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परेशानी:स्मृति वन में दाद, अस्थमा जैसी बीमारियां फैलाने वाली गाजर घास

सीकरएक महीने पहले
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  • स्मृति वन में प्रवेश द्वार से लेकर काफी दायरे में फैली हुई है ये घास, त्वचा से जुड़े कई रोगों का कारण बन सकती है

स्मृति वन में उगी गाजर घास लोगों के लिए परेशानी का सबक बन सकती है। घूमने के लिए आने वाले लोग इस घास के कारण दाद, खाज, खुजली आदि बीमारियाें से ग्रसित हो सकते है। स्मृति वन में प्रवेश द्वार के दोनों ओर से लेकर काफी दायरे में ये घास फैली हुई है। इसे हटाया नहीं जा रहा है। इस घास से कई बीमारियां जन्म लेती हैं। जल्द ही काबू नहीं पाया गया तो यह घास अधिक बढ़ जाती है और आसपास के दूसरे स्थानों पर भी पैदा हो जाती है।

स्किन स्पेशलिस्ट डाॅ रविंद्र धाबाई ने बताया कि अमेरिकन घास/कांग्रेस घास/गाजर घास को वैज्ञानिक भाषा में पारथेनियम हिस्टिरोफोरस के नाम से जाना जाता है। इंसानों के अलावा पशु-पक्षियों, जीव-जन्तुओं एवं फसलों के लिए भी हानिकारक है। एक फीट के इस पौधे पर उगने वाली फूल के परागण हवा में तेजी से फैलते हैं, जो संपर्क में आने वाले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।

मुश्किल यह है कि इससे होने वाले संक्रमण को दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है पर पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। इंडियन जर्नल ऑफ में कांग्रेस घास के सेहत संबंधी असर पर शोधपत्र प्रकाशित किया गया। हर महीने आने वाले 450 में 250 मरीजों में त्वचा संक्रमण की वजह यह घास होती है।

ऐसे होता है संक्रमण
पारथिनियम का एक पौधा 20 से 30 हजार बीज पैदा करता हैं। इसके पौधे पर खिलने वाले सफेद फूल के परागण हवा के जरिए मनुष्य के संपर्क में आते है। फूल की फंगस त्चचा पर खुजली पैदा करती है, जबकि सांस के जरिए फेफड़े तक पहुंचे परागण साइनस और अस्थमा का शिकार बनाते हैं। परागण में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़े में सूजन बढ़ाते हैं। इसके लगातार संपर्क में रहने पर यह त्चचा के कैंसर का भी कारण बनती है।

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