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कोरोना इफेक्ट:15 दिन में ही चने के भाव 600 रुपए प्रति क्विंटल तक नीचे आए, जौ और सरसों में भी 200 रुपए तक की मंदी

सीकरएक महीने पहले
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  • कृषि जिंसाें के भावाें में मंदी की वजह से सीकर जिले के डेढ़ लाख किसानाें काे 10 कराेड़ रुपए से ज्यादा नुकसान

काेराेना काल में किसानों के सामने भी आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। 25 अप्रैल के बाद जैसे-जैसे काेराेना का संक्रमण बढ़ रहा है। मार्केट में आई मंदी किसानाें की उम्मीदाें पर भी पानी फेरने लगी है। बाजार में आई कृषि जिंसाें के भावाें में मंदी की वजह से महज 15 दिन में ही सीकर जिले के डेढ़ लाख किसानाें काे 10 कराेड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

काराेबारियाें के अनुसार सबसे ज्यादा 600 रुपए प्रतिक्विंटल तक गिरावट चने के दामाें में आई है। वहीं सरसाें व जाै का मार्केट भी 200 रुपए प्रतिक्विंटल तक कमजोर हो चुका है। हालात ये है कि सीकर जिले में करीब 5 लाख 41 हजार मीट्रिक टन रबी फसलाें की पैदावार मानी जा रही है। इसमें से अब तक 80 फीसदी मार्केट में पहुंच चुकी है। करीब एक लाख 41 हजार मीट्रिक टन फसल मार्केट में बिकनी है।

सीकर कृषि उपज मंडी खाद्य व्यापार संघ संरक्षक मंडल के महेश जैन लालास व अध्यक्ष नवरंग सिंह खीचड़ के अनुसार इनमें 3 कराेड़ 50 लाख से ज्यादा का नुकसान ताे सीकर कृषि उपज मंडी से जुड़े हुए किसानाें काे ही माना जा रहा है। सीकर मंडी में सीजन के दाैरान रबी का काराेबार छह लाख बाेरी के करीब रहता है। अब तक मंडी में काराेबार साढ़े चार लाख बाेरी तक ही पहुंचा है। ऐसी स्थिति में 20 से 25 प्रतिशत तक पैदावार मंडी में पहुंचने से पहली ही बाजार भावाें में भारी गिरावट आ चुकी है। यही स्थिति जिलेभर की श्रीमाधाेपुर, नीमकाथाना, दांतारामगढ़, फतेहपुर सहित अन्य मंडियाें की है।

अनाज के भावों में गिरावट से किसानों काे लगा झटका
सीकर कृषि उपज मंडी खाद्य व्यापार संघ के माल्ट एवं दलहन काराेबारी महेश जैन लालास के अनुसार सीकर मंडी की रिपाेर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा 600 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट चना के दामाें में आई है। सबसे ज्यादा नुकसान चना की फसल में ही किसानाें काे हो रहा है। सीकर कृषि मंडी में मई में औसत 40 हजार बाेरी चना की बिक्री हाेनी थी। भावाें में गिरावट से किसानाें काे सीधा दाे कराेड़ तक का नुकसान है। वहीं 40 हजार बाेरी जाै व 40 हजार बाेरी सरसाें की बिक्री पर किसानाें काे एक कराेड़ तथा 25 से 30 हजार बाेरी गेहूं की बिक्री पर किसानाें काे 30 लाख से ज्यादा काे नुकसान माना जा रहा है।

जिले में पहली बार हाेनी थी राजफैड की ओर से गेहूं की खरीद, लेकिन काेराेना ने राेक दी
छह साल में पहली बार सीकर जिले में राजफैड द्वारा गेहूं के लिए सीकर जिला मुख्यालय, श्रीमाधाेपुर, दांतारामगढ़ व पलसाना सहकारी समिति के काउंटर पर गेहूं खरीद केंद्र स्थापित करवाया था। सभी केंद्राें पर 100 से ज्यादा किसानाें द्वारा समर्थन मूल्य 1950 रुपए की दर पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण भी करवा दिया है। लेकिन काेराेना की वजह से खरीद की प्रक्रिया एक बार आगे नहीं बढ़ रही है।

काराेबारियाें के अनुसार यदि मार्केट पर काेराेना के संक्रमण का असर नहीं हाेता ताे दाे साल में पहली बार कृषि जिंसाें के बाजार भावाें में तेजी रहती। पिछले साल के मुकाबले जाै के दामाें में 700 रुपए क्विंटल तक, गेहूं में 50 रुपए क्विंटल, सरसाें में 1500 रुपए क्विंटल व चना के भावाें में 700 रुपए प्रतिक्विंटल तक की तेजी रही है। पिछले साल रबी सीजन में जाै के बाजार भाव 1300 रुपए, गेहूं 1750 रुपए, चना 4500 तक व सरसाें के दाम भी 5000 के करीब ही रहे थे।

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