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बेटियों को सम्मान कब ?:मां की मौत, शराबी पिता-भाई सुध नहीं ले रहे, बेटी बोली-मामा के पास ही रहूंगी

सीकरएक महीने पहले
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  • मौसा मंगवाता था भीख इसलिए माैसी ने सीकर में भाई के पास भेजा दिया था

नवरात्र में एक ओर घर-घर देवी मां की पूजा हो रही है, वहीं दूसरी ओर एक बेटी अपने ही परिवार पर बोझ बन गई है। हरियाणा की इस बेटी के शराबी पिता और भाई इसे शुरुआत से ही दुत्कारते रहे। मां की मौत के बाद कोर्ट ने बेटी को पालन-पोषण के लिए मौसी की कस्टडी में दे दिया। यहां मौसा ने भी मासूम से भीख मंगवाना शुरू कर दिया। यहां एक बार फिर मां की ममता का दर्द सामने आया।

मौसी ने बेटी को अत्याचार से बचाने के लिए सीकर रहने वाले अपने भाई के पास छोड़ दिया। जबकि बेटी के पिता और भाई उसकी कोई सुध नहीं ले रहे हैं। बल्कि मौसा ने लड़की के मामा पर उसे जबरन सीकर रखने का आरोप लगाया है। बाल कल्याण समिति के सदस्य कमल शर्मा ने बताया कि 16 साल की बालिका काे कच्ची बस्ती से दस्तयाब किया गया है। काउंसलिंग में सामने आया है कि लुधियाना बाइपास करनाल-हरियाणा की रहने वाली में इसके पिता व भाई रहते हैं।

यह आठ साल की थी। तब इसकी मां की माैत हाे जाने के बाद काेर्ट ने बालिका काे लालन-पालन के लिए उसकी माैसी के हवाले कर दिया था। लेकिन, माैसी का पति इस बालिका से भीख मंगवाने लगा। लाॅक डाउन में माैसी बालिका काे सीकर में रहने वाले अपने भाई के पास छाेड़ गई। हरियाणा-लुधियाना में रहने वाली बहन की मौत पर भाई व उसका परिवार बैठक में पहुंचा। यहां माैसा ने अपने साले के साथ मारपीट की और पुलिस काे शिकायत दर्ज करवाई कि बालिका काे उसके मामा ने सीकर में बंधक बना रखा है।

हरियाणा से जांच सीकर पुलिस के पास पहुंची। उधाेग नगर थाना पुलिस बालिका काे खाेजते हुए कच्ची बस्ती तक पहुंच गई। पुलिस ने जब बालिका काे सीकर से दस्तयाब किया ताे मासूम बेटी ने कहा, साहब, माैसा मेरे साथ मारपीट करता है और भीख मंगवाता है। वह उसके पास नही जाएगी। वह मामा के पास रहना चाहती है। पुलिस ने बालिका को बाल कल्याण समित के सामने पेश कर परमार्थ बालिका में भिजवा दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
बालिका के होंगे 164 बयान : पुलिस बालिका के काेर्ट में 164 के बयान कराएगी। इसके बाद कार्रवाई काे आगे बढ़ाया जाएगा। बालिका यदि अपने मामा के पास रहना चाहती है ताे उसकाे यहीं रखा जाएगा। अन्यथा बाल कल्याण समिति बालिका काे अपनी कस्टडी में लेकर इसका पालन पाेषण करवाएगी।

देश में एक हजार बेटों पर महज 934 बेटियां जन्म ले रही हैं, फिर भी उनका सम्मान नहीं
देश में तमाम प्रयासों के बावजूद लिंगानुपात बराबर नहीं हो पा रहा है। आज भी देश में एक हजार बेटों पर महज 934 बेटियां हैं। यानी 66 बेटों को विवाह के लिए अब भी दुल्हन नहीं मिल रही है। जबकि बेटियां हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही है। महिलाएं पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर देश के विकास में योगदान दे रही है। इसके बावजूद बेटियों को अपमान और पीड़ा झेलनी पड़ रही है। बेटियों की इस दशा के लिए पुरुष प्रधान की यह गलत सोच जिम्मेदार है।

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