत से लोग अपने राज्यों में चले गए हैं। इधर जो लोग अन्य राज्यों से आए हैं, उन्हें पता नहीं है कि उनके लिए कहां काम उपलब्ध है। 
एप में एकत्र होने वाला डाटा उपयोगी साबित होगा  
श्री गल्ला व्यापार संग के सचिव रोहिताश बंसल ने कहा कि संबंधित उद्यमी और कामगार इस एप पर अपना पंजीकरण कराएंगे तथा इस डेटा का उपयोग सभी लोग एक दूसरे के लिए कर सकेंगे। ये उद्यमियों और कामगारों के बीच एक सेतु की तरह काम करेगा। लोकल के लिए वोकल की अवधारणा इससे साकार होगी। स्थानीय स्तर पर बनने वाला उत्पाद बढ़ेगा तो लघु उद्यमियों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इस काम में लघु उद्योग भारती के साथ भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, ग्राहक पंचायत संगठन, सहकार भारती ने भी सहयोग कर रहे हैं।

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