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  • In Three Months, The Officers Could Not Even Get The Simple Work Done Like Registering The Names Of The Staff At The Health Centers, Stopping The Overloaded Vehicles.

सीएचसी और पीएचसी पर स्टाफ का अपडेट बाेर्ड नहीं:अफसर तीन माह में स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ का नाम लिखवाने, ओवरलोड वाहन रोकने जैसे साधारण काम भी नहीं करवा पाए

सीकर13 दिन पहले
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घोराणा स्कूल के पास नगर परिषद द्वारा डाला गया शहर का अपशिष्ट। - Dainik Bhaskar
घोराणा स्कूल के पास नगर परिषद द्वारा डाला गया शहर का अपशिष्ट।

जनता की समस्याओं काे लेकर सरकार एवं प्रशासन पूरी तरह से बेपरवाह नजर आ रहा है। क्याेंकि गंभीरता की हकीकत तीन माह पहले हुई सीकर जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में जनप्रतिनिधियाें के द्वारा उठाए गए आमजन की समस्याओं से जुड़े वे पांच प्रमुख मुद्दे साफ स्पष्ट कर रहे है, जिनका समाधान पैसा खर्च करने से नहीं प्रशासन काे आदेश व कारवाई से करना था।

मुद्दे ये थे कि ऑवरलाेड वाहनाें काे बंद कर परिवहन व्यवस्था काे सूचारू रखा जाए, पाॅलिथीन थैलियाें का उपयाेग बंद कर पर्यावरण व मवेशियाें काे बचाने के प्रयास हाे, ग्रामीण क्षेत्र के सभी स्वास्थय केंद्राें पर स्टाफ का नाम एवं माेबाइल नंबर अंकित कर जनसुविधा उपलब्ध करवाई जाए, सार्वजनिक चाैक में कचरा डालने पर पाबंदी लगाकर प्रदूषण की समस्या का समाधान हाे, सड़क के बीचाें बने गड्डे काे भरवाकर दुर्घटना राेकने के प्रयास हाे। उन ज्वलंत मुद्दाें काे लेकर साधारण सभा मेकं जनप्रतिनिधियाें की प्रशासन के साथ काफी बहस भी हुई। कलेक्टर एवं प्रशासन के अधिकारियों ने त्वरित कारवाई के लिए आश्वस्त भी किया।

हालांकि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। जबिक ये सब मुद्दे है सीधे ताैर पर पर्यावरण, जनजीवन एवं आमजन की समस्याओं से जुड़े हुए है। इन्हीं मुद्दाें काे लेकर दैनिक भास्कर ने जिले में ग्राउंड रिपाेर्ट कर हककीत जानी ताे स्थिति में काेई बदलाव नहीं पाया गया। 50 प्रतिशत ग्रामीण इलाके सीएचसी व पीएचसी ऐसे सामने आए है जिन के सामने स्टाफ की नेमप्लेट तक नहीं लगी है। वहीं प्रशासन ने पाेलिथीन खिलाफ भी कारवाई नहीं की, घाेराणा स्कूल के पास खुले स्थान पर नगर परिषद ने कचारा भी डालना बंद नहीं किया। ऑवरलाेड वाहनाें के खिलाफ कारवाई भी नहीं हुई।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं काे लेकर गंभीर नहीं प्रशासन
काेराेना काल के दाैरान साधारण सभा में उठाए गया सबसे प्रमुख एवं अहम मुद्दा ग्रामीण आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाएं माना जा रहा है। साधारण सभा में जिलेभर के सभी ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थय केंद्राें पर नियुक्त स्टाफ के नाम माेबाइल नंबर नहीं हाेने की स्थिति में लाेगाें काे इलाज के लिए इंधर-उधर भटकना पड़ रहा है। दूसरा कई बार हालात ये हाेते है कि ग्रामीण क्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ के इंतजार में लाेगाें काे नीजि स्तर पर उपचार करना पड़ रहा है।

मुद्‌दा - सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने ग्रामीण क्षेत्र के सभी स्वास्थय केंद्राें में नियुक्त चिकित्सक एवं अन्य स्टाफ के नाम एवं माेबाइल नंबर संबंधित संस्था के मुख्य गेट के पास बार्ड लगाकर चस्पा करने की मांग रखी।

मुद्‌दा - उप जिला प्रमुख ताराचंद धायल ने घाेराणा प्राथमिक विद्यालय, विद्युत विभाग कार्यालय व न्यायालय के क्षेत्र में नगर परिषद द्वारा कचरा डालकर प्रदूषित करने से राेकने का मामला उठाया था।मुद्‌दा : 22 वार्ड के कैलाश बाेपिया ने नीमकाथाना क्षेत्र की सभी लिंक सड़काें से क्षमता से दाेगुना भार 80-80 टन वजन लेकर वाहनाें का आवागमन बंद किया जाए।

प्रगति - कहीं भी ओवर लाेड वाहन नहीं राेके।

मुद्‌दा - 10 वार्ड से इंद्रा चाैधरी ने शहर में पाॅलिथीन थैलियाें के उपयाेग पर पाबंदी लगाने का मुद्दा रखा।

प्रगति - जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग द्वारा एक भी कारवाई नहीं की गई।

मुद्‌दा - उप जिला प्रमुख ताराचंद धायल ने दीनारपुरा से खिराेड़ सीमा तक सड़क मार्ग पर बने गहरे गड्ढ़े काे भरने की मांग उठाई थी।

प्रगति - फिलहाल सड़क पर एक भी गड्‌ढ़ा नहीं भरा गया है।

जिप की साधारण सभा की मीटिंग में सदस्याें ने शिवसिंहपुरा, भादवासी-धाभाई की ढाणी, फतेहपुर राेड, डाक बंगला से सबलपुरा तक सीसी सड़क का मामला भी प्रमुखता से उठाया था। कलेक्टर ने मामले काे संबंधित अधिकारियाें काे गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान के निर्देश दिए थे। हालांकि सड़काें की स्थिति भी यथावत बनी हुई है।

पाॅलिथीन थैलियों से बढ़ रहा प्रदूषण
पाॅलिथीन थैलियाें का उपयाेग बंद नहीं हाेने से प्रदूषण भी बढ़ रहा है। दुकानदार बेखाैफ पाॅलिथीन का करते हुए आमजन काे सामान बेच रहे है। जिसका सीधा असर यह है कि पर्यावरण एवं मवेशियाें का जीवन संकट में पड़ता जा रहा है। जबकि पाॅल्यूशन नियंत्रण एक्ट में प्लास्टिक थैलियाें के उपयाेग पर पूरी पाबंदी लगी है।

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