राजस्थान के शेखावाटी में नई मिसाल:डॉक्टर बनकर टिप्स देते गए, गांव से अब तक 103 डॉक्टर

सीकरएक महीने पहलेलेखक: सुरेंद्र मावलिया
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डाॅ. पुष्कर धायल - Dainik Bhaskar
डाॅ. पुष्कर धायल

राजस्थान के शेखावाटी इलाके के गांव ज्यादातर फौजी परिवारों के लिए ख्यात हैं। यहां के ज्यादातर गांवों के परिवारों में पीढ़ियों से फौज में जाने की परंपरा चल रही है। मगर यहां एक गांव ऐसा भी है जिसने सीमा की रक्षा के बजाय सेवा का दूसरा रास्ता चुना है। खास बात ये है कि इस विधा में भी शेखावाटी ने रिकॉर्ड ही बनाया है। सीकर के कोटड़ी धायलान गांव में 1078 परिवार हैं और यहां से अब तक 103 डॉक्टर निकल चुके हैं। ये सभी डॉक्टर्स दिल्ली, मुंबई और जयपुर समेत देश के विभिन्न शहरों में सेवाएं दे रहे हैं।

हालांकि ये सभी एक साथ गांव में मौजूद हों तो यहां आबादी के अनुपात के हिसाब से हर 1000 की आबादी पर 48.5 डॉक्टर होंगे। जबकि राष्ट्रीय अनुपात हर 1000 की आबादी पर 1.34 डॉक्टरों का है। यहां से निकले डॉक्टरों में 11 ऐसे हैं, जिन्हाेंने अलग-अलग विषयाें में विशेषज्ञता हासिल कर रखी है। इस रिकॉर्ड सफलता की भी एक खास वजह है। गांव से निकले डॉक्टर अब यहां स्कूलों में बच्चों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा के बारे में टिप्स देते हैं।

1968 में पुष्कर धायल गांव के पहले डाॅक्टर बने और इसके बाद डाॅक्टर बनने का कारवां आज तक बरकरार है। गांव के बच्चों को डॉक्टर बनने टिप्स देने का काम भी ग्रामीणों ने डॉ. पुष्कर धायल के साथ दो और वरिष्ठ डॉक्टरों को सौंप रखा है। डाॅ. पुष्कर धायल, डाॅ. हरदेवसिंह धायल और डाॅ. हरफूलसिंह धायल गांव के स्कूलाें में स्टूडेंट्स काे डाॅक्टरी चुनने के रास्ते बता रहे हैं। तीनाें डाॅक्टर समय-समय पर गांव के स्कूलाें में स्टूडेंट्स का मार्गदर्शन करते हैं। नीट क्लीयर करने के टिप्स देते हैं। गांव के 5 बच्चों ने इस साल भी नीट क्लीयर किया है।

गांव के बारे में लोगों की धारणा तोड़ने की जिद थी
गांव के पहले डाॅ. पुष्कर धायल ने बताया कि 1970 के आसपास लाेगाें की धारणा थी कि गांव का छाेरा डाॅक्टर नहीं बन सकता। 1968 में मैंने ये धारणा तोड़ी। एमबीबीएस करने के बाद मैं ट्रेनिंग पर चला गया। पढ़ाई पूरी कर गांव आया, ताे उस समय लोग मुझसे मिलने घर आते थे। मैंने भी स्टूडेंट्स से डाॅक्टर बनने के अनुभव साझा किए। मेरी सफलता के बाद गांव के लोगों को समझ आ गया कि नामुमकिन कुछ नहीं है।