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पानीपथ की लड़ाई:रोज 2 किमी जाना पड़ता है पानी के लिए नतीजा-गांव में कोई बेटी नहीं देना चाहता

सीकरएक महीने पहले
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टोडा के सांवलपुरा तंवरान गांव में खेत में बने ट्यूबवैल में पानी के लिए लगी लोगों की भीड़। - Dainik Bhaskar
टोडा के सांवलपुरा तंवरान गांव में खेत में बने ट्यूबवैल में पानी के लिए लगी लोगों की भीड़।
  • सांवलपुरा तंवरान गांव में 700 फीट नीचे भी नहीं मिल रहा पेयजल
  • चार किसान खेती छोड़ 5 साल से एक हजार परिवारों को पिला रहे हैं पानी

सांवलपुरा तंवरान की ये तस्वीर जिले में पेयजल किल्लत की भयावहता बताने के लिए काफी है। यहां महिलाएं घर का कामकाज छोड़ कई किमी दूर जाकर सुबह पांच बजे से पानी के लिए कतार में खड़ी हो जाती हैं। एक हजार परिवार वाले इस गांव में पांच साल से लोग पानी को तरस रहे हैं। पानी की किल्लत के कारण दूसरे इलाके के लोग इस गांव में बेटी का रिश्ता करने को तैयार नहीं हैं।

एक मात्र सरकारी ट्यूबवैल से पर्याप्त पानी नहीं मिलता। गांव के प्रहलाद गुर्जर, पूरणमल जांगिड़, रामवतार कुमावत व थानाराम पटेल लोगों की प्यास बुझाने के लिए खेती छोड़ अपने ट्यूबवैल से ग्रामीणों को पानी पिला रहे हैं। बिजली का बिल भी भर रहे हैं। गांव व आसपास के इलाके में 30 हैंडपंप में सिर्फ दो-तीन ही चालू हैं।

मानसून में भी रहती है किल्लत

सांवलपुरा तंवरान सहित जिले किल्लत वाले 180 गांवों में बारिश के मौसम में भी पेयजल संकट रहता है। क्योंकि यहां ग्रांउड वाटर लेवल काफी नीचे है।

बर्तन ठेले पर रखकर घर तक लेकर जाते हैं पानी

8 साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक पानी भरने की व्यवस्था संभाल रहे हैं। आठ साल के हितेश ने बताया कि पानी से भरे बर्तन ठेले पर रखकर पहुंचाते हैं।

पानी की उम्मीद में 700 फीट गहराई तक खुदाई

रामचंद ने बताया कि सांवलपुरा तंवरान सहित आस-पास के गांवों में जल स्तर 700 फीट गहरा है। जलदाय विभाग में दो नए ट्यूबवैल खुदवाए, लेकिन पानी नहीं आया।

जिले में 180 गांवों में पानी की भारी किल्लत

नीमकाथाना, खंडेला, श्रीमाधोपुर, दांतारामगढ़ में सबसे ज्यादा खराब हालात हैं। यहां करीब 180 गांवों में पेयजल की भयंकर किल्लत है। जल स्तर 700 से एक हजार फीट गहराई तक पहुंच चुका है।

पाइप लाइन बिछाने का आधा बजट लैप्स हो गया

सांवलपुरा तंवरान में पेयजल व अन्य संसाधनों के लिए 83 लाख मंजूर हुए।, लेकिन अफसरों की लापरवाही से 42 लाख रुपए लैप्स हो गए। ऐसे में पेयजल समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

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