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  • Because Of Dilip Kumar, The Girls Of Muslim Society Are Achieving A Place In Education In Sikar, They Give Importance To The Education Of Girls For The Betterment Of The Society.

जब सीकर आए थे दिलीप कुमार:दिलीप कुमार की वजह से सीकर में मुस्लिम समाज की बच्चियां एजुकेशन में मुकाम हासिल कर रही है, वे समाज की भलाई के लिए लड़कियों की पढ़ाई को तवज्जो देते

सीकर20 दिन पहले
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सीकर में दिलीप कुमार - Dainik Bhaskar
सीकर में दिलीप कुमार

भले ही दिलीप कुमार का सीकर से सीधा कोई रिश्ता नहीं था, लेकिन उन्होंने मुस्लिम समाज की लड़कियों को पढ़ाने के लिए जो काम किया, उसे आज भी याद रखा जाएगा। दिलीप कुमार उर्फ युसूफ खान के हाल ही में हुए इंतकाल के बाद उनकी सामाजिक कार्यों को याद किया जा रहा है। उनसे जुड़े पलों को याद कर रहे है। सीकर में भी फिल्मी क्षेत्र से जुड़े वाहिद खान की दिलीप कुमार से नजदीकी थी। उनके बुलावे पर ही दिलीप कुमार सीकर में आए थे। हालांकि दिलीप कुमार जैसी हस्ती जहां भी जाती थी अपनी छाप छोड़कर जरूर आती थी।

मंच पर सायरा बानो और दिलीप कुमार
मंच पर सायरा बानो और दिलीप कुमार

दिलीप कुमार महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास करते थे। इसलिए वे अपने सामाजिक कार्यक्रम में बेगम सायरा बानो को हमेशा साथ रखते थे। सीकर में जब वो आए तो सायरा बानो भी साथ ही थी। यहां पर उन्होंने वाहिद चौहान के परिवार वालों से न सिर्फ मुलाकात की, बल्कि पूरी मेहमाननवाजी का लुत्फ भी उठाया।

वाहिद चौहान उन पलों को ऐसे बताते हैं जैसे कल की ही बात हो। 20 साल पहले 8 अप्रैल को बच्चियों के स्कूल के लिए वे सीकर आए थे। वाहिद फिल्म निर्माता थे। इस कारण ही वाहिद की दिलीप कुमार से पहचान थी। पहचान पारिवारिक संबंधों में बदल गई।

गर्ल्स एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए दिलीप कुमार सीकर में तीन दिन रहे। दिलीप कुमार ने कार्यक्रम में कहा था कि बच्चियों को पढ़ाना चाहिए, बच्चियां ही हमारे समाज काे राेशन करेंगी। बच्चों को पढ़ाना समाज के लिए फायदेमंद होता है। बच्चियों को पढ़ाने वाले संगठनों का इस्तकबाल करते हुए हमें बेहतर समाज बनाना है। जो बच्चे कभी स्कूल का नाम तक नहीं जानते उनको पढ़ा लिखाकर अनुशासन का पाठ सिखाने से बड़ा और कोई धर्म नहीं होता।

सम्मान के दौरान चुटकी लेते दिलीप कुमार
सम्मान के दौरान चुटकी लेते दिलीप कुमार

दिलीप कुमार ने कहा था कि सामाजिक कार्यों में सभी को भागीदारी निभानी चाहिए। वह दिन दूर नही होगा जब काेई बेटी अशिक्षित नहीं रहेगी। शिक्षा की अहमियत का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षित व्यक्ति अनुशासित भी होता है। प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति को लेकर मन में धारणा बन जाती है कि खुद का और समाज का फायदा जानता है।

वाहिद खान कहते हैं कि ये सबकुछ तब हुआ जब उन्होंने सीकर में एक स्कूल खोली थी। उसमें मुस्लिम समाज के लोगों ने बच्चियों को पढाने में रुचि नहीं दिखाई थी। नतीजा दिलीप कुमार साहब का नाम लेकर उन लोगों को कहता तो वे उन्हें भी अच्छा नहींं मानते। जब ये बात दिलीप कुमार से कहीं तो वे खुद सीकर आकर लोगों को समझाने की पहल की।

दिलीप कुमार के सीकर आने के दौरान उस समय विधायक एमादुद्दीन खान दुर्रुमियां, राजीव अरोड़ा समेत कई लोग जयपुर से आए थे।

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