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शहीद दीपचंद की अमर ज्योत:सीआरपीएफ जवान दीपचंद को पैतृक गांव में दी अंतिम विदाई, युवाओं ने बनाई 10 किमी लंबी मानव शृंखला

सीकरएक महीने पहले
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शहीद पिता को 8 साल के जुड़वां बेटों विनय और विनीत ने नम आंखों से सैल्यूट कर देश के प्रति जज्बा दिखाया।
  • शेखावाटी के सपूत सीआरपीएफ के हैड कांस्टेबल की सैन्य सम्मान से अंत्येष्टि
  • सोपोर में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में बुधवार को दीपचंद शहीद हो गए थे

सीआरपीएफ के हैड कांस्टेबल शहीद दीपचंद वर्मा को गुरुवार शाम को अंतिम विदाई दी गई। सीआरपीएफ आरएएफ 83 बटालियन और 89 बटालियन के अधिकारियों व जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। दीपचंद वर्मा पूरे देश के हीरो है, जिसने देश के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी है। उसका बलिदान जाया नहीं जाएगा। हमारे जवान मुंह तोड़ जवाब जरूर देंगे।

दीपचंद बहादुर जवान था। वह अपने परिवार से ज्यादा हमारे परिवार का हिस्सा था और है। सेना और हमारे देश की एकजुटता की ही ताकत है कि शहीद को सम्मान देने के लिए युवा 10 किमी लंबी मानव श्रृंखला बनाते हैं। हर जुबां पर भारत माता के जयकारें हाेते है। मैंने उनके 8 साल के जुड़वां बेटे विनित-विनय को तिरंगा सौंपा तो उनकी आंखों में भी पिता और देश के लिए गर्व था। रींगस से बावड़ी स्टैंड तक युवाओं ने बाइक रैली निकाल आतंकियों को मुंह तोड़ जवाब दिया है। (जैसा कि उन्होंने बावड़ी संवाददाता श्रवण कुमार को बताया।)

शहीद के लिए नम हुई आंखों में आतंकवाद के खिलाफ गुस्सा, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए

जम्मू-कश्मीर के सोपोर में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में बुधवार को बावड़ी के दीपचंद शहीद हो गए थे। वे सीआरपीएफ 179 बटालियन के हैड कांस्टेबल थे। गुरुवार को उनकी पार्थिव देह पैतृक गांव बावड़ी पहुंचते ही हर आंखें नम हो गई, लेकिन आतंकियों के खिलाफ गुस्सा भी था। लोग शहीद दीपचंद वर्मा के सम्मान में नारे लगा रहे थे।

2 किलोमीटर तक महिलाओं से बुजुर्गों तक की जुबान पर नारे
अंतिम विदाई में 2 किमी तक लोगों की भीड़ थी। गांव की हर महिला, युवा और बुजुर्ग अपने लाडले काे अंतिम विदाई देने आए। इस दौरान पाकिस्तान मुर्दाबाद और दीपचंद वर्मा अमर रहे... के नारे लगते रहे। हिंदुस्तान जिंदाबाद की गूंज बिल्कुल भी कम नहीं हुई।

2 बेटों का तिरंगा हाथ में लेकर संदेश-हम भी सेना में जाएंगे
शहीद के बेटे विनय और विनीत ने पिता की पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। सीआरपीएफ आईजी विक्रम साहगल ने शहीद के पुत्रों को तिरंगा दिया। बेटे विनीत का संदेश था-सरकार को मेरे पापा का बदला जरूर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे भी सेना में जाएंगे।

चाचा ने कहा-बचपन से ही बेल्ट की नौकरी चाहता था
शहीद के चाचा ओंकारमल ने बताया कि दीपचंद का शुरू से ही बेल्ट की नौकरी करने का सपना था। बाद में पड़ोस में चार सैनिकों को देखकर उसने सेना में जाने का फैसला किया। दीपचंद की शहादत पर हमें गर्व है। उन्होंने कहा कि आतंकियों को मुंह तोड़ जवाब मिलना चाहिए।

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