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मंडे पॉजिटिव:सियाचिन ग्लेशियर की 15632 फीट की चढ़ाई करेंगे महेश नौ दिव्यांग पर्वतारोहियों की टीम में राजस्थान से इकलौते

सीकर21 दिन पहलेलेखक: जोगेंद्र सिंह गौड़
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सियाचिन ग्लेशियर की चढ़ाई की टीम में शामिल महेश नेहरा। - Dainik Bhaskar
सियाचिन ग्लेशियर की चढ़ाई की टीम में शामिल महेश नेहरा।
  • दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए सात सितंबर से शुरू होगा सियाचिन मिशन, जयपुर से शुरू की क्लाइबिंग

मोल्यासी गांव के दिव्यांग महेश नेहरा सियाचिन ग्लेशियर की 15632 फीट ऊंची चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में हैं। एनजीओ क्लॉ ग्लोबल की ओर से ये चैलेंज लिया है। दुनिया की सबसे ऊंची बर्फीली चोटी में शुमार सियाचिन को मापने के लिए नौ दिव्यांगों को शामिल किया गया है। इसके लिए नौ लोगों की टीम बनी हैं, जिसमें राजस्थान से इकलौते दिव्यांग पर्वतारोही महेश नेहरा हैं।

क्लाॅ ग्लोबल के मेजर अरुण प्रकाश अंबाथी ने बताया कि उनका एनजीओ दिव्यांगों को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे सशस्त्र बलों के दिग्गजों का एक समूह है। दिव्यांगों की ये स्पेशल टीम सात सितंबर को सियाचिन बेस कैंप से 15,632 फिट ऊंची इस चढ़ाई की शुरुआत करेगी। दिव्यांगों की टीम के साथ रिकाॅर्ड बनाने के लिए इतनी ऊंची चढ़ाई को चार चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। पहले दिन की चढ़ाई पूरी करने के रेस्ट के बाद अगले दिन की चढ़ाई तय की जाएगी। रिकाॅर्ड बनाने मकसद ये है कि लोग दिव्यांगों को किसी भी क्षेत्र में कम नहीं आंकें और इनमें भी अदम्य साहस भरा जा सके।

फैक्ट्री में काम करते वक्त मशीन की चपेट में आने से हाथ गंवाया, इसके बाद जयपुर में हिल क्लाइबिंग की शुरुआत की

घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से महेश 2002 में पूना में बाल्टी बनाने वाली कंपनी में काम करने गए। वहां काम के दौरान महेश का एक हाथ मशीन में आ जाने से गंवा दिया। इसके बाद महेश खेल से जुड़े और चीन में हुए एशियन गेम में 1500 मीटर में चौथा स्थान पाया। कुछ अलग करने के लिए महेश जयपुर में झालाना डूंगरी पर हिल क्लाइबिंग करने लगे।

इस दौरान क्लाॅ ग्लोबल से जुड़े भूपेंद्र ने महेश को कठिन अभ्यास करते देखा तो महेश के वीडियो बनाकर क्लाॅ ग्लोबल को भिजवाए। महेश नेहरा ने बताया कि उन्हें दिल्ली में ट्रेनिंग के लिए बुलाया। मेडिकल फिटनेस, स्टेमिना व पहाड़ी पर चढ़ाई के दौरान एक हाथ की मजबूत पकड़ को देखने के बाद टीम में चुन लिया। देशभर के 25 दिव्यांगों को बुलाया था। कड़ी प्रक्रिया के बाद नौ दिव्यांगों का चयन हो सका। इनमें महाराष्ट्र, उत्तराखंड, दिल्ली, लदाख, कर्नाटक, हरियाणा व कश्मीर के दिव्यांग हैं।

हौंसला देख महेश को बनाया ब्लाइंड का अटेंडेंट, अगला लक्ष्य एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना

एक हाथ वाले महेश का हौंसला देखकर उसे टीम में शामिल एक ब्लाइंड महिला साथी के अटेंडेंट की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। भारत सरकार की अनुमति मिलने के बाद रिकाॅर्ड बनाने जा रही दिव्यांग टीम के साथ सपोर्ट करने वाले कुछ आर्मी जवान और अफसर भी हैं। उन्हें 15 अगस्त के दिन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

ग्लोबल के मेजर अरुण प्रकाश अंबाथी के अनुसार क्लाॅ ग्लोबल की स्थापना जनवरी 2019 में मेजर विवेक जैकब ने की थी जो एक सेवानिवृत्त पैरा स्पेशल फोर्सेज के अधिकारी हैं। उनका उद्देश्य साहसी लोगों और विकलांग लोगों को जीवन कौशल सिखाना है। महेश का कहना है अभी वे नेछवा के सरकारी स्कूल में शारीरिक शिक्षक हैं। सियाचिन ग्लेशियर का रिकाॅर्ड बनने के बाद अगला टारगेट एवरेस्ट की पहाड़ी पर तिरंगा लहराना है।

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