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कृषि उपज मंडी में होगी विशाल आमसभा:केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मोर्चा खोला, 16 सितम्बर को करेंगे प्रदर्शन

सीकर11 दिन पहले
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प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए। - Dainik Bhaskar
प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए।

केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने अपना मोर्चा खोल दिया है। पिछले कई महीनों से पार्टी की ओर से आंदोलन की शुरुआत करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में जिले में जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है। आंदोलन के अंतर्गत अब 16 सितम्बर को पार्टी की ओर से दोनों सरकारों की नीतियों के विरोध में एक विशाल आमसभा का आयोजन किया जाएगा। जिसमें अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए पूरे जिले में जनसम्पर्क कर रही है।

पार्टी के राज्य सचिव कामरेड अमराराम ने कहा कि मार्क्सवादी केंद्र एवं राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध 1991 से करते हुए आ रही है। वर्तमान में भी इन जनविरोधी नीतियों के विरोध में पार्टी ने अभियान चला रखा है। जिसके अंतर्गत पार्टी की ओर से 16 सितम्बर को कृषि उपज मंडी में दोनों सरकारों की जन नीतियों के विरोध में विशाल आमसभा करते हुए प्रदर्शन किया जाएगा और सभा के पश्चात ज्ञापन दिया जाएगा।

पूर्व में केंद्र की यूपीए सरकार ने देश की सार्वजनिक सम्पदाओं को खुदरा में बेचने का कार्य किया। उसके बाद सत्ता में एनडीए की जनविरोधी सरकार आई। जिसने जनता के टैक्स के पैसों से बने हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन आदि को थोक रूप में बेचने का कार्य किया है। एनडीए सरकार तो खेती, रोटी और किसानों को भी निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने को लगी हुई है। गत वर्ष केंद्र सरकार की ओर से पारित तीनों कृषि कानूनों के विरोध में पिछले करीब साढ़े नौ महीने से देश के किसान दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हैं, लेकिन फिर भी केंद्र सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है।

जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही राजस्थान सरकार

अमराराम ने कहा कि आम आदमी केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों से तो परेशान है और अब राज्य सरकार भी इस पर जले पर नमक छिड़कने का काम करने में लगी हुई है। जिसने ग्रामीण क्षेत्रों के मनरेगा मजदूरों की दैनिक आय में 1 रुपए की वृद्धि कर उनके साथ मजाक किया है। आज पूरे देश में पेट्रोल और डीजल के भाव और बिजली की दर सबसे अधिक राजस्थान में है, जबकि मौजूदा सरकार ने सत्ता में आने से पहले जनता से वादा किया था कि वह किसी भी चीज की दर नहीं बढ़ाएगी।

राज्य में सिंगल फेस बिजली कनेक्शन के करीब डेढ़ करोड़ उपभोक्ता है। जिनके 800 रुपए का मीटर लगता है। जिसे राज्य सरकार अब रद्दी में बेच रही है और उसकी जगह 8 हजार रुपए वाले मीटर को एक निजी कंपनी से खरीद रही है। जबकि गत भाजपा सरकार ने इसी निजी कंपनी से 8 हजार वाले मीटर ख़रीद रहे थे तो कांग्रेस पार्टी ने उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। अब खुद ही वहीं बिजली मीटर की खरीद कर रही है। बिजली बोर्ड का विघटन होने के बाद सरकार ने ढाई-तीन रुपए प्रति यूनिट वाले बिजली के थर्मल प्लांट तो बंद कर दिए हैं। 20 साल से बड़ी कंपनियों से 18 से 20 रुपए प्रति यूनिट में बिजली की खरीद कर रही है।

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