ये हैं सुपरहीरो / 102 दिन से लगातार कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं, छह घंटे से ज्यादा पीपीई किट पहन रहे, परिवार से भी दूरी

ये हैं कोरोना वॉर रूम की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. विशाल सिंह और उनकी पत्नी। ये हैं कोरोना वॉर रूम की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. विशाल सिंह और उनकी पत्नी।
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ये हैं कोरोना वॉर रूम की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. विशाल सिंह और उनकी पत्नी।ये हैं कोरोना वॉर रूम की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. विशाल सिंह और उनकी पत्नी।

  • कोरोना को हराने में अहम भूमिका निभा रहे तीन डॉक्टर्स की पत्नियां बता रही हैं उनके संघर्ष की कहानी

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

सीकर. कोरोना के मामले तेजी से फैल रहे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा उम्मीदें हमें डॉक्टर्स से हैं, क्योंकि वो दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और लोगों की जान बचा रहे हैं। आज डॉक्टर्स-डे के दिन हम आपको उन फाइटर्स की कहानी बता रहे हैं जो सुपर हीरोज की तरह देश की रक्षा कर रहे हैं। इन फाइटर्स को दैनिक भास्कर का सलाम। महीनों अपने परिवार से दूर रहना, घंटों पसीने में नहाए रहना, दम घोंटू पीपीई किट में ड्यूटी करना, मरीज का इलाज करना, खुद को इंफेक्शन से बचाना और कोरोना के खतरे से जीतने के इरादे से लड़ना, ये देश के कोरोना वॉर्ड में लड़ रहे हर डॉक्टर की कहानी है। कई डॉक्टर 102 दिन से घर नहीं गए। मार्च के महीने से वो लगातार कोरोना वॉर्ड में ड्यूटी कर रहे हैं।

ये कोरोना योद्धा 6 से 8 घंटे पीपीई में रहते हैं। इस दौरान वे न तो पानी पी सकते हैं और न ही बाथरूम जा सकते हैं। ये कितना मुश्किल है और इनका योगदान कितना महत्वपूर्ण है। कोरोना की लड़ाई की रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे तीन डॉक्टर्स की पत्नियों से सुनिए इन सुपरहीरो की सुपर कहानी। 

अब तो नींद में बोलने लगे हैं-कितने क्लॉज कॉन्टेक्ट वाले हैं, सबके सैंपल ले लो : सुनीता सिंह

ये हैं कोरोना वॉर रूम की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. विशाल सिंह। उनकी पत्नी डॉ. सुनीता सिंह साइंस कॉलेज में सहायक आचार्य हैं। वे बताती हैं-तीन महीने से घर में सिर्फ एक ही आवाज सुनाई देती है, वो है-कोरोना। अब ताे हालात ये हो चुके हैं कि विशाल रात को नींद में भी कोरोना के बारे में ही बोलते रहते हैं। कहते हैं-हैल्लो डॉक्टर साहब जितने क्लॉज कॉन्टेक्ट वाले हैं, आज उनके सैंपल करवा लो। दो दिन में जितने सैंपल करवा लेंगे, उतने ही फायदे में रहेंगे। भाई की शादी थी, लेकिन वे तो शादी के दिन भी ऑफिस चले गए। मैंने याद दिलाया तो कहने लगे कि एक बार वॉर रूम जाकर आता हूं। शादी में गए, लेकिन सबके लास्ट में। कुछ बुरा लगता है, लेकिन मुझे पता है कि उनकी जरूरत अभी सीकर के लोगों को सबसे ज्यादा है। वे जन स्वास्थ्य में विशेषज्ञ हैं, इसलिए कोरोना को रोकने में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए तो उन्हें डिप्टी सीएमएचओ की जगह दी गई है। विशाल कहते हैं-कोरोना सबके लिए नया था। मुझे याद नहीं कि आखिरी बार कब मैं पूरी रात सोया। 

घर का काम बताती हूं तो कहते हैं-जरूरी काम खुद ही निपटा लो : संगीता पारीक

खंडेला ब्लॉक बीसीएमओ डॉ. नरेश पारीक ब्लॉक में बेहतर प्लानिंग कर कोरोना संक्रमण पर हद तक काबू पाने में सफल रहे। कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण वो परिवार से अलग रहने को भी मजबूर हैं। फोन पर ही बात कर पाते हैं। बूढ़े मां और पिता से भी नहीं मिल पा रहे पर उन्हें यह खुशी है कि वो लोगों के काम आ रहे हैं और खंडेला को इस संक्रमण से लड़ने में अपना योगदान दे रहे हैं। उनकी पत्नी संगीता पारीक बताती हैं-कोरोना की लड़ाई में घर के कामकाज भी भूल चुके हैं। कुछ काम बताती हूं तो कहते हैं-जो जरूरी काम है वो खुद ही निपटा लो। संगीता ने बताया कि जब किसी काम के लिए दबाव डालते हैं तो बोलते हैं कि टीम को सैंपल के लिए समझाना पड़ता है। फिर गांव में संदिग्धों के सैंपल लेने में भी मशक्कत करनी पड़ती है। वेे कहती हैं-प्रवासी आने शुरू हुए तो और केस बढ़ने लगे, तब काफी चिंता होने लगी थी, लेकिन अब खुशी है कि बेहतर प्लानिंग कर केस बढ़ने से रोक दिए हैं।

हमेशा डर लगा रहता है- पता नहीं कब उनके साथ वायरस घर पहुंच जाए : पूनम भार्गव

एसके हॉस्पिटल में कोविड-19 के नोडल ऑफिसर डॉ. दर्शन भार्गव पॉजिटिव और संदिग्धों मरीजों के इलाज से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं। उनकी पत्नी पूनम भार्गव ने बताया कि हम खुद तीन माह से खौफ में हैं। क्योंकि-शक रहता है कि डॉक्टर साहब मरीजों के बीच रहते हैं। कब चपेट में आ जाए। इसलिए हॉस्पिटल से पहुंचने के बाद उन्होंने खुद ही परिवार से अलग रहने के बंदोबस्त कर रखे हैं। साहब के पास कब फोन आ जाए, इसका फिक्स टाइम नहीं है। रात तीन बजे भी मोबाइल बज जाता है। फोन पर वे बोलते रहते हैं कि मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कर दो। उसे डिस्चार्ज कर दो। जयपुर भेजना पड़े तो भिजवा दो। हम बार-बार फोन बजने पर सवाल करते हैं तो बोलते हैं कि हॉस्पिटल से साहब का फोन आया है। मरीज को दिक्कत थी। इसलिए संभालना तो पड़ेगा ही। पूनम ने बताया कि जब से कोरोना शुरू हुआ, किसी काम के लिए बोलते हैं तो कहते हैं कि आप ही संभालो यह काम। मुझे पता नहीं कितना समय लग जाए।

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