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शाबास अमित:आपने ट्रांसफार्मर से चिपके 6 साल के आदिल की जान बचाई, इसीलिए वह हमारे बीच में है

पिलानी/झुंझुनूं12 दिन पहलेलेखक: लालचंद मीणा
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  • पिलानी के नजदीकी नूहंद गांव में छह साल का मासूम आदिल ट्रांसफार्मर से चिपका, अमित ने बहादुरी से बचाया, अब सेहत पूरी ठीक

यह खबर जितनी डरावनी है उतनी ही संदेश देने वाली भी है। खबर है- पिलानी कस्बे के नजदीक नूहंद गांव में एक मासूम खेलते समय ट्रांसफार्मर में दौड़ रहे करंट से चिपक गया और बूरी तरह से झुलस गया। उसे गांव के ही एक युवक ने बहादुरी दिखाते हुए करंट से छुड़ाया।

इतना ही नहीं उसे पिलानी के बिरला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी सेहत में सुधार है। संदेश है- समय पर दुर्घटनाग्रस्त की मदद करना। क्योंकि यदि करंट से झुलसे मासूम को युवक ने समय पर बचाया नहीं होता तो शायद आज वह हमारे बीच नहीं होता।

जानकारी के अनुसार नजदीक के गांव नूहंद निवासी माेबिन खां तेली का बेटा आदिल (6) अपने एक साथी बच्चे के साथ गांव के चाैक में खेल रहा था। रास्ते के पास ट्रांसफार्मर में दौड़ रहे करंट से आदिल चिपक गया। वह झुलस गया। उसके शरीर जलने लगा। धुंआ निकलने लगी। उसकी चीख सुनकर वहां पास में बैठा नूहंद का अमित पूनिया दौड़कर आया। उसे कुछ नहीं सूझा तो वह पड़ौस के घर में पड़ा लकड़ी का फंटा उठाकर लाया और उससे वारकर मासूम काे करंट से छुड़ाया। फिर फंटे से ही उसे ट्रांसफार्मर से अलग किया।

जिंदगी बचाने की कहानी अमित की जुबानी : बच्चे को तड़पता देख न जाने कहां से हिम्मत आ गई

मैं शनिवार को दोपहर में खाना खाकर दुकान पर गया था। दुकान से वापस घर लौट रहा था। समय करीब 12.35 का था। मुझे अचानक तेज धमाके और बेल्डिंग करने जैसी आवाज सुनी। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो एक बच्चा ट्रांसफार्मर के पास करंट से झुलस रहा था। उसमें धुंआ निकल रहा था। उसे तड़पता देख मैंने शोर मचाया। एकबारगी तो आंखों के सामने अंधेरा सा छा गया। कुछ नहीं सूझा, लेकिन दूसरे ही पल मुझे याद आया कि लकड़ी में करंट नहीं आता। तब मैंने पड़ौस के घर में पड़ा लकड़ी का फंटा (पाटिया) उठाया और बिना कुछ सोचे समझे फंटे से बच्चे के हाथ पर वार कर उसे अलग किया। इसके बाद उसी फंटे से उसे ट्रांसफार्मर से कुछ दूर किया। तब तक ग्रामीणों की भीड़ लग गई थी। उन्हें बच्चे के शरीर पर मिट्‌टी मलने के लिए कहकर मैं गाड़ी लेने दौड़ गया। रास्ते से गुजर रही गाड़ी को रुकवाकर बच्चे को पिलानी के अस्पताल भिजवाया।
-जैसा कि लालचंद मीणा को बताया।

खुद ही दौड़कर पड़ौस में खड़ी गाड़ी लेकर आया और बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया
महज आठवीं तक पढ़े अमित के शोर मचाने पर मौके पर ग्रामीणाें की भीड़ जुट भी गई। बाकी लोग करंट से झुलसे आदिल के शरीर पर मिट्‌टी की मालिस करने में लग गए, जबकि अमित दौड़कर पास में ही चल रहे शादी समारोह में गया। वहां खड़ी एक गाड़ी लेकर आया और बच्चे को तत्काल उसमें पिलानी के बिरला अस्पताल लेकर गया। जहां उसका उपचार चल रहा है।

रविवार को बच्चे की हालत में सुधार है। परिजनों ने कहा-यदि अमित नहीं होता तो शायद आज आदिल जिंदा नहीं होता। गांव के एडवोकेट अशोकसिंह राठौड़ ने बताया कि शनिवार दोपहर में आदिल (6) पुत्र मोबीन खां तेली निवासी नूहंद गांव के चौक में एक अन्य बच्चे के साथ गुजर रहा था। तभी गांव के अमित पूनिया पुत्र सुरतसिंह पूनिया ने सूझबूझ दिखाते हुए आदिल काे बचाया। हर काेई अमित पूनिया की बहादुरी की तारीफ कर रहा है।

भास्कर अलर्ट

पीएस जाट, पूर्व एमडी, अजमेर डिस्काॅम

  • बिजली के ताराें के पास से न गुजरे। बच्चाें काे ताराें व ट्रांसफार्मर के पास नहीं जाने की सलाह दें।
  • कई जगह डिस्काॅम की ओर ट्रांसफार्मर काे चारदीवारी बनाकर ढका जाता है। इसलिए ट्रांसफार्मर काे कवर्ड किया जाना चाहिए।
  • बारिश के इस मौसम में डिस्काॅम को सतर्क और चौकन्ना रहकर लोगों की सुरक्षा करनी चाहिए। हमें भी जागरूक रहना चाहिए।
  • कई बार बारिश के माैसम में आकाशीय बिजली गिरने से ताराें में करंट आ जाता है। ऐसे समय में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
  • बच्चों और बड़ों को भी बिजली के ट्रांसफार्मर या बिजली के खंभों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

लापरवाही : ट्रांसफार्मर कवर्ड नहीं था
नूहंद गांव के चाैक में लगा ट्रांसफार्मर आम रास्ते के पास लगा हुआ था। इसकाे ढका नहीं गया था। खुले ट्रांसफार्मर से हादसे हाेने की आशंका रहती है। शनिवार काे भी ऐसा ही हुआ। जब वहां से गुजर रहा बालक इसकी चपेट में आ गया। ग्रामीणों का कहना है वे विभाग से कई बार शिकायत कर चुके हैं कि ट्रांसफार्मर को कवर करें लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

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