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मंडे पॉजिटिव:कोरोना में विदेश नहीं जा सका तो गांव में खेती शुरू की, 50 हजार महीना कमा रहा

मंडावा/झुंझुनूं8 दिन पहलेलेखक: बाबूलाल शर्मा
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मंडावा. खेत में लहराती सब्जी के बीच बाबूलाल व परिजन। - Dainik Bhaskar
मंडावा. खेत में लहराती सब्जी के बीच बाबूलाल व परिजन।
  • खालासी के मजदूर की सफलता की कहानी

संकटकाल भी आपको बहुत कुछ सीखाकर जाता है और नई शुरूआत करने के एक नहीं अनेक अवसर देता है। शर्त यह है कि आप संकट को किस नजरिए से देखते हैं। यदि आप बुरे वक्त को कोसते ही रहेंगे तो यकीन मानिए वक्त भी आपका साथ नहीं देगा, लेकिन यदि आपने संघर्ष करने की ठान ली तो आपके लिए सफलता के नए रास्ते खुलेंगे। ऐसी ही कहानी है मंडावा के निकट खलासी गांव के बाबूलाल की।

कुछ समय पहले तक बाबूलाल के पास कोई काम धंधा नहीं था। वह लोगों से कर्ज लेकर काम की तलाश की विदेश गया। वहां जो कमाई होती थी वह कर्जा उतारने में ही चली जाती थी। इसी बीच वह घर लौटा, लेकिन वापस विदेश जाता उससे पहले ही 2020 में लॉकडाउन लग गया और वह नहीं जा पाया। जिससे उसके सामने परिवार के पालन पोषण का ही संकट खड़ा हो गया।

घबराने की बजाय उसने खुद के खेत में फल सब्जी की खेती शुरू की। अपनी मेहनत के बूते वह अब हर माह 45 से 50 हजार रुपए कमा रहा है। उसका कहना है कि अपने गांव में रहकर मैं इतनी कमाई कर सकता हूं कभी सोचा ही नहीं था।

खेत में कुआं खुदवाया, सोलर पैनल लगवाया
बाबूलाल ने पुश्तैनी जमीन पर कुआं बनवाया तथा सोलर ऊर्जा के जरिए पारंपरिक खेती की बजाय ऑर्गेनिक फल सब्जी उगाना शुरू किया। धीरे उसकी मेहनत रंग लाई। खेत में फल सब्जी की पौध लहलहाने लगी। इसी के साथ ही उन्होंने पशुपालन भी शुरू कर दिया था। जिससे उन्हें खेत में उपयोग के लिए खाद की आपूर्ति होने लगी।

बाबूलाल बताते हैं कि उनके पास अब 4 भैंस एक गाय व 10 बकरियां हैं। अब उन्हें गांव में ही एडवांस में फल सब्जी के ऑर्डर की बुकिंग प्राप्त हो जाती है। लोग उनके खेत पर आकर भी अपनी आवश्यकतानुसार खरीददारी करके ले जाते हैं।

खेती के दम पर कर्जा उतारा : बाबूलाल ने बताया कि गांव में ही खेती के दम पर उन्होंने अपना कर्जा भी उतार दिया है। वे अपने खेत में मिर्ची, टमाटर, बैंगन, तरबूज की पैदावार कर रहे हैं। आने वाले समय के लिए भिंडी मक्का ग्वार सहित अलग-अलग सब्जियां उगा रहे हैं।

उनके पास केवल ढाई बीघा खेत है। जिसमें उन्होंने कुआं बनवाकर सोलर पैनल लगवाया है। बिजली की आपूर्ति हो रही है। जहां बिजली से मोटर 6 घंटे ही चलती है वहीं सोलर पैनल के जरिए 9 घंटे तक सिंचाई कर सकते हैं।

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