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छाछ लेकर घर आ रही मासूम की दर्दनाक मौत:24 बार कहने पर भी अफसरों ने दिन में डंपर बंद करने की बात नहीं मानी, नतीजा-ओवरस्पीड डंपर ने बच्ची को कुचला, मौत

नीमकाथाना24 दिन पहले
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गणेश्वर. पुलिस से उलझते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
गणेश्वर. पुलिस से उलझते ग्रामीण।
  • 3 साल में 123 ने जान गंवाई
  • सख्त कार्रवाई, डंपर दिन में बंद करने जैसी मांगों पर तीन घंटे जाम

गणेश्वर के कालीकाला में बुधवार सुबह दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। सड़क पार कर रही पांच साल की गोलू को तेज गति से चला रहे डंपर चालक ने कुचल दिया। हादसे में बच्ची का एक हाथ मौके पर ही कटकर अलग हो गया। खून से लथपथ दोहिती को उसके नाना बीरबल गुर्जर अस्पताल लेकर गए। कपिल अस्पताल से बच्ची को जयपुर रैफर किया, जहां ट्रोमा में दम तोड़ दिया। इधर, बच्ची का हाथ सड़क पर ही छूट गया था, जिसे लेकर उसकी नानी शांति देवी बचाने की गुहार लगाती रही। घटना से नाराज लोगों ने नीमकाथाना-चीपलाटा रोड पर जाम लगा दिया।

करीब तीन घंटे प्रदर्शन चला। लोगों की मांग थी कि परिजनों को मुआवजा मिले, चालक पर सख्त कार्रवाई हो व स्पीड ब्रेकर बनने चाहिए। मामला बढ़ने पर डीएसपी गिरधारीलाल शर्मा भी पहुंचे, जिन्हें भी लोगों का विरोध झेलना पड़ा। कई दौर की वार्ता के बाद आश्वासन पर मामला शांत हुआ। बच्ची का नाम गोलू था। वह पड़ोसियों से छाछ लेकर लौट रही थी। पांच दिन पहले मां संतोष के साथ हरजनपुरा-बासड़ी से ननिहाल कालीकाला (गणेश्वर) आई थी। गोलू इकलौती बेटी थी। पिता शैतान गुर्जर खेती करते हैं। डंपर माइंस पर जा रहा था व आबादी क्षेत्र में रफ्तार 80 किमी प्रतिघंटा के आसपास थी।

अफसरों की मरी हुई संवेदना की गवाही

कटा हाथ लेकर नानी बचाने के लिए गुहार लगाती रही तब तक बच्ची मर चुकी थी

ये वीभत्स तस्वीर भास्कर इसलिए प्रकाशित कर रहा है। क्योंकि ये डंपर चालक से लेकर क्षेत्र के सरकारी अफसरों की लापरवाही का परिणाम है। क्योंकि लोग लगातार मांग कर रहे हैं फिर भी डंपरों काे दिन में आने से नहीं रोका जा रहा है। लोग उम्मीद करते हैं पांच साल की मासूम और उसके परिजनों का ये दर्द शायद अफसरों का दिल पिघला दे।

ये हादसा नहीं हत्या है, क्योंकि 12 दिन पहले ऐसे ही हादसे में हुई थी वकील की मौत, फिर भी अफसर मौन

सबसे पहले भास्कर में लीगल एक्सपर्ट एडवोकेट रामसिंह गुर्जर की राय

लोगों की मांग पर सुनवाई होनी चाहिए। जीवन का हक संवैधानिक अधिकार है। ओवरलोड डंपरों को लेकर लोगों की मांग पर लोकसेवक सुनवाई नहीं करते तो 166ए में उनके खिलाफ कार्रवाई संभव है। लगातार हादसों पर भी ओवरलोड व ओवर स्पीड के मामले में जिम्मेदार कार्रवाई नहीं करते हैं तो ये लापरवाहीपूर्ण कृत्य है। इसे छिपाने पर 201 आईपीसी में अपराध है। लोग आगे आए तो कानूनी मदद के लिए अभिभाषक संघ सहयोग करेगा।

डंपर भगा ले गया चालक मामा ने पीछा कर पकड़ा

गोलू अपने ननिहाल में घर से महज 20 मीटर दूर थी। सड़क पार कर रही थी कि सामने से तेज रफ्तार डंपर आ गया। वह संभल पाती, तब तक डंपर उसे कुचलकर निकल गया। उसका एक हाथ व पैर वहीं टूटकर अलग हो गए। घर के बाहर खड़े उसके मामा जितेंद्र दाैड़े। परिवार के लोग भी गोलू की चीख सुनकर बचाने दौड़े। जितेन्द्र बाइक सवार युवक के साथ डंपर के पीछे चला गया। आधा किमी दूर उसने डंपर को रोका। पचलंगी (झुंझुनूं) के चालक मक्खनलाल को पकड़कर लाए।

दिनभर में गुजरते हैं दो हजार से ज्यादा डंपर, स्पीड 80 से ज्यादा

हादसे का कारण तेज रफ्तार की लापरवाही है, लेकिन एक और सच भी छुपा है। ये वो सच है, जिससे अफसर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। क्योंकि ये लापरवाही ऐसी है जिस पर लोगों का कहना है कि ये हादसा नहीं हत्या है। 12 दिन में ये दूसरी मौत है, जबकि तीन साल में 123 मौत हो चुकी हैं।

भास्कर ने हादसे के बाद गणेश्वर से नीमकाथाना सदर, कोतवाली जैसे इलाकों में करीब 50 ऐसे लोगों से बातचीत की जो इस तरह के हादसों के गवाह रहे हैं या फिर इस आंदोलन से जुड़े हैं। लोगों का कहना है कि 12 महीने से हम मांग कर रहे हैं कि माइंस पर जाने वाले डंपरों को दिन में रोका जाए।

क्योंकि ये सभी आबादी से गुजरते हैं ओर ओवरस्पीड हाेते हैं। 12 दिन पहले गणेश्वर में तेज रफ्तार डंपर ने बोलेरो को सामने से टक्कर मारी थी। उसमें न्यौराणा निवासी वकील लक्ष्मीनारायण शर्मा की मौत हो गई थी। दो साल से ग्रामीणों ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को करीब दो दर्जन ज्ञापन दिए हैं।

हकीकत बताते आंकड़े

चिंता : पाटन, नीमकाथाना क्षेत्र के दाे सौ से ज्यादा गांवाें में रफ्तार का खौफ

भास्कर पड़ताल में सामने आया कि क्षेत्र में करीब 150 माइंस हैं जाे पाटन व नीमकाथाना इलाकाें में आती हैं। इतनी ही करीब अवैध माइंस चल रही हैं। स्थानीय लाेगाें के मुताबिक दिनभर में करीब दाे हजार डंपर निकलते हैं जाे आबादी क्षेत्र से तेज गति से जाते हैं। इसलिए हादसे हाेते हैं। गाैरतलब है कि नीमकाथाना व पाटन के माइनिंग जोन में तीन साल में हुए 331 सड़क हादसों में 123 लोगों की मौत हो गई। 279 लोग घायल हुए हैं।