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संक्रमण का डर:कोरोना से 19 कर्मियों की मौत के बाद जीएसएस में काम ठप, 28 लाख किसानों में से 3 लाख को ही मिला बिना ब्याज लोन

सीकर22 दिन पहलेलेखक: सुरेंद्र चिराना
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  • ग्राम सेवा सहकारी समितियों में बायोमैट्रिक सत्यापन से संक्रमण का डर
  • जीएसएस व्यवस्थापकों ने बायोमैट्रिक सत्यापन का विकल्प मांगा
  • कार्मिकों को कोरोना पॉलिसी में शामिल करने को लेकर रिट भी लगाई

कोरोना संक्रमण की आशंका में सहकारी बैंकों से 90 फीसदी किसान बिना ब्याज फसली ऋण से वंचित हो रहे हैं। क्योंकि बैंकों से जुड़ी ग्राम सेवा सहकारी समितियों में बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद ही लोन देने का नियम है। दो महीने में इन समितियों के 19 व्यवस्थापकों की मौत और 100 से ज्यादा के संक्रमित होने के बाद कार्मिक बायोमैट्रिक सत्यापन की वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने के लिए हाईकोर्ट में रिट लगा चुके हैं।

ऋण वितरण की धीमी रफ्तार के कारण प्रदेश में 2 माह में 3 लाख किसानों को ही 1500 करोड़ का लोन दिया गया है। 28 लाख किसानों को 8800 करोड़ के लोन का टारगेट है। फिलहाल बुआई सीजन चल रहा है। ऐसे वक्त में किसानों को ऋण नहीं मिल पा रहा है। व्यवस्थापकों को कहना है कि बायोमैट्रिक सत्यापन में बार-बार अंगूठा पंच करने से संक्रमण की आशंका रहती है।

भास्कर पड़ताल अंगूठे से वेरिफिकेशन के कारण बढ़ता है संक्रमण का खतरा
फसली लोन वितरण में किसान एवं व्यवस्थापक को बायोमैट्रिक सत्यापन के दौरान दो-दो बार अंगूठे से बायोमैट्रिक मशीन पर पुष्टि करनी होती है। पहले किसान को बकाया जमा कराने के बाद किसान एवं व्यवस्थापक को अंगूठा लगाना होता है। दूसरा नए सिरे से लोन स्वीकृत करने पर दोनों को अंगूठे से बायोमैट्रिक सत्यापन करना होता है। ऐसे में दिनभर बायोमैट्रिक मशीन पर प्रत्येक किसान को दो बार तथा प्रत्येक किसान के बाद व्यवस्थापक को दो बार अपने अंगूठे से बायोमैट्रिक सत्यापन करना होता है।

19 व्यवस्थापक सहित दो दर्जन से ज्यादा किसानों की मौत, फिर भी नहीं चेता विभाग : 1 अप्रैल से अब तक प्रदेश भर में 100 से ज्यादा व्यवस्थापक तथा बड़ी संख्या में किसान कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। इनमें 19 व्यवस्थापक एवं दो दर्जन से ज्यादा किसानों की अब तक मौत हो चुकी है। हालात यह है कि प्रदेश भर में 40 से ज्यादा व्यवस्थापक आज भी बायोमैट्रिक सत्यापन की वजह से कोरोना पॉजिटिव चल रहे हैं। नागौर के नांवा तहसील के किसान बनवारी लाल व किसान सोहन लाल मीणा ने बताया कि वे जीएसएस से फसली लोन लेने के बाद 3 दिन में ही बीमार हो गए। जांच कराई तो तो 5 दिन बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
एक्सपर्ट व्यू
बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के बारे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा रहता है क्योंकि कई किसान अंगूठा लगाते समय थूक काम में लेते हैं। इसी कारण पिछले साल कोरोना को देखते हुए राशन की दुकानों पर बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन बंद कर दिया था।

प्रदेश में सबसे पहले सीकर में हुई थी कोरोना से व्यवस्थापक की मौत
वर्ष 2020 मार्च में कोरोना की पहली लहर में ही सीकर जिले में प्रदेश भर में सबसे पहले श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के नांगल भीम जीएसएस के व्यवस्थापक नरसीराम सैनी की कोरोना से मौत का मामला सामने आया था। मृतक के परिवार को आज तक सरकार से कोई सहायता नहीं मिली है।
सरकार कुछ नहीं कर रही तो सरकारी कर्मचारी संघ ने दायर की याचिका
संक्रमण के गंभीर हालात को देखते हुए राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ जयपुर प्रदेश अध्यक्ष नंदलाल वैष्णव, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष महादेव सिंह, प्रदेश महामंत्री नंदाराम चौधरी, प्रदेश प्रवक्ता हनुमान सिंह राजावत ने हाईकोर्ट जोधपुर में अपील कर बायोमैट्रिक सत्यापन की जगह है वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने तथा कार्मिकों काे कोरोना पॉलिसी में शामिल करने की मांग की है।

जिले के 3 हजार किसानों को ही मिल पाया है लोन
जिले के करीब 1 लाख किसानों को 450 करोड़ के लोन वितरण का टारगेट है। लेकिन प्रक्रिया धीमी होने के कारण अभी तक 3 हजार किसानों को लोन मिल पाया है।

फसलों की बुआई से पहले इसलिए जरूरी है लोन
सरकार के द्वारा दिया जाने वाला फसली लोन बुआई से पहले मिलने पर ही किसानों के काम आ सकता है। क्योंकि फसलों की बुआई से पहले किसानों को खाद, बीज व कीटनाशक आदि की खरीद के साथ ही फसलों की सिंचाई के लिए उचित प्रबंधन तथा भूमि समतलीकरण आदि काम के लिए पैसों की जरूरत होती है। लॉकडाउन में किसान पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

बायोमैट्रिक सत्यापन में प्रदेशभर से कोरोना संक्रमण फैलने की शिकायतें मिली है। इसे लेकर व्यवस्थापकों ने कोर्ट में भी अपील की है। कोर्ट के निर्णय के अनुसार नई व्यवस्था को लेकर उच्च स्तर पर अनुसंधान करवाया जा रहा है।
मुक्तानंद, रजिस्ट्रार, सहकारी समिति

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