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कोरोना का प्रभाव:जीणमाता मंदिर में नहीं गूंजी घंटिया मैया को जयपुर की पोशाक पहनाई

सीकर10 दिन पहले
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  • 181 दिन से बंद जीणमाता मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खाेल दिए गए

181 दिन से बंद जीणमाता मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खाेल दिए गए। मंदिर पुजारी परिवार ने मंदिर के पट खोलकर सुबह साढ़े सात बजे महाआरती की। इसके बाद मैया को जयपुर की पोशाक पहनाकर दिल्ली व कोलकाता के फूलों से शृंगार किया गया। सुबह आरती के बाद दोपहर 12 बजे तक करीब 60 भक्तों ने मां जीण के दर्शन किए। भक्तों ने मंदिर परिसर में बनाए गए गोले में ही खड़े होकर किसी वस्तु को बिना छुए दूर से ही माता के दरबार में धोक लगाई।

काेराेना संक्रमण के चलते मंदिर कि व्यवस्थाओं में बदलाव दिखाई दिया। मंदिर में घंटियों की गूंज सुनाई नहीं दी। साथ ही माला-प्रसाद चढ़ाने पर राके के कारण फूलों की जगह सेनेटाइजर की महक आती रही। मंदिर में हाथ में चरणामृत की जगह सेनेटाइजर की बोतल दिखाई दीं। पट खोलने के साथ ही मंदिर प्रबंधन ने गाइडलाइन की पालना कराते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन करने की व्यवस्था कराई। ये पहला मौका था जब श्रद्धालु को अपने साथ माला-प्रसाद को नहीं लाए। श्रद्धालु मास्क लगाकर पहुंचे जो मास्क लगाकर नहीं आए थे, उन्हें मंदिर के पदाधिकारियों एवं सेवादारों ने मास्क दिए।

मुरलीधर पुजारी ने बताया कि मंगलवार को जीण माता के पट श्रद्धालुओं के खोल दिए गए हैं। नरपत सिंह चौहान व बंशीधर पुजारी ने बताया कि भक्त 40 फीट की दूरी से माता के दर्शन करवाए जाएंगे। बजरंग लाल पुजारी ने बताया कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही मंदिर परिसर में प्रवेश मिलेगा। सुनील पुजारी ने बताया कि कोविड-19 से बचाव संबंधी जागरुकता के ऑडियो या वीडियो क्लिप का प्रसारण किया जा रहा है। पुजारी राकेश पाराशर ने बताया ट्रांसपेंरट शीट लगाई है।
इन बातों का रखें ध्यान
श्रद्धालु सार्वजनिक स्थलों पर आपस में छह फीट की दूरी बनाए रखें। चेहरे को मास्क या फेस कवर करना जरूरी है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले हाथों को कम से कम 40 से 60 सैकंड तक साबुन और पानी से धोएं। छींकते या खांसते समय मुंह को रूमाल, टीश्यू पेपर से ढंकें। थूकना मना है।

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