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  • After Being Declared A Terrorist, Sadness Prevails In The Neighborhoods Of Sikar, They Are Also Discussing, But They Become Cautious On Seeing Unknown Faces.

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फैसले के बाद पसरा सीकर में सन्नाटा:आतंकी घोषित होने के बाद सीकर के मौहल्लों में छाई उदासी, चर्चा भी कर रहे, लेकिन अनजान चेहरे देखते ही हो जाते सतर्क

सीकरएक महीने पहले
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मौहल्ले कुरैशीयान में पसरा सन्नाटा - Dainik Bhaskar
मौहल्ले कुरैशीयान में पसरा सन्नाटा

आंतकी रियाज भटकल के साथ देश में धमाकों की साजिश रच रहे स्लीपर सेल में शामिल सीकर के छह युवाओं को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके बाद सीकर में वैसे तो पूरे इलाके में ही चर्चा हो रही है, लेकिन दो इलाकों में मातम सा पसरा है। दोनों मौहल्लों में ही लोग चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अनजाना चेहरा देखते ही उससे पूछताछ शुरू कर देते है।

इन दोनों इलाके से ही इन आतंकियों को एटीएस के कहने पर पुलिस ने पकड़ा था। सभी आतंकी सिमी से जुड़े थे। अधिकतर इंजीनियरिंग की पढ़ाई जयपुर से कर रहे थे। फैसला आने के बाद दोनों मौहल्लो में जाकर देखा तो वहां पर उनके मकान से आवाजाही बिल्कुल बंद है।

आतंकी मोहम्मद उमर के पिता सीकर में बच्चों का अस्पताल चलाते है। फैसला आने से पहले परिवार के साथ जयपुर चले गए। फैसला आने के बाद स्टाफ भी यही चर्चा कर रहा था। डॉक्टर साहब के बारे में पूछने पर बताया कि वे तो जयपुर गए हुए है। अस्पताल सूना पड़ा हुआ था। यहां तक की लाइट तक नहीं जलाई हुई थी।

वहीं मौहल्ला कुरेशियान में रहने वाले मोहम्मद वाहिद और पेंटर सज्जाद के घर पर आसपास जरूर लोग मौहल्ले के लोग थे, लेकिन घर में कोई हलचल नहीं थी। सभी लोग आपस में चर्चा भी इसी फैसले को लेकर कर रहे थे। वहीं कुछ युवा मोबाइल से जानकारी मिलने पर बता रहे थे। हालांकि अनजान चेहरे देखते ही उनकी चर्चा रुक जाती और सामने वाले से पूछताछ शुरू कर देती।

बता दे कि पूरे सात साल पहले 27 मार्च 2014 को ही पुलिस ने सीकर के युवाओं द्वारा आतंकी ट्रेनिंग करने की जानकारी मिलने पर एटीएस के कहने पर स्थानीय पुलिस ने पांच लोगों को एक साथ उठाया था। इसमें आकिब भाटी निजी कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग कर रहा था। आकिब पहले मारूफ और फिर वकार के संपर्क में आया। दोनों के तैयार होने के बाद मुंबई जाकर ट्रेनिंग ली। मारूफ के साथ मिलकर सीकर के कई ठिकानों के नक्शे तैयार किए।

मोहम्मद वकार 2012 में सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा कर रहा था। 2013 में छोड़ दिया और मेडिकल स्टोर पर काम करने लगा। आकिब ने वकार को वकास और मारूफ से मिलवाया था। दोनों ने मिलकर यहां तकरीेरें करवाई थी।

सज्जाद पेंट​र को वकार और आकिब ने अपने साथ जोड़ा, इसके बाद से हर योजना में साथ रहने लगा। मोहम्मद वाहिद सीकर में तहसील कार्यालय के सामने टाइपिस्ट का काम करता है। नक्शे भी बनाता था। वाहिद ने ही स्केच और नक्शे तैयार किए थे।

जोधपुर में पकड़ में आया बरकत भी सीकर का ही रहने वाला था। उसके ही परिवार का मोहम्मद उमर मेडिकल की तैयारी कर रहा था। मारूफ भी इसके परिवार का ही है। हमउम्र होने के कारण दोनों ने आसानी से अपने साथ उमर को मिला लिया था।

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