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पोस्ट कोविड:दिल और दिमाग पर कोरोना का हमला, ठीक हो चुके लोगों में मौत का डर, नींद नहीं आने की शिकायत बढ़ी

सीकर17 दिन पहले
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  • स्वास्थ्य विभाग ने इलाज के लिए पोस्ट कोविड क्लीनिक शुरू किया
  • दो पारियों में संचालन

कोरोना तन ही नहीं मन को भी संक्रमित कर रहा है। कोरोना के कारण अपनों को खोने वाले लोगों को मानसिक रोगों ने घेर लिया है। इसके अलावा कोरोना से रिकवर कर चुके मरीजो में भय, अवसाद और अनिद्रा की बीमारी बढ़ गई है। एक सप्ताह में एसके हॉस्पिटल की मनोरोग ओपीडी में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है।

ओपीडी में पहुंच रहे मरीजों का डॉक्टरों से एक ही सवाल रहता है-मैं मर तो नहीं जाऊंगा। एसके मेडिकल के प्रोफेसर डॉ. महेश चौधरी ने बताया कि दूसरी लहर में संक्रमण तेजी से फैला। कई लोगों ने अपनों को खो दिया। ऐसे में ठीक हो चुके लोगों में भी तनाव बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण पोस्ट कोविड क्लीनिक खोलने का फैसला किया।

विभाग के शासन सचिव ने इस संबंध में आदेश जारी किए। क्लीनिक दो पारियों में संचालित किए जा रहे हैं। विभाग इलाज के लिए काउंसलरों का पुल बनाएगा, जो संक्रमण से उबर चुके लोगों की काउंसलिंग करेंगे। सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक पहली पारी व दोपहर 2 से रात 8 बजे तक दूसरी पारी चलेगी। मरीजों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग संविदा पर काउंसलरों की भर्ती कर सकेगा। काउंसलरों को आठ हजार रुपए मानदेय दिया जाएगा।

दिल और किडनी के मरीजों की संख्या भी बढ़ी
कोरोना संक्रमण से उबरे लोगों में कई बीमारियां उभरने लगी हैं। इनमें दिल और किडनी की बीमारियों से परेशान लोगों की संख्या ज्यादा है। कॉर्डियोलॉजिस्ट के पास ओपीडी-इमरजेंसी में जो मरीज पहुंच रहे हैं, उनमें 20 फीसदी मरीज ऐसे हैं, जिन्होंने कोरोना को मात दी है।

हालांकि, विशेषज्ञ कहते हैं कि, इनमें ऐसे मरीज ज्यादा हैं, जिन्हें पहले से दिल से जुड़ी बीमारी, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई बीपी की समस्या रही है। ऐसे मरीजों में गंभीर लक्षण देखने को मिल रहे हैं। एसके हॉस्पिटल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रघुनाथप्रसाद के मुताबिक, ओपीडी में रोजाना औसतन 10 मरीज पोस्ट कोविड वाले आते हैं। इनमें 40 से 60 साल की उम्र वाले ज्यादा है।

कोविड रिकवरी के चार से छह सप्ताह बाद कुछ मरीजों में हृदय से जुड़े गंभीर लक्षण दिखे हैं। डॉक्टरों का कहना है यदि पहले से दिल के मरीज हैं और कोरोना की चपेट में आ गए हैं तो पहले से चल रही दवाई बिल्कुल न छोड़ें। अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर दवा की डोज सेट करा लें। कोविड रिकवरी के बाद लिपिड प्रोफाइल, सीआरपी, डी-डाईमर, शुगर की जांच जरूर कराएं। इससे गंभीर समस्या से बचा जा सकता है।

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