• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Sikar
  • ACP Is Initiated In Delhi Police, After Duty In Corona Period, Time Taken Out For Studies, Has Already Done Exam Fight 2 Times

सीकर की बहू ने UPSC में हासिल की 208वीं रैंक:दिल्ली पुलिस में ACP है दीक्षा, कोरोना काल में ड्यूटी के बाद भी पढ़ाई के लिए निकाला टाइम, पहले भी 2 बार कर चुकी है एग्जाम फाइट

सीकर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
यूपीएससी परीक्षा में दीक्षा ने हासिल की 208 वीं रैंक। - Dainik Bhaskar
यूपीएससी परीक्षा में दीक्षा ने हासिल की 208 वीं रैंक।

सीकर जिले की फतेहपुर तहसील के गांव कांगनसर की बहू दीक्षा तोमर ने यूपीएससी परीक्षा में 208वीं रैंक हासिल की है। वर्तमान में दीक्षा दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत है। मूलत: हरियाणा के रोहतक की रहने वाली दीक्षा तोमर की साल 2018 में फतेहपुर के कांगनसर गांव के आईआरएस मुकेश कुमार से शादी हुई थी। जो वर्तमान में दिल्ली में आयकर विभाग में कार्यरत हैं।

पूर्व में भी दो बार पास की है परीक्षा

भास्कर से खास बातचीत में दीक्षा ने बताया कि उन्होंने अपनी स्कूली हरियाणा में ही पूरी की। जिसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन लिया। कॉलेज एजुकेशन के साथ-साथ ही सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। साल 2017 यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने 611वीं रैंक हासिल की। लेकिन और बेहतर करने के लिए उन्होंने साल 2018 में वापस परीक्षा दी और मास्टर्स के लिए जेएनयू दिल्ली में दाखिला लिया। जिसमें दीक्षा टॉप - 500 में रही। जिसके बाद ट्रेनिंग के लिए दीक्षा को कॉलेज छोड़ना पड़ा। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद दीक्षा को फरवरी 2020 में दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर पोस्टिंग मिली।

ईस्ट दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके में है एसीपी के पद पर कार्यरत दीक्षा।
ईस्ट दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके में है एसीपी के पद पर कार्यरत दीक्षा।

लंबी ड्यूटी के बाद भी निकाला पढ़ाई के लिए समय

दीक्षा तोमर ने बताया कि फरवरी 2020 में ईस्ट दिल्ली इलाके में पोस्टिंग मिलने के कुछ दिनों बाद ही पूरे देश में कोरोना महामारी संक्रमण फैला। जिसके चलते फ्रंटलाइन वर्कर होने के नाते जिम्मेदारियां भी बढ़ चुकी थी। ऐसे में अब देश की रक्षा और बेहतर कर दिखाने की जिद्द एक साथ पूरी करनी थी। ऐसे में नौकरी के अलावा 5 -6 घंटे का समय पढ़ाई के लिए अलग से निकाला। जिस दिन ऑफ ड्यूटी होती उस दिन 12 से 13 घंटे पढ़ाई करती।

पति भी है आईआरएस, सपने पूरे करने में पूरा सहयोग

दीक्षा ने बताया कि उनकी शादी साल 2018 में फतेहपुर के कांगनसर निवासी मुकेश कुमार से हुई। जो दिल्ली में आयकर विभाग में कार्यरत है। दीक्षा ने कहा कि मेरी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय मैं अपने पति को देती हूं। जिन्होंने मुझे हमेशा से ही पूरा सहयोग किया। खुद की नौकरी कठिन होने के बाद भी हर पल मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे और मुझे कभी अकेला या कमजोर महसूस नहीं होने दिया। जिसकी बदौलत ही मैं आज इस मंजिल पर पहुंच पाई हूं।

पति आईआरएस मुकेश व दीक्षा।
पति आईआरएस मुकेश व दीक्षा।

शादी से पहले भी घर में रहा पढ़ाई का माहौल

दीक्षा ने बताया कि वर्तमान में उनके पिता दलजीत सिंह हरियाणा के झज्जर जिले में डीईओ के पद पर कार्यरत हैं और माता सुनीता भी कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। शुरू से ही घर में पढ़ाई का माहौल रहा। माता-पिता ने कभी किसी चीज के लिए बाध्य नहीं किया। तीन भाई-बहनों में दीक्षा सबसे बड़ी है, जिनका एक छोटा भाई भी सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी कर रहा है और दूसरा अभी कॉलेज में है।

विषम परिस्थितियों में भी खुद को कमजोर नहीं समझे

दीक्षा ने वर्तमान में सिविल सर्विसेज और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि परिस्थिति चाहे कितनी ही विषम क्यों ना हो खुद को कभी कमजोर या अकेला मत समझो। केवल अपना पूरा ध्यान अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में रखो। दीक्षा ने बताया कि कोरोना संक्रमण जैसी भयंकर महामारी के बावजूद भी देश में हजारों विद्यार्थी ऐसे होंगे, जिन्होंने कोरोना की वजह से अपनों को खोया है या कोरोनाकाल में कई मुश्किलों का सामना किया है। इसके बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी और कठिन संघर्षों के बाद अपने लक्ष्य को हासिल किया है।