दो मजदूरों की मौत:टैक्स बचाने के लिए रात को हाे रहा था अवैध खनन, सुरक्षा उपाय भी नहीं थे, इसलिए हुआ ये हादसा

नीमकाथाना/पाटन7 महीने पहले
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रेला स्थित स्ट्रेलिंग स्टोन माइंस में शनिवार देर रात एक खदान में ब्लास्टिंग के लिए ड्रिलिंग करते वक्त पहाड़ का एक हिस्सा दरकने से आधा दर्जन मजदूर, मशीन व ट्रक दब गए। 200 फीट गहरी खदान से अब तक दो शव निकाले जा चुके हैं।

मृतक दलपतपुरा निवासी सुभाष गुर्जर के परिजनों को 21 लाख व बोरखेड़ा-भरतपुर निवासी रवि पुत्र ताराचंद के परिजनों को 8 लाख देने का आश्वासन दिया। अभी भी कई मजदूरों के दबे होने की आंशका है। जांच करने आए खान एवं सुरक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने खनन और परिवहन पर रोक लगा दी

हादसे के वक्त खदान में मजदूर ड्रिलिंग करने के साथ डंपर में पत्थर भरवा रहे थे। वो मलबे में दब गए। रेला की खदान 384/10 में पहाड़ दरकने के बाद खदान संचालक व ठेकेदार भाग गए। शनिवार रात एक मजदूर का शव निकाला जा सका।

रविवार दोपहर को एसडीएम बृजेश कुमार के निर्देश पर माइनिंग विभाग ने मलबा हटाने की कार्रवाई फिर शुरू करवाई। मजदूरों की मदद से एक ओर शव निकाला गया। मलबे में डंपर, कैंपर गाड़ी व मशीनें दबी हुई हैं। खदान संचालक यह नहीं बता सके कि मौके पर कितने मजदूर काम कर रहे थे। ऐसे में कई और मजदूरों के दबे होने की आशंका है।

पड़ताल }अधिकतर माइंस में रात काे अवैध खनन, हरियाणा-दिल्ली भेजते हैं माल

रात में खनन की सबसे बड़ी वजह है कि पत्थर को आसानी से माइनिंग जोन से निकाला जा सकता है। बिना रवन्ना व जांच के खदानों से पत्थर आसानी से दिल्ली व हरियाणा तक पहुंचाया जा सके। रात के समय अधिकारी जांच के लिए नहीं आते हैं। ब्लास्टिंग व ड्रिलिंग में परेशानी नहीं होती।

इसके लिए बाहरी मजदूरों को काम पर रखा जाता है। इलाके की अधिकतर खदानाें में रात काे अवैध खनन किया जा रहा है। रविवार रात भास्कर टीम ने एेसी कई माइंस देखी, जहां रात को खनन हो रहा था।

फिर भी अफसरों काे जांच में रात को नहीं मिला अवैध खनन : रैला माइनिंग जाेन में शनिवार रात के अंधेरे में अवैध खनन में दाे मजदूराें की माैत हाे गई। अफसरों का दावा है कि जांच के दौरान रात के समय कभी भी खनन किया जाना सामने नहीं आया।

इसके बावजूद एएमई रात में खनन को नकार रहे हैं। गंभीर यह है कि रैला की जिस माइंस में घटना हुई। उसमें रात के समय खनन की कोई अनुमति नहीं थी। गंभीर यह है कि रैला क्षेत्र में किसी भी खान मालिक ने माइनिंग एक्सपर्ट के बिना खनन कर रहे हैं। जबकि माइनिंग प्लान पेश करते वक्त इनकी सूचना खान एवं सुरक्षा विभाग अजमेर काे देनी हाेती है।

घटना के बाद दैनिक भास्कर ने पूरे मामले में पड़ताल की। सामने आया कि रैला गांव के लोगों की तमाम शिकायतों के बावजूद अवैध खनन पर कार्रवाई नहीं की गई। पहाड़ों में होल और बारूद भरकर खुले आम छोड़ जा रहा है। माइनिंग जोन में बिना रोक-टोक रात को खनन से लेकर परिवहन तक हो रहा है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

नियम : रात में खनन के लिए माइनिंग प्लान में ही लेनी होती है अनुमति
रात में खनन के लिए माइनिंग प्लान में अनुमति लेनी होती है, ताकि अधिकारी रोशनी व सुरक्षा जैसे नियम जोड़ सके। नीमकाथाना क्षेत्र में 128 माइंस में खनन हो रहा है। रेला में 21 खनन पट्टे है। 8 में खनन हो रहा है। एमई के मुताबिक नीमकाथाना में एक भी माइंस में रात को खनन की अनुमति नहीं ले रखी है।

स्पॉट का निरीक्षण किया जा रहा है। आगामी आदेशों तक रैला की सभी खान और खदान से निकासी बंद कर दिए हैं। माइंस में किसी तरह माइंस एक्सपर्ट नहीं होने भी सामने आया है। इस माइंस में रात के समय खनन की अनुमति नहीं थी। पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। रैला की अन्य माइंस की भी जांच की जा रही है।
-सुरजीत कटेवा, डिप्टी डायरेक्टर, खान एवं सुरक्षा विभाग

नीमकाथाना क्षेत्र में किसी भी माइंस की ओर से रात के समय खनन की अनुमति नहीं ली है। शिकायतों की जांच के दौरान रात में कहीं खनन नहीं पाया गया। खान सुरक्षा निदेशालय अजमेर के डिप्टी डायरेक्टर ने निरीक्षण किया है। सर्वे रिपोर्ट में हादसे की वजह व अवैज्ञानिक खनन की पूरी जानकारी सामने आएगी।
-अमीचंद दुहारिया, एएमई नीमकाथाना

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