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पेड़ पर ऑनलाइन पढ़ाई, क्योंकि वहीं मिलता है नेटवर्क:गांवों में नेटवर्क नहीं; यानी जिले के 1.75 लाख स्टूडेंट्स की ऑनलाइन स्टडी इस बार भी अटकेगी

सीकरएक महीने पहले
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दांतारामगढ़ के कांटिया गांव में तो पेड़ पर चढ़ने के बाद भी बच्चों को नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं मिल पाती। - Dainik Bhaskar
दांतारामगढ़ के कांटिया गांव में तो पेड़ पर चढ़ने के बाद भी बच्चों को नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं मिल पाती।
  • विभाग का दावा-12वीं कक्षा तक 3 महीने ऑनलाइन स्टडी पर फोकस
  • परेशानी-जिले के कई गांवों में स्मार्ट फोन या इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं

प्रदेशभर में सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स के लिए 21 जून से ऑनलाइन स्टडी का सेशन शुरू होगा। शिक्षामंत्री गाेविंदसिंह डाेटासरा व माध्यमिक शिक्षा निदेशक साैरभ स्वामी कह चुके हैं कि तीन माह तक यानी सितंबर तक कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों को ऑनलाइन स्टडी कराई जाएगी। बड़ा सवाल यह है कि ऑनलाइन स्टडी कराएंगे कैसे? विभाग का दावा है कि वॉट्सएप ग्रुप बनाकर स्टूडेंट्स को जोड़ेंगे, जिसमें पाठ्यसामग्री अपलोड की जाएगी। हर स्कूल के शिक्षक घर-घर जाकर हाेमवर्क देंगे व जांच भी करेंगे। हकीकत यह है कि जिले के 1869 स्कूलों में पढ़ने वाले 2.32 लाख स्टूडेंट्स में से 1.75 लाख ग्रामीण इलाकों के हैं। जिले के 50 फीसदी स्टूडेंट्स के पास या तो स्मार्टफोन नहीं है या गांव में इंटरनेट की कनेक्टिविटी नहीं है।

सिर्फ सीकर ही नहीं, प्रदेशभर में यही हाल है। पिछले साल भी प्रदेशभर में 83 लाख स्टूडेंट्स में से 33 लाख ही ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़े थे। भास्कर ने ग्राउंड रिपोर्ट कर जाना कि इस साल ऑनलाइन स्टडी में कौनसी चुनौतियां सामने आएंगी।

ग्राउंड रिपोर्ट : कॉल करने के लिए भी जाना पड़ता है दूसरी मंजिल पर

जिले के 9 में से 7 ब्लाॅक में नेटवर्क की समस्या : दांतारामगढ़, नीमकाथाना व पाटन ब्लाॅक, अजीतगढ़ के पहाड़ी क्षेत्र, फतेहपुर, नेछवा, पिपराली ब्लाॅक के कई गांवाें में नेटवर्क की समस्या के चलते बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। दांतारामगढ़ के कांटिया गांव में तो पेड़ पर चढ़ने के बाद भी बच्चों को नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं मिल पाती।

नीमकाथाना के नृसिंहपुरी ग्राम पंचायत के राउप्रा विद्यालय, जाखड़ा के प्रधानाध्यापक सांवरमल सैनी ने बताया कि गांव में कॉल करने के लिए भी दूसरी मंजिल पर जाना पड़ता है। इंटरनेट का तो और भी बुरा हाल है। धाेद के उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक मदनलाल ने बताया कि स्कूल में इंटरनेट ताे बिलकुल भी नहीं अाता है। बच्चे ढाणियाें से डेढ़ से दाे किमी की दूरी से अाते हैं।

ज्यादातर के पास नहीं है स्मार्टफोन
राउप्रावि, हीरवास के प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश कालेर ने बताया कि स्कूल के 148 में से सिर्फ 20 बच्चाें के पास स्मार्टफाेन है। पाटन के राउप्रा विद्यालय घुरसली के प्रधानाध्यापक गाेकुलचंद ने बताया कि स्कूल में 134 का नामांकन है। चुनिंदा के पास ही स्मार्ट फोन है। इसी तरह फतेहपुर के श्रीमती बनारसी देवी उमावि बागड़ाेदा के 275 स्टूडेंट्स में से महज 70 स्टूडेंट्स के अभिभावकों के पास ही स्मार्ट फोन है। शहर के राजकीय उमा विद्यालय शिवसिंहपुरा स्कूल के 150 छात्र-छात्राओं के पास स्मार्टफाेन की सुविधा नहीं है।
घर-घर जाकर होमवर्क देना मुश्किल
भास्कर ने जब इस बारे में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बात की, तो उन्होंने दावा किया कि घर-घर जाकर बच्चों को हाेमवर्क दिया जाएगा और चैक किया जाएगा। लेकिन ये भी आसान नहीं है। ढाणियाें की दूरी ज्यादा हाेने व शिक्षकाें के अभाव में हर सप्ताह बच्चाें के घर जाना असंभव है। उदाहरण के तौर पर फतेहपुर के बनारसी देवी उमावि में 275 स्टूडेंट्स हैं। जबकि स्टाफ सिर्फ 17 का है। ऐसे में एेसे में शिक्षक एक बच्चे के पास तीन सप्ताह में भी एक बार नहीं पहुंच सकता है।
पिछले साल इसलिए फेल हुआ ऑनलाइन स्टडी का माॅडल

  • स्मार्टफाेन व नेटवर्क की समस्या के चलते आधे स्टूडेंट्स भी अाॅनलाइन स्टडी से नहीं जुड़ पाए।
  • 8वीं कक्षा तक के बच्चाें काे हाेमवर्क देने के लिए स्माइल-1 व स्माइल-2 कार्यक्रम शुरू किए गए थे। फाइल तैयार करनी थी, लेकिन इंटरनेट की प्रॉब्लम से ये प्रयास भी सफल नहीं हुए।
  • अक्टूबर 2020 तक भी अाधे से ज्यादा स्टूडेंट्स के पास किताबें नहीं पहुंच सकी थी।

इस बार भी शिक्षा विभाग के सामने ये 3 चुनौतियां

  • एक अध्यापक को सप्ताह में तीन दिन स्कूल व तीन दिन बच्चाें के घर जाना है। शिक्षकाें की कमी के कारण ऐसा संभव नहीं है।
  • शिक्षकों को स्टूडेंट्स के घर जाकर होमवर्क देना होगा। कोविड की तीसरी लहर को देखते हुए कई पेरेंट्स इसकी अनुमति नहीं देंगे।
  • वाॅट्सएप ग्रुप बना माॅड्यूल डाले जाएंगे व हाेमवर्क देंगे। इंटरनेट कनेक्टिविटी व स्मार्ट फोन न होने की समस्या सामने आएगी।

21 जून से ऑनलाइन मैटेरियल डालकर पढ़ाई शुरू की जाएगी। कुछ ब्लाॅकाें के गांवाें में नेटवर्क की समस्या है। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चाें के पास स्मार्ट फाेन नहीं हैं। हम हर उस स्कूल की समस्या के बारे में जानकारी जुटाएंगे और समाधान का प्रयास करेंगे।

-घनश्यामदत्त जाट, कार्यवाहक सीडीईओ, सीकर