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अंतिम सफर के साथी:मदनलाल 35 कोरोना संक्रमित शवों को दे चुके हैं मुखाग्नि, क्योंकि सगे-संबंधी नजदीक आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए

सीकर19 दिन पहले
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  • मदनलाल बोले, पार्थिव शरीर को सम्मान मिले, इसलिए पीड़ित परिवारों की मदद में जुटे रहे

शिव धाम धर्माणा (श्मशान घाट) जन कल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट में काम करने वाले मदनलाल किसी के भाई, बेटे और पोते बनकर महज डेढ़ महीने में 35 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। वे कहते हैं कि पार्थिव देह को सम्मान मिले, इसलिए वे इन परिवारों की मदद के लिए जुटे रहते हैं।

वे शिव धाम धर्माणा ट्रस्ट में 17 साल से काम कर रहे हैं। पहली बार एक महीने में 80 से ज्यादा अंतिम संस्कार हुए। आमतौर यह संख्या 15 से 20 रहती है। मदनलाल ने बताया कि अप्रैल और मई में अब तक 105 अंतिम संस्कार हुए। इनमें से 60 शव कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के थे।

इनमें से 35 से ज्यादा शवों को उन्होंने खुद मुखाग्नि दी। क्योंकि कुछ परिवार के लोग दुख से इतना टूट जाते हैं कि क्रिया क्रम तक नहीं कर पाते। कुछ परिवार के लोग कोरोना संक्रमण के डर से शव के पास तक नहीं आए। एक ही समय में ज्यादा शव आने पर वे कई बार बेटों की भी मदद लेते हैं।

हालात : अस्पताल से पीपीई किट की बजाय सिर्फ चेहरा बांधकर भेज देते संक्रमित शव
शिव धाम धर्माणा ट्रस्ट संचालक कैलाश तिवाड़ी बताते हैं कि कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के शव आने पर शुरुआती दौर में कार्मिकों को प्रोटोकॉल के तहत किट दिए जाते थे। लेकिन, कोरोना की मौत का ग्राफ इस कदर बढा कि सबकुछ पीछे छूट गया। हालात यह हो गए कि कई बार अस्पताल से पीपीई किट की बजाय सिर्फ चेहरा बांधकर शव भेज दिया जाता। यहां कार्मिकों ने पूरी सावधानी से अंतिम संस्कार किए। यही वजह है कि अभी तक यहां काम करने वालों में एक भी संक्रमित नहीं हुआ।
रोजगार के लिए 17 साल पहले कटराथल से सीकर आए थे मदनलाल
मदनलाल 17 साल पहले परिवार सहित कटराथल गांव से रोजगार की तलाश में सीकर आए थे। शिव धाम धर्माणा ट्रस्ट संचालक कैलाश तिवाड़ी ने उन्हें रोजगार दिया। इसके साथ परिवार के लिए रहने की जगह भी दी। इसके बाद से मदनलाल धर्माणा मुक्तिधाम में अर्थियों पर लकड़ी जमाने, साफ सहित अन्य काम कर रह हैं।

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