विभाग ट्रेनिंग पर सालाना खर्च करता है 150 करोड़:स्वास्थ्यकर्मी यह भी नहीं बता पाए कि कौनसी स्टेज पर नवजात को रैफर करना जरूरी

सीकर2 महीने पहलेलेखक: सुरेंद्र मावलिया
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सरकारी अस्पतालाें के स्वास्थ्य कर्मी नवजात की सेहत के लिए जरूरी जांच और उनके इलाज से जुड़ी अहम जानकारी से वाकिफ नहीं है। नवजात की सेहत से जुड़े सामान्य पांच सवालों की प्रतियोगिता में प्रदेश के 19 जिलों के स्वास्थ्यकर्मी फेल हो गए।

स्वास्थ्य कर्मी यह तक नहीं बता पाए कि स्तनपान नहीं करने पर नवजात को किस जांच की जरूरत है और किस स्टेज पर रैफर करने की जरूरत है। जबकि स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण पर सालाना 150 करोड़ रुपए खर्च करके 24 दिन ट्रेनिंग दी जाती है।

स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में क्विज प्रतियोगिता करवाई। इसमें 4622 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए। इनमें सीएचओ, पीएचएम, एलएचवी, एएनएम, पीएसएस, आशा सहयाेगिनी है। प्रतियाेगिता के लिए पांच सवाल थे। पहले सवाल में 4622 में से 2551 स्वास्थ्यकर्मी सही जबाव दे सके।

दूसरे सवाल का 512 स्वास्थ्यकर्मी ने सही जबाव दिया। तीसरे सवाल का महज महज 32 स्वास्थ्य कर्मी सही जबाव दे पाए। चाैथे सवाल का 905 और पांचवें सवाल का 3741 स्वास्थ्यकर्मी ने सही जबाव दिया।

जानिए किस सवाल का कितने स्वास्थ्यकर्मियाें ने सही जबाव दिया

Q 1. जन्म 3 फरवरी काे संस्थागत प्रसव से हुआ है ताे उसकी एचबीएनसी की चाैथी भेंट कब?

2551 स्वास्थ्य कर्मियों ने दिया सही जवाब। जिसका कुल प्रतिशत 55 है।

नाेट : सही जबाव देने में जयपुर का प्रदेश में 27वां नंबर। 56% ने सही जवाब दिया। सही जवाब : 23 से 25 फरवरी।

Q 2. नवजात का तापमान कितने डिग्री सेल्सियस से कम हाेने पर रैफर करना चाहिए?

512 स्वास्थ्य कर्मियों ने दिया सही जवाब। सही जवाब देने वाले प्रदेश के 11% है।

नाेट:- सीकर का प्रदेश में 31वां नंबर। 7% स्वास्थ्यकर्मी ही सही जबाव दे पाए। सही जवाब : 36.5 c/97.7

Q 3. दस दिन बच्चा जाे स्तनपान नहीं कर रहा है, इस हेतु जांच करेंगे?

32 स्वास्थ्य कर्मियों ने सही जवाब दिया। यह सिर्फ कुल 1 फीसदी रहा।

नाेट : स्वास्थ्य मंत्री का जिला दौसा 30वें नंबर पर रहा। किसी ने सही जबाव नहीं दिया।

सही जवाब : जीवाणु संबंधी जांच, स्तन से लगाव व स्थिति की जांच, बच्चे का नाक बंद है।

Q 4. एचबीएनसी विजिट में बच्चे की सांस की दर 65 प्रति मिनट है। इसे कैसे वर्गीकृत करेंगे?

905 स्वास्थ्य कर्मियों ने इसका सही जवाब दिया। जो 20 फीसदी रहा है।

नाेट:- जोधपुर का 11वां नंबर। 23% स्वास्थ्यकर्मियाें ने सही जबाव दिया। सही जवाब : तेज सांस दर।

Q 5. एचबीएनसी विजिट में एक नवजात का वजन 2 किलाेग्राम है, उसे क्या सलाह देंगे?

3741 स्वास्थ्य कर्मियों ने सही जवाब दिया। जो 81% रहा। इसमें अच्छा रिस्पोंस रहा

नाेट : प्रदेश में कोटा का 22वां नंबर। 79% स्वास्थ्यकर्मियाें ने सही जबाव दिया। सही जवाब : कंगारू मदर केयर।

19 जिलों के कर्मी नहीं बता सके बच्चा स्तनपान नहीं कर रहा तो क्या करें?

दस दिन का बच्चा स्तनपान नहीं कर रहा है तो काैनसी जांच कराई जाएगी। इसमें 19 जिलाें के स्वास्थ्यकर्मी फेल हाे गए। इन जिलाें में जैसलमेर, झालावाड़, बीकानेर, अजमेर, दाैसा, चित्ताैड़गढ़, सवाई माधाेपुर, नागाैर, धाैलपुर, राजसमंद, झुंझुनूं, बारां, जयपुर द्वितीय, प्रतापगढ़, काेटा, बूंदी, हनुमानगढ़, सिराेही और कराैली जिला है।

क्विज में भाग लेने वाले

आशा 1825 एएनएम 1170 पीएसएस 479 एलएचवी 120 पीएचएम 48 सीएचओ 839 अन्य 141

एक्सपर्ट : मां का दूध नहीं मिलने पर नवजात में रहता है पीलिया और कुपोषण बढ़ने का खतरा

शिशु राेग विशेषज्ञ डाॅ. एसएन बिजारणियां ने बताया कि मां के दूध में प्रचुर मात्रा में जिंक, कैल्शियम और विटामिन्स होते हैं। जिन बच्चों को मां का दूध नहीं पिलाया जाता है, उन्हें पीलिया का खतरा रहता है। कुपाेषित होने का खतरा बना रहता है। मां का दूध नहीं मिलता है ताे नवजात का मस्तिष्क भी विकसित नहीं हाेता।

माैसमी बीमारियाें का खतरा रहता है। ऐसी चीजों से बचने के लिए नवजात शिशु देखभाल कार्यक्रम शुरू किया है। स्वास्थ्यकर्मी द्वारा घरों में जाकर नवजातों की देखभाल की जाती है। शिशु के जन्म से 42 दिन तक स्वास्थ्य की निगरानी की जाती है। कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे बच्चों के पोषण के स्तर में सुधार, समुचित विकास और बाल्यावस्था में होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया, निमोनिया के कारण होने वाली माैताें से बचाव करना है। लेकिन स्वास्थ्य कर्मी नवजात की सेहत से जुड़े सामान्य सवालों का जवाब तक नहीं दे पा रहे हैं।

जन्म से 42 दिन के दौरान छह बार विजिट जरूरी

एचबीएनसी कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्यकर्मी शिशु के जन्म के बाद छह बार विजिट करते हैं। शिशु के जन्म के पहले दिन फिर तीसरे दिन, 7वें दिन, 14 दिन, 21 दिन, 28वें दिन और 42 दिन विजिट करनी हाेती हैं। स्तनपान की जानकारी ली जाती है। मां का दूध पर्याप्त ले रहा है या नहीं। सांस अाैर वजन पर निगरानी रखी जाती है।

सवालों के जवाब नहीं दे सके तो विशेष ट्रेनिंग होगी

चाइल्ड हेल्थ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. प्रदीप चौधरी का कहना है कि क्विज में हमने ऐसे सवाल रखे थे। जिनके जवाब कठिन थे। क्योंकि हम स्टाफ की कमजोरी पकड़ता चाहते थे। ताकि ट्रेनिंग में उन्हें अपडेट किया जा सके। एएनएम और सीएचओ ने जो जबाव दिए है। जिन सवालो के जबाव गलत दिए है। अब विशेष ट्रेनिंग प्लान बनेगा।

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