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  • In 18 Months, Without Lease, 4.36 Lakh Tonnes Of Iron Ore Was Extracted And Sold From The Mountains, Which Cost More Than 1 Billion.

बेखौफ खनन माफिया:18 माह में लीज के बिना ही पहाड़ों से 4.36 लाख टन लौह अयस्क निकालकर बेच दिया, जिसकी कीमत 1 अरब से ज्यादा

सीकर13 दिन पहले
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लादीकाबास वन क्षेत्र में लौह अयस्क निकालने के लिए खोदी गई पहाड़ियां। ‌ - Dainik Bhaskar
लादीकाबास वन क्षेत्र में लौह अयस्क निकालने के लिए खोदी गई पहाड़ियां। ‌
  • कांग्रेस विधायक शेखावत की ओर से माइनिंग के अफसरों पर मासिक बंधी लेने के आरोपों के बाद भास्कर ने की अवैध खनन पर बड़ी पड़ताल

जमीन और पहाड़ों के दुश्मन खनन माफिया ने नीमकाथाना क्षेत्र में लौह अयस्क के भंडार पर डाका डाल दिया है। भास्कर पड़ताल में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि बिना लीज या अनुमति के खनन माफिया ने लादीकाबास-कालाखेड़ा की पहाड़ियों में 10-12 जगहों पर लौह अयस्क निकालने के लिए पिट (गहरे गड्‌ढ़े) बना रखे हैं। वन विभाग, खातेदारी व सरकारी भूमि से रोज औसतन 800 टन अयस्क निकालकर रातोंरात ट्रेलर व ट्रकों में भरकर बाहर बेच दिया।

मौके पर मिले अवैध खनन के पिट्स के आधार पर भास्कर ने खनन कारोबारियों, वन और माइंस अधिकारियों से मुआयना कराकर हकीकत जानी तो पता चला कि पहले लाॅकडाउन से अब तक 18 महीने में करीब 4.36 लाख टन लौह अयस्क निकालकर बेचा जा चुका है। इसे औसतन 2500 रुपए टन में बेचा गया।

इस तरह करीब एक अरब नाै कराेड़ रुपए का अयस्क माफिया ने बेच दिया। पहला लॉकडाउन लगते ही प्रशासनिक टीमें कोरोना प्रबंधन में जुट गई थी, जिसका फायदा माफिया ने उठाया। रात होते ही पहाड़ों में बने अवैध खनन के रास्ते रोशन हो जाते हैं। पत्थर निकालने के बाद जेसीबी मशीन से ट्रैक्टर-ट्राली में भरकर स्टॉक रातों-रात पाइंट तक पहुंचा दिया जाता है। इसमें कई बार ग्रामीण इसे लेकर विरोध जता चुके हैं।

कारगुजारी : किसी की नजर नहीं पड़े, इसलिए गांव की दूसरी साइड से निकालते हैं स्टॉक

तस्करों ने अपने नेटवर्क में स्थानीय को भी शामिल कर लिया है। तस्करों ने पहाड़ों से होकर दुर्गम रास्ते बना रखे हैं। अलग-अलग जगहों पर लाैह अयस्क निकालने के पिट तैयार बना लिए, जहां पहुंचना आसान नहीं है। पत्थर गांव की दूसरी साइड से होकर निकालते हैं ताकि किसी को पता नहीं चले।

बेखौफ : सरकारी भूमि से अवैध खनन करके सड़क किनारे भंडारण, तस्कर वहीं तय करते हैं रेट

फोरेस्ट, खातेदारी व सरकारी भूमि से लाैह अयस्क निकालकर कालाखेड़ा रोड पर जगह-जगह भंडारण किया जाता है। दिन में तस्कर रेट तय करते हैं। शाम को ट्रेलर व ट्रकों में भरकर कोटपूतली-पावटा व उदयपुरवाटी भेजते हैं। मुख्य रोड पर पहुंचने के बाद लाैह अयस्क की रवन्ना दे दी जाती है।

सवाल : जियोलॉजिस्ट रिपोर्ट नहीं, ई-रवन्ना का उल्लेख नहीं फिर भी इतना परिवहन किसके संरक्षण में

माइनिंग प्लान में खनन पट्‌टे के खनिज का पूरा घनत्व दर्शाया जाता है। जियोलॉजिस्ट इसकी रिपोर्ट करता है। खान से निकले माल व डिस्पेच का सालाना एसेसमेंट खनन विभाग को देना होता है। सवाल है कि लादीकाबास में लाैह अयस्क की खदान नहीं होने पर भी परिवहन कैसे संभव है।

इनकी लापरवाही से हो रहा अवैध खनन

  • रेवेन्यू विभाग : अधिकृत लीज स्वीकृत न होने की स्थिति में अवैध खनन के मामलों पर अन्य विभागों से समन्वय किया जाना था।
  • तर्क : नीमकाथाना तहसीलदार सत्यवीर का कहना है कि लादीकाबास क्षेत्र में लाैह अयस्क की कोई लीज स्वीकृत नहीं हैं। सिवायचक व वन भूमि से अवैध खनन हो रहा है। इन पर माइनिंग व वन अधिकारी ही कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
  • वन विभाग : खनन क्षेत्र के सहारे माफिया वन क्षेत्र में खनन बढ़ा लेते हैं। इन पर मॉनिटरिंग की जानी चाहिए थी।
  • डीएफओ भींमाराम चौधरी का कहना है कि लादीकाबास में लौह अयस्क के अवैध खनन का मामला वन भूमि में नहीं हैं। खुद मौका निरीक्षण किया है। सिवायचक भूमि में बने खनन पिट से खनन हो रहा है।
  • माइंस विभाग : बिना स्वीकृति से निकाले जा रहे लौह अयस्क के मामलों पर नियमित निगरानी रखकर कार्रवाई की जानी थी।
  • नीमकाथाना एएमई धर्मवीर मीणा का कहना है कि लाैह अयस्क के अवैध खनन के मामले में कार्रवाई की प्लानिंग कर रखी है। इसकी लीज स्वीकृत नहीं है। जियोलॉजिकल सर्वे करवाकर ऑक्शन कराने की योजना है।
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