जिले में डीएपी संकट:80 प्रतिशत काउंटरों पर स्टाॅक खत्म दो दिन में सप्लाई नहीं आई तो रबी फसल बुआई पर संकट

सीकर2 महीने पहले
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क्रय विक्रय सहकारी समिति के काउंटर से डीएपी का बैग खरीदते हुए किसान - Dainik Bhaskar
क्रय विक्रय सहकारी समिति के काउंटर से डीएपी का बैग खरीदते हुए किसान

रबी की बुआई से पहले ही जिले में डीएपी संकट गहराने लगा है। सीकर जिले में रबी सीजन के दाैरान सहकारी एजेंसियाें के 100 काउंटराें में से महज 20 पर ही डीएपी का स्टाॅक है। शेष 80 प्रतिशत काउंटर खाली हैं। हालात ये हैं कि यदि दाे दिन में सप्लाई नहीं मिली ताे जिलेभर में डीएपी की कालाबाजारी की समस्या हाे सकती है। क्याेंकि माैसम खुलने के साथ ही किसानाें ने प्याज, सरसाें, चना एवं अन्य सब्जियाें की फसलाें की बुआई शुरू कर दी है। इससे लगातार डीएपी की मांग बढ़ती जा रही है।

सहकारी एजेंसियाें की रिपाेर्ट के अनुसार जिले में सभी 100 काउंटराें से एक लाख बैग डीएपी की डिमांड तय की थी। हालात ये है कि बुआई शुरू हाेने से पहले महज 20 काउंटराें पर 3000 डीएपी बैग का स्टाॅक है। दैनिक भास्कर टीम की जिलेभर से ग्राउंड रिपाेर्ट के अनुसार दांतारामगढ़ व नीमकाथाना क्रय विक्रय सहकारी समिति का स्टाॅक खत्म हाे चुका है। सीकर, श्रीमाधाेपुर व लक्ष्मणगढ़ क्रय विक्रय के काउंटराें पर गुरुवार देर शाम तक महज 300 से 350 बैग का स्टाॅक था।

पलसाना, खाटूश्यामजी, गाेठड़ा भूकरान, जेरठी, मंढ़ा-मदनी व अलाेदा सहित एक दर्जन ऐसे काउंटर हैं, जहां 100 से 110 बैग से ज्यादा स्टाॅक नहीं है। हालात ये है कि जहां डीएपी उपलब्ध है, वहां भी एक किसान काे एक ही बैग दिया जा रहा है। श्रीमाधाेपुर इलाके के किसान ने बताया कि मार्केट में कई निजी विक्रेता किल्लत के नाम पर बैग की कीमत 1200 के बजाय 1300 से 1400 रुपए वसूल रहे हैं।

कृषि विभाग की सलाह : डीएपी के बजाय एसएसपी का उपयाेग करें

कृषि विभाग ने किसानाें काे डीएपी के स्थान पर एसएसपी उपयाेग करने की सलाह दी है। कृषि उपनिदेशक अजीत सिंह के अनुसार डीएपी का उपयोग फसल में फास्फोरस व नत्रजन पोषक तत्व देने के लिए किया जाता है। किसान मार्केट में किल्लत काे देखते हुए डीएपी का दूसरा विकल्प एसएसपी उर्वरक अपनाएं, ताकि समय पर फसलाें में पाेषक तत्वाें का उपयाेग कर बुआई की जा सके।

विभाग की सलाह के अनुसार डीएपी बैग में 23 किलोग्राम फास्फोरस , 09 किलोग्राम नत्रजन एवं पोषक तत्व होते हैं, जबकि इसके स्थान पर फास्फाेरस व नत्रजन एवं अन्य पाेषक तत्वाें की पूर्ति के लिए एक बैग डीएपी के स्थान पर तीन बैग एसएसपी एवं एक बैग यूरिया का उपयाेग किया जा सकता है। इसमें डीएपी बैग से लागत भी कम आएगी।

दाे माह पहले ही भिजवाई जा चुकी थी डीएपी की डिमांड :

सहकारिता विभाग के जरिए जिलेभर में सभी काउंटराें से रबी सीजन में डीएपी की डिमांड तैयार कर राजफैड एवं इफ्काे काे भिजवाई जा चुकी थी। इसके बावजूद समितियाें काे समय पर डीएपी उलब्ध नहीं हुआ। समितियाें के प्रतिनिधियाें के अनुसार सीजन में अब तक महज 10 प्रतिशत समितियाें काे एक बार डीएपी की सप्लाई हुई है। वह भी डिमांड की 15 से 20 प्रतिशत ही है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल खरीफ सीजन में भी लॉकडाउन में एडवांस स्टाॅक नहीं हाेने की वजह से किसानाें काे डीएपी, बीज समेत कई तरह के कृषि आदान की किल्लत काे लेकर परेशान हाेना पड़ा था।

कलेक्टर ने दूसरे जिले के किसानों को डीएपी बेचने पर लगाई रोक :

सहकारी समिति काउंटराें पर डीएपी की किल्लत काे देखते हुए कलेक्टर ने कृषि, सहकारिता, पुलिस प्रशासन एवं क्रय विक्रय सहकारी संस्थाओं पर दूसरे जिले के किसानाें काे डीएपी बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में एक किसान काे आधार कार्ड दिखाने पर एक ही डीएपी बैग बेचने की हिदायत दी गई है। वहीं पुलिस प्रशासन काे कालाबाजारी पर निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

अभी तक दो से पांच प्रतिशत भी बुआई नहीं हुई :

कृषि विभाग के बुआई कार्यक्रम के अनुसार जिले में इस बार देरी तक मानसून की वजह से बुआई की रफ्तार भी कमजाेर है। ऐसे में 10 अक्टूबर तक महज दो से पांच प्रतिशत तक ही बुआई हुई है। शेष 95 से 97 प्रतिशत बुआई अभी हाेना बाकी है। बुआई कैलेंडर के अनुसार 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक सरसाें-चना, तारामीरा व 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक जाै, गैहूं आदि फसलाें की बुआई का समय माना जाता है।

रजिस्ट्रार ने कहा-जिले में डीएपी की किल्लत है

मामले में सहकारी समिति सीकर के रजिस्ट्रार भैंरूसिंह पालावत का कहना है कि ये सही है जिले में डीएपी की किल्लत है। सहकारी समितियाें की डिमांड उच्चस्तर पर भिजवाई जा चुकी है। हालात काे देखते हुए बिक्री नियंत्रित कर किसानाें काे आवश्यकतानुसार वितरण करवाया जा रहा है। सप्लाई मिलते ही एक दाे दिन में समस्या का समाधान हाे जाएगा।

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