एसके (सब्र करो) अस्पताल:रात में किशोरी को भर्ती नहीं किया, बुखार पीड़ित काे संभाला नहीं ताे बेड से गिरा

सीकर/नीमकाथानाएक महीने पहले
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गनेड़ी से आई बीमार बालिका काे जांच के अभाव में भर्ती नहीं किया। - Dainik Bhaskar
गनेड़ी से आई बीमार बालिका काे जांच के अभाव में भर्ती नहीं किया।

स्वास्थ्य विभाग के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती मौसमी बीमारी है। क्योंकि एक जनवरी से 13 अक्टूबर तक 209 डेंगू मरीज मिल चुके हैं। इनमें बुधवार को एसके अस्पताल में आए सात रोगी शामिल हैं। हालात कितने खतरनाक हो चुके हैं यह जानने के लिए इन आंकड़ों को पढ़ लीजिए।

एसके और जनाना हाॅस्पिटल में माैसमी बीमारियाें से पीड़ित 177 मरीज भर्ती हैं, जिनमें 36 बच्चे जनाना हाॅस्पिटल पीडियाएट्रिक वार्ड में हैं। जबकि एसके हाॅस्पिटल के मेल-फीमेल मेडिकल वार्डाें में 141 से ज्यादा मरीज है। एसके हाॅस्पिटल में सर्जिकल और पुराने एमसीडब्ल्यूडी भवन में बेड लगाकर अस्थाई व्यवस्था की है। इस डरावनी परिस्थिति में इलाज के इंतजाम समझने के लिए भास्कर के तीन रिपोर्टर मंगलवार रात 10 से रात एक बजे तक एसकेे, जनाना और नीमकाथाना के कपिल अस्पताल गए। इस दौरान चौंकाने वाली स्थिति मिली।

गनेड़ी : किराए की गाड़ी से एसके अस्पताल आई किशोरी ...और मेडिकल वार्ड में मरीज को स्टाफ ने संभाला नहीं

पहला उदाहरण - गनेड़ी के लक्ष्मण का है। वे 15 साल की बुखार पीड़ित बेटी काे किराए की गाड़ी से एसके अस्पताल लाए। भर्ती करने के बजाय स्टाफ ने कहा - सुबह दोबारा लाकर पहले जांच कराअाे। जबकि लक्ष्मण ने स्टाफ को बताया कि श्रमिक हाेने के बावजूद जान बचाने के लिए वह डेढ़ हजार में गाड़ी किराए करके आया है। दूसरा उदाहरण मेल मेडिकल वार्ड का है। इस वार्ड में बुखार पीड़ित 16 साल का लड़का फर्श पर गिर जाता है। उसकी मां का आराेप था कि स्टाफ काे कहने के बावजूद संभालने नहीं आया। भास्कर रिपोर्टर ने अव्यवस्था की फाेटाे लेनी चाही तो स्टाफ ने बालक के परिजनाें से कहा-इन्ही से करवा लाे इलाज।

जनाना अस्पताल : 28 बेड पर 36 बच्चे भर्ती, जिनके लिए सिर्फ एक नर्सिंगकर्मी...चार साल के लवीन को 25 मिनट इंतजार कराया

फागलवा के बुखार पीड़ित चार साल के लवीन काे लेकर मां जनाना हाॅस्पिटल पहुंची। ओपीडी में पर्ची कटवाने के बाद पीडियाएट्रिक ओपीडी पहुंची, जहां डॉक्टर नहीं मिला। स्टाफ ने जानकारी दी सीजेरियन डिलीवरी चल रही है। इसलिए डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में हैं। इसके बाद लवीन का इलाज शुरू होने में 25 मिनट लगे। पीडियाएट्रिक वार्ड में 28 बेड के मुकाबले 36 बच्चाें का इलाज चल रहा था। इनके एक नर्सिंगकर्मी की ड्यूटी थी। मरीजाें से वार्ड फुल मिले। राेगियाें के साथ आए परिजन जगह-जगह चद्दर बिछाकर सो रहे थे, जिससे पाेर्च भी फुल हाे चुका था।

कपिल अस्पताल नीमकाथाना :

रात को दो नर्सिंगकर्मी मिले, एक साथ 23 मरीज आने से बैचों पर भर्ती किए मरीज :

कपिल अस्पताल में वायरल व डेंगू संदिग्ध मरीजों की संख्या अधिक हाेने पर वार्डों में बेड नहीं मिले ताे राेगियाें काे बेंचों पर ही भर्ती किया। वार्ड में करीब 23 ऐसे मरीज मिले, जिनकी प्लेटलेट्स तेजी से गिर रही थी। वार्डों में रात को एक पुरुष व एक महिला नर्सिंगकर्मी ड्यूटी पर थे। वार्ड में अमित यादव के प्लेटलेट्स 22 हजार आने पर स्थिति बिगड़ने लगी ताे रैफर किया। चार वार्डों में 23 मरीजों के 50 हजार से कम प्लेटलेट्स आ रही थी।

एसके अस्पताल : फॉल सिलिंग की मरम्मत नहीं कराने से बंद पड़ा वार्ड जबकि ज्यादातर वार्ड फुल होने से जगह कम पड़ी

इस वक्त अस्पताल में मौसमी बीमारियों के 177 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं, जिससे अस्पताल के लगभग वार्ड फुल हैं। इस बीच अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। दरअसल आए दिन नए कमरे या बरामदों में बेड लगाकर मरीज भर्ती कर रहे हैं। जबकि डेढ़ महीने पहले एक वार्ड में फाॅल सिलिंग टूट गई थी। तब से वार्ड बंद है। जबकि मरम्मत करवाते ताे अतिरिक्त वार्ड का प्रबंध हो जाता है। इसके अलावा भी ऐसे कई वार्ड हैं। 300 बेड के एसके अस्पताल के सुरक्षा की जिम्मेदारी रात काे केवल दाे गार्डाें के भराेसे है।

स्टाफ को बार-बार नहीं आना पड़े इसलिए रात को हटा देते हैं ड्रिप :

अस्पताल के ज्यादातर वार्डाें में भर्ती मरीजाें की ड्रिप हटाई हुई मिली। मरीजाें के परिजनाें ने बताया कि ड्रिप चढ़ी रहेगी ताे स्टाफ काे इसे चेक करने के िलिए बार-बार आना पडे़गा। इसका ताेड़ निकालने के लिए ज्यादातर मरीजाें की ड्रिप हटा दी जाती है।

माैसमी बीमारियाें काे लेकर बुधवार काे ही मीटिंग की है। स्टाफ काे पाबंद किया है। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई होगी। अगर रात काे वार्डाें से स्टाफ गायब रहता है ताे जानकारी ली जाएगी। डाॅक्टराें काे रात काे इमरजेंसी में माैजूद रहने की हिदायत दी है। जांच किट की कमी नहीं है।
-डाॅ. महेंद्र खीचड़, अधीक्षक, एसके अस्पताल

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