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  • National Co organization Minister Of ABVP, Aakant Said With Education Policy, Youth Will Become Job Seekers And Not Givers.

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एबीवीपी जयपुर प्रांत का 56वां अधिवेशन:एबीवीपी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री आकांत बोले- शिक्षा नीति से युवा नौकरी मांगने नहीं, देने वाले बनेंगे

सीकर2 महीने पहले
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  • वामपंथ पर भी किए कटाक्ष, 22 जिलों के 200 कार्यकर्ता शामिल हुए

आदर्श विद्या मंदिर में रविवार को एबीवीपी के जयपुर प्रांत का 56 वां अधिवेशन हुआ। अधिवेशन में संगठन पदाधिकारी, आरएसएस पदाधिकारी और भाजपा के नेता शामिल हुए। अधिवेशन में शिक्षा नीति, रोजगार और कृषि के मुद्दों को लेकर चर्चा हुई। अंतिम सत्र में दो प्रस्ताव पारित किए गए। एक प्रस्ताव राजस्थान की बदहाल दशा था, दूसरा वर्तमान में राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को लेकर था।

कार्यक्रम में एबीवीपी के राष्ट्रीय सह संघठन मंत्री प्रफुल्ल आकांत ने कहा 1924 में वामपंथ का उदय हुआ। लेकिन उन्होंने युवाओं को भटकाया। लोगो को भम्र में रखा। इसलिए वे अब छुटमुट बचे है। वामपंथ के बाद संघ (आरएसएस) का जन्म हुआ। संघ का दुनिया में डंका बज रहा है। लोग हमारे साथ खड़े हैं। हमें भी लोगो के साथ चलना पड़ेगा। देश को बदलना पड़ेगा। बहुत हो गया। आने वाला समय भारत का है।

अब भी हम शांति से बैठे तो हम जैसा कोई मूर्ख नहीं होगा। कार्यक्रम को आरएसएस के प्रांत प्रचारक शैलेंद्र सिंह ने संबोधित किया। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ रैवासा पीठाधीश्वर राघवाचार्य महाराज, रामेश्वर रणवा, परिषद के प्रांत अध्यक्ष हेमंत माहवार ने दीप प्रज्वलित कर किया। एबीवीपी के अधिवेशन में 22 जिलों के 200 कार्यकर्ता शामिल हुए।

अधिवेशन में सांसद सुमेधानंद, जिला प्रमुख गायत्री कंवर, प्रेमसिंह बाजौर, पूर्व विधायक रतन जलधारी, गोरधन वर्मा, एबीवीपी के प्रान्त उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश चौधरी, अर्जुन तिवाड़ी, मनोज धानिया, विजेंद्र बाटड़, नीतीश कुमार, त्रिभुवन सिंह, अतीश, तेजकरण कुलहरि, अमित सैनी सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

शिक्षा : 73 साल बाद ऐसी शिक्षा नीति, अब भारत उदय होगा
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एबीवीपी के राष्ट्रीय सह संघठन मंत्री प्रफुल्ल आकांत ने कहा कि पहले की सरकारों की खराब शिक्षा नीति से देश प्रगति नही कर सका। अब 73 साल बाद ऐसी शिक्षा नीति आई है कि भारत उदय होने वाला है। पश्चिमी शिक्षा के बजाय शोध पर ज्यादा फोकस रखा है।

नई शिक्षा नीति में हर भारतीय भाषों को सम्मान दिया गया है। मातृ भाषा में शिक्षा मिलेगी तो भारत का सांस्कृतिक सम्मान वापस लौटेगा। उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है। आने वाला समय भारत का है। दुनिया को शक्ति का अहसास कराओ।
रोजगार : गांवों तक उद्योग पनपेंगे, कोरोना जैसा पलायन नहीं होगा
आकांत ने कहा कि समय बदल गया है। अब भारत के युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे। क्योंकि जो नई शिक्षा नीति आई है। उसमें शोध को ज्यादा तवज्जो मिली है। शोध बढ़ेगा तो उद्योग पनपेगा। गांवो तक कारखाने खुलेंगे। युवा इस नीति का फायदा उठाए।

गांवों में कारखाने खुलेंगे तो उन्हें वहीं रोजगार मिलने लग जाएगा। उन्हें शहरों की तरफ नही जाना पड़ेगा। शहरों में क्राइम कम होगा। कोरोना काल में जो मजदूरों की दशा हुई, वो दोबारा देखने को नही मिलेगी। मजदूरों की यह यह दशा पूर्ववर्ती सरकारों की गलत नीतियों के चलते हुई।
कृषि : शुरुआती सरकारों की नीति सही होती तो किसान जान नहीं देते
आकांत ने अधिवेशन में संबोधित करते हुए कहा कि शुरुआती सरकारों ने किसान हित की नीतियां नही बनाई। इसलिए आज खेती की दुर्दशा है। नीतियां अगर सही बनती तो किसान आत्महत्या नहीं करता। अब जाकर किसानों की हित में नीतियां बनी है।

किसानों को छूट दी गई है कि वह देश में कही भी जाकर अपनी उपज बेच सकता है। किसानों को चाहिए कि वे नीतियों को समझे। आज देश में किसान नीति को लेकर भम्र फैलाया जा रहा है। इसके पीछे स्वार्थी लोग है। जो देश की प्रगति के लिए रोड़ा बने हुए हैं।

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