काटनी है कोरोना की पतंग:मंगल टीका; किशाेराें काे टीके लगाने में हम प्रदेश में अव्वल, 18+ वालाें काे 100% लगी फर्स्ट डाेज

सीकर4 दिन पहले
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वैक्सीनेशन से ही हारेगा कोरोना, सीकर इस मामले में जागरूक - Dainik Bhaskar
वैक्सीनेशन से ही हारेगा कोरोना, सीकर इस मामले में जागरूक

जिले में 2.03 लाख किशाेराें काे लगनी है फर्स्ट डाेज, 10 दिन में 1.61 लाख काे टीका काेराेना संक्रमण से लाेगाें काे बचाने की मुहिम रंग ला रही है। वैक्सीनेशन में सीकर ने ऊंची छलांग लगाई है। वैक्सीनेशन में सीकर प्रदेश में आगे निकल गया है। 10 दिन में 15 से 18 एज ग्रुप के 79.48% किशाेराें काे फर्स्ट डाेज लगाकर जिला राज्य में नंबर है। टारगेट 203143 के मुकाबले 161463 किशाेराें काे टीके लगाए जा चुके हैं।

18 साल से ज्यादा उम्र वाले 100% लाेगाें काे फर्स्ट डाेज लग चुकी है। 2006679 टारगेट के मुकाबले 2011554 टीके लगाए जा चुके हैं। इसमें प्रदेश में पांचवें नंबर पर हैं। 100% वैक्सीनेशन की उपलब्धि तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग काे कई तरह के जतन करने पड़े। विभाग ने ड्यू डाेज वाले बुजुर्गाें काे फाेन कर प्रेरित किया। स्टाफ स्कूलाें में पहुंचा और बच्चाे के जरिए परिजन तक संदेश भिजवाया कि संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन ही कारगर हथियार है। आशा सहयाेगिनियाें काे घर-घर भेजकर वैक्सीन लगवाने का तकाजा किया।

लाेगाें ने खुद खर्चा वहन बुजुर्गाें काे टीकाकरण साइट तक पहुंचाने के इंतजाम किए। टीका लगाने के बाद उन्हें वापस घर तक पहुंचा। इसका नतीजा ये रहा है कि हम एक साल बाद जिले में सुरक्षा चक्र बनाने में कामयाब रहे।

नाॅलेज : 7 गुना इम्युनिटी बढ़ाती है फर्स्ट डाेज, 97% घटती है कोरोना से माैत की आशंका

नतीजा- तीसरी लहर में 1000 पाॅजिटिव मिले, राहत ये कि इन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं

काेविशील्ड/काे-वैक्सीन की एक डाेज काेराेना संक्रमण से लड़ने के लिए 7 गुना इम्युनिटी बढ़ा देती है। डोज लगने के बाद कोरोना से माैत की आशंका 97% घट जाती है। दाेनाें वैक्सीन ओमिक्राॅन जैसे वेरिएंट के खिलाफ भी कारगर हंै। यानी म्यूटेट हुए वायरस पर भी काेविशील्ड और काे-वैक्सीन 88% इम्युनिटी बूस्ट कर देती है। एक साल में हुए टीकाकरण का ही नतीजा रहा कि लहर-3 में हालात भयावह नहीं बन रही है। मरीजाें काे अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ रही है। जिले में लहर-3 में 1000 संक्रमित सामने आ चुके हैं। इनमें से एक भी मरीज काे भर्ती कर इलाज की जरूरत नहीं पड़ रही है। ऑक्सीजन की डिमांड भी नहीं है।

मिलिए उनसे, जिन्होंने जिले में वैक्सीन का सुरक्षा चक्र बनाने की प्रेरणा दी

रणजीत बुडानिया, मेल नर्स
16 जनवरी 2021 से वैक्सीनेशन शुरू हुआ। अभियान शुरू हाेने के बाद आरसीएचओ के पास मेल नर्स रणजीत बुडानिया की ड्यूटी तय की। रणजीत पर वैक्सीन की उपलब्धता, जरूरत वाली जगहाें पर साइट बनाना और साइट पर आने वाली दिक्कताें से निपटने का जिम्मा रहा। उन्होंने जिम्मेदारी काे बखूबी संभाला। जहां टीकाकरण साइट की जरूरत थी, वहां टीकाकरण शुरू कराया। लिहाजा 1 में जिला 100% फर्स्ट डाेज की उपलब्धि हासिल कर सका।

रामपालसिंह, ग्रामीण

खंडेला ब्लाॅक के कैरपुरा गांव के रामपालसिंह ने वैक्सीनेशन में अपनी ओर से पूरा सहयाेग दिया। बुजुर्गाें काे वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित किया। नजदीक की पीएचसी पर जब भी वैक्सीनेशन कैंप लगा, वे अपनी गाड़ी से बुजुर्गाें काे लेकर लेकर वहां पहुंचे। टीका लगवाया और वापस घर तक पहुंचाया। गाड़ी का डीजल खर्च भी खुद वहन किया। रामपालसिंह लगातार 7 माह से इस काम से जुड़े हैं। वे अब लाेगाें काे घर-घर पहुंचकर वैक्सीनेशन के फायदे गिना रहे हैं।

भावना शर्मा, आशा सहयोगिनी

सीकर शहर के माेहल्ला कारीगरान के अंंगनबाड़ी केंद्र की आशा सहयाेगिनी भावना शर्मा जिले में टीकाकरण का सुरक्षा चक्र बढ़ाने में आगे रहीं। वे घर-घर पहुंचीं और लाेगाें काे समझाया कि-जान है ताे जहान है। ड्यू लिस्ट में शामिल लाेगाें के घर गईं। वैक्सीन काे लेकर हैल्थ एक्सपर्ट के अखबाराें में छपे लेख पढ़वाए, ताकि लाेगाें काे वैक्सीन के फायदे मालूम हाे सकें। टीकाकरण के दिन महिलाओं से संपर्क कर साइट तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।

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