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नए सीकर का विक्ट्री साइन:1996 में 4 छात्रों से शुरू हुई कोचिंग, अब बना हब देश को दिए 5 हजार डॉक्टर और 10 हजार इंजीनियर

सीकर3 महीने पहले
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विक्ट्री का साइन बनाती शहर की नवलगढ़ और पिपराली रोड अब एजुकेशन हब के रूप में पहचान बना चुकी हैं। - Dainik Bhaskar
विक्ट्री का साइन बनाती शहर की नवलगढ़ और पिपराली रोड अब एजुकेशन हब के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
  • 31 जनवरी 1996 को सीकर की शिक्षा नगरी के रूप में नींव पड़ी
  • 25 साल में सीकर इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई में कोटा के बराबर कैसे खड़ा हो गया

यह नया सीकर है। इस सीकर की सबसे प्रमुख पहचान है एजुकेशन। लगातार सफलताओं के साथ आईआईटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी का गढ़ बनता जा रहा सीकर अब कोटा को पीछे छोड़ने के लिए उड़ान भर चुका है। देशभर से स्टूडेंट्स यहां इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी के लिए आते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक, कोचिंग एजुकेशन का यह कारोबार अब 400 करोड़ रुपए सालाना से अधिक का हो चुका है। जबकि सभी कोचिंग-स्कूलिंग और इससे जुड़े उद्योगों का कुल कारोबार हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। आज से ठीक 25 साल पहले यानी 31 जनवरी 1996 को इस नए सीकर का उदय हुआ था। इस कारोबार की नींव रखी एक ऐसे व्यक्ति ने जिसने 10 दिन पहले कॉलेज पासआउट किया था।

“जब मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, उसी वक्त तय कर लिया था कि कॉलेज से बाहर निकलते ही कोचिंग इंस्टीट्यूट की शुरुआत करूंगा। मेरी आंखें जब इस बारे में सवाल पूछ रही होतीं तो मेरे गुरुजी हरिनाथ चतुर्वेदी कहते कि हर छात्र को डॉक्टर-इंजीनियरिंग बनाने के लिए तुम्हें ही आगे आना होगा। बस इसी सपने की चाहत ने मुझमें मेहनत करने की ताकत भर दी।” ये बताते समय कोचिंग कारोबार के जनक माने जाने वाले सीएलसी निदेशक श्रवण चौधरी की आंखें चमक उठती हैं। चौधरी कहते हैं, “मैंने हमेशा परिश्रम को तव्वजो दी। मैंने कभी नहीं सोचा कि कल क्या होगा।”

सीकर में कोचिंग का सक्सेस मंत्र : लगातार कठिन परिश्रम+एक्यूरेसी

सीकर की सक्सेस का सूत्र भी है। हार्ड वर्क+एक्यूरेसी+कंसिसटेंसी=सक्सेस। इसी एक सूत्र ने नए सीकर को जन्म दिया है। यही सीकर की ताकत भी है और भरोसा भी है। इसलिए हर स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को सीकर पर पूरा भरोसा है। इसलिए हर साल 20 से 25 हजार स्टूडेंट्स हर साल इसी भरोसे की बदौलत डॉक्टर-इंजीनियरिंग बनने के सपने के साथ यहां आते हैं।

स्टूडेंट्स
तब : 1996 में कोचिंग की शुरुआत में सिर्फ 4 छात्र थे। इन सभी छात्रों का पहले ही साल में चयन हुआ था।

आज : अब नए सीकर की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज 60 हजार छात्र हैं। हर साल हजारों छात्र डॉक्टर-इंजीनियर बनते हैं।
कोचिंग
तब : 1996 में सिर्फ एक कोचिंग थी-सीएलसी। उसके करीब 12 साल बाद गुरुकृपा कोचिंग संस्थान की नींव रखी गई।
आज : अब मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कई कोिचंग इंस्टीट्यूट हैं। कोटा की बड़ी कोचिंग भी अब सीकर आने लगी है।

सवाल
तब : नए सीकर के शुरुआती साल 1996 में 4 छात्र दिन रात पढ़ाई करत, लेकिन चुनिंदा सवाल ही हल कर पाते थे।

आज : एक साल में एक छात्र 65 हजार से ज्यादा सवाल भी हल करता है। स्टूडेंट्स दिन रात एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी में लगे रहते हैं।

फीस
तब : 1996 में डॉक्टर-इंजीनियरिंग की कोचिंग फीस महज 5000 रुपए थी। हॉस्टल की व्यवस्था उस वक्त नहीं थी।

आज : अब इंजीनियरिंग-डॉक्टर की पढ़ाई की फीस करीब 96 हजार रुपए है। कुल पढ़ाई का खर्चा 1.50 लाख से ज्यादा का होता है।

हॉस्टल
तब : छात्र किराए पर मकान के लिए जाते तो लोग उन्हें भगा देते थे। नवलगढ़-पिपराली रोड बिल्कुल खाली होती थी।

आज : इन इलाकों में 300 से ज्यादा हॉस्टल व पीजी है। अब लोग अपने मकान का कमरा किराए पर देने के लिए कोचिंग संस्थानों के पास जाते हैं।

कोचिंग इंडस्ट्री से रचा सीकर का नया अर्थशास्त्र

  • 03 लाख की आबादी है सीकर की।
  • 15 बड़े कोचिंग संस्थान। कुल कोचिंग संस्थानों की संख्या 120 से अधिक हैं।
  • 60 हजार से ज्यादा स्टूडेंट, इंजीनियरिंग, मेडिकल, डिफेंस, शिक्षक भर्ती सहित अन्य तैयारी के लिए हर साल जुटते हैं।
  • 02 हजार से अधिक फैकल्टी। सीकर में देश के अन्य प्रदेशों की फैकल्टी भी पहुंचने लगी है।
  • 03 सौ से ज्यादा होस्टल व मैस। जिनमें मिलती है घर जैसी सुविधाएं और खाना।
सीकर. 25 साल पुरानी 1996 की सीएलसी इंस्टीट्यूट की तस्वीर। जब इस नए सीकर की नींव पड़ रही थी।
सीकर. 25 साल पुरानी 1996 की सीएलसी इंस्टीट्यूट की तस्वीर। जब इस नए सीकर की नींव पड़ रही थी।

खाता खुलवाने गया तब मुझे भगा दिया था आज मेरी कोचिंग में ही बैंक है : चौधरी
31 जनवरी 1996 को सीकर की पहली कोचिंग सीएलसी की नींव मेरे गुरु हरिनाथ चतुर्वेदी ने रखी थी। वे ही इस नए सीकर के भीष्म पितामह है। उन्होंने मुझसे कहा था-गांवों के बच्चों के साथ बड़े शहरों में भेदभाव होता है। यहां इन छात्रों के लिए कोचिंग होनी चाहिए। 21 जनवरी 1996 को मैं कॉलेज से निकला और 10 दिन बाद 4 छात्रों के साथ सीएलसी की नींव रखी।

पहले ही साल में यह छात्र इंजीनियरिंग में पास हुए। 1997 में 200 बच्चों का एडमिशन हुआ। मैं खाता खोलने गया तो मुझे बैंक वालों ने भगा दिया। आज कोचिंग में ही बैंक है। सीकर अब तक 5 हजार से ज्यादा डॉक्टर व 10000 से ज्यादा इंजीनियर सीकर दे चुका है। मेरा अब सिर्फ एक बड़ा सपना है-मेडिकल का देश का टॉपर छात्र सीकर सीएलसी से हो। इसलिए मेरा सूत्र है-हर गांव से डॉक्टर-इंजीनियर बने अपना। श्रवण चौधरी, निदेशक, सीएलसी सीकर

ताकत : जिन पर हर स्टूडेंट व पेरेंट्स को है अटूट भरोसा
1. सीकर में रहकर इंजीनियरिंग व मेडिकल परीक्षा की तैयारी कर रहा प्रत्येक स्टूडेंट सालभर में 65 हजार सवाल हल करता है। यहां स्टूडेंट्स वीकली टेस्ट के अलावा हर महीने दो से तीन जेईई व नीट परीक्षा के समकक्ष टेस्ट देता है। साल में एक स्टूडेंट 35 से 40 टेस्ट से गुजरता है।
2. पूरे देश से बड़ी फैकल्टी अब सीकर की ओर रुख करने लगी है। एग्जाम और इंटरव्यू का प्रोसेस अब टीचर के लिए भी अपनाया जाने लगा है।
3. सीकर के कोचिंग अब गांव-गांव में हर घर में डॉक्टर और इंजीनियर देने की मुहिम में जुटे हैं। टेस्ट का प्रोसेस भी बेहद कठिन अपनाया जाता है ताकि स्टूडेंट्स पिछड़े नहीं।
4. आर्थिक रूप से कमजोर स्टूडेंट्स को आगे बढ़ाने के लिए यहां स्कॉलरशिप भी सबसे ज्यादा दी जाती है। हर साल कोचिंग करीब 50 करोड़ से ज्यादा की स्कॉलरशिप दे देते हैं।
5. सुरक्षा के लिए कोचिंग संस्थानों ने शहर में 2000 से ज्यादा हाईटेक सीसीटीवी कैमरे भी लगा रखे हैं।
6. कोचिंग संस्थानों से 0 से एक किमी की दूरी में ही 300 से अधिक हॉस्टल है।

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