शिक्षा से खि‍लवाड़:कॉलेजों में 29 साल से नहीं हुई लाइब्रेरियन की भर्ती, नतीजा-एसके गर्ल्स कॉलेज में लाइब्रेरी बंद

सीकर2 महीने पहले
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एसके कॉलेज की लाइब्रेरी में बिखरी पड़ी किताबें। - Dainik Bhaskar
एसके कॉलेज की लाइब्रेरी में बिखरी पड़ी किताबें।
  • प्रदेश में 248 लाइब्रेरियन, असिस्टेंट लाइब्रेरियन व बुक लिफ्टर के 256 पद खाली

प्रदेशभर के सरकारी काॅलेजाें में 29 साल से लाइब्रेरियन, सहायक लाइब्रेरियन और बुक लिफ्टर की भर्ती नहीं हुई। ऐसे में प्रदेश के 338 कॉलेजों में पुस्तकालयाध्यक्ष के 274 में से 248 पद खाली है। नतीजा कॉलेजों में स्टूडेंट्स को बुक अलॉट करना तो दूर लाइब्रेरी में किताबें से धूल तक साफ नहीं हो रही है। जिले की 15 सरकारी कॉलेजों में 27750 स्टूडेंट अध्ययनरत है। वहीं प्रदेश में यह संख्या 4.58 लाख है।

इन स्टूडेंट्स काे समय पर बुक नहीं मिल पाती है। ऐसे में स्टूडेंट्स काे जरूरत पड़ने पर मार्केट से किताबें खरीदनी पड़ रही है। एसके काॅलेज सीकर, सम्राट पृथ्वीराज चाैहान राजकीय महाविद्यालय अजमेर सहित अन्य जिलाें की लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन सहित अन्य सहायक स्टाफ नहीं है।

राजकीय स्नातकाेत्तर महाविद्यालय, झालावाड़ की लाइब्रेरी में पूर्व राजपरिवार की ओर से दी गई पुस्तकें और पांडुलिपियां रखी है। इन ग्रंथ, पुस्तकें, पांडुलिपियां, शाेध ग्रंथ, दुर्लभ पुस्तकाें की शाेध करने वाले छात्र-छात्राओं व लेखकाें काे अक्सर जरूरत पड़ती है। लेकिन देखरेख के अभाव में ये सब बेकार हाे रही हैं।

छह साल से बंद है एसके काॅलेज की लाइब्रेरी, पुस्तकें नहीं मिलने से विद्यार्थी हो रहे परेशान

एसके काॅलेज काे 2016 में चार अलग-अलग काॅलेजाें में बांट दिया गया। इसके बावजूद एसके गर्ल्स काॅलेज से किताबें इन कॉलेजों में नहीं भेजी गई। यहां लाइब्रेरी छह साल से बंद पड़ी है। किताबाें पर धूल जमी है। नतीजा आर्ट्स काॅलेज कटराथल में महज तीन अलमारियाें में किताबे रखी हैं। जबकि यहां 6500 स्टूडेंट्स नियमित स्टडी कर रहे हैं। वहीं काॅमर्स काॅलेज में लाइब्रेरी सिर्फ दाे अलमारियाें में सिमट कर रह गई है। काॅमर्स काॅलेज की लाइब्रेरी का चार्ज दांतारामगढ़ कॉलेज के नोडल ऑफिसर को देख रहा है। इसके कारण लाइब्रेरी नहीं खुल रही है।

राज्य सरकार लाइब्रेरी का डिजलटलीकरण कर रही : उच्च शिक्षा विभाग लाइब्रेरी को डिजिटल किया जा रहा है। सरकार ने बजट में 40 सरकारी काॅलेजाें की लाइब्रेरी काे कंप्यूटराइज्ड करने की घोषणा की थी। अब तक 13 लाइब्रेरी को डिजिटल किया जा चुका है।

यूं खाली पड़े हैं पद : प्रदेश में लाइब्रेरियन के 274 में से 248, असिस्टेंट लाइब्रेरियन 22 में से 18 पद, बुक लिफ्टर के 333 में से सिर्फ 256 पद खाली है। प्रदेश की इन लाइब्रेरी में दुर्लभ पांडुलिपियां, शाेध ग्रंथ और पुरानी पुस्तके हैं। देखरेख के अभाव में ये काेई काम नहीं आ रही है। कई किताबों के दीमक लग रही है।

इन उदाहरणाें से समझिए अभ्यर्थी भर्ती की राह देखते हो गए ओवरएज

1. उदयपुर के डाॅ. दुष्यंत वर्मा ने 1999 में बी लिब व एम लिब किया था। उन्होंने 2012 में नेट व 2014 में पीएचडी की। लेकिन भर्ती नहीं होने से अब भी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। 1977 का जन्म होने के कारण अब ओवरएज हो चुके हैं। 2. उदयपुर निवासी डाॅ. आशा गलूंडिया ने 2009 में एम लिब किया। 2016 में पीएचडी की। सरकार की ओर से अभी तक लाइब्रेरियन की भर्ती नहीं होने से निजी स्कूल में जॉब कर रही हैं। 3. जाेधपुर निवासी डाॅ. निधि भार्गव ने 1997 में बी लिब 1997, 1998 में एम लिब व नेट 1998 किया। भर्ती के अभाव में सरकारी नौकरी का इंतजार है।

राज्य सरकार ने पुस्तकालयाध्यक्ष, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष व बुक लिफ्टर की आखिरी भर्ती 1992 में की थी। इसके चलते काॅलेजाें में लाइब्रेरी की हालत बेहद खराब है। विद्यार्थियाें काे समुचित पुस्तकें नहीं मिल पा रही है। वहीं स्टूडेंट्स काे स्टडी में काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
डाॅ. सुशील बिस्सू, महामंत्री रुक्टा, राष्ट्रीय

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