सीकर की बेटी ने नाम रोशन कर दिया:जिसके जन्म से परिवार दुखी था उसने किलिमंजारो पर्वत फतह किया, माइनस 30 डिग्री तापमान पर 19,341 फीट की चढ़ाई पूरी

सीकर7 दिन पहलेलेखक: सुरेंद्र माथुर

जिस बेटी के जन्म पर घरवाले इतने दुखी थे कि उन्हाेंने उस दिन खाना तक नहीं खाया, अब उसी बेटी ने अपने परिवार को खुश होने का मौका दिया है। राजस्थान के सीकर की बेटी रजनी चौधरी ने माइनस 30 डिग्री तापमान में ईस्ट अफ्रीका के किलिमंजारो पर्वत को फतह किया है। रजनी ने 19,341 फीट की चढ़ाई 66 घंटे में पूरी की है। रजनी सीकर जिले की 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की ब्रांड एम्बेसडर भी हैं।

बिना रुके 28 KM का सफर किया तय
खंडेला के प्रतापपुरा गांव की रहने वाली 26 साल की रजनी चौधरी जयपुर में निम्स यूनिवर्सिटी से एमटेक कर रहीं हैं। पर्वतारोहण में उनकी रुचि को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने ही बजट दिया था। रजनी माइनस 30 डिग्री तापमान में मंगलवार रात को किलिमंजारो पर्वत की चोटी पर पहुंच गई। उन्होंने 28 किलोमीटर का सफर बिना रुके तय किया।

मां-बाप की शादी के 11 साल बाद हुआ जन्म
रजनी ने बताया कि उनका जन्म माता-पिता की शादी के 11 साल बाद हुआ था। घर में सभी को बेटा होने की उम्मीद थी, ऐसे में जब बेटी हुई तो दुख के कारण एक दिन किसी ने खाना नहीं खाया। रजनी ने बताया कि जब वे 24 साल की हुईं तो पिता से फैशन डिजाइनर बनने की इच्छा जाहिर की, लेकिन दादी ने मना कर दिया था। इसके बाद उन्होंने जुंबा और योग की ट्रेनिंग ली थी। अब वे दूसरों को फिटनेस की ट्रेनिंग देती हैं।

रजनी ने 24 साल की होने पर पिता से फैशन डिजाइनर बनने की इच्छा जाहिर की, लेकिन दादी ने मना कर दिया था।
रजनी ने 24 साल की होने पर पिता से फैशन डिजाइनर बनने की इच्छा जाहिर की, लेकिन दादी ने मना कर दिया था।

पहले भी कई पर्वत कर चुकी हैं फतह
रजनी ने बताया कि 2019 में हिमाचल प्रदेश के मनाली में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स से 25 दिन का पर्वतारोहण प्रशिक्षण लिया था। इस दौरान 15,700 फीट की शीतिधिर शिखर की चढ़ाई की थी। बेस कैंप से ग्लेशियर तक जीरो डिग्री तापमान में बर्फ के बीच से गुजरते हुए लक्ष्य प्राप्त किया था। इस दौरान 1993 में भारत की सबसे कम उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पर्वतारोही डिकी डोलमा का मार्गदर्शन मिला।

नवंबर 2020 में उत्तरकाशी स्थित राष्ट्रीय पर्वतारोही संस्थान से एक महीने की ट्रेनिंग ली थी। रजनी ने बताया कि इसके बाद उन्हें किलिमंजारो और माउंट एवरेस्ट के पर्वतारोहण के लिए तकनीकी कौशल से रू-ब-रू करवाया गया था। रजनी के पिता रतन लाल चौधरी जयपुर गणगौरी हॉस्पिटल में नर्सिंग ऑफिसर और मां आंची देवी गृहणी हैं। एक छोटा भाई और बहन पढ़ाई कर रहे हैं।

रजनी चौधरी अपने पिता रतन लाल चौधरी, मां आंची देवी और भाई-बहन के साथ ।
रजनी चौधरी अपने पिता रतन लाल चौधरी, मां आंची देवी और भाई-बहन के साथ ।

जागरूकता अभियान चलाना चाहती हैं
रजनी सरकारी स्कूलों में लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देती हैं। अब वह भविष्य में पीरियड्स को लेकर फैले अंधविश्वास और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए शिविर लगाकर लोगों को जागरूक करेंगी।

पहाड़ी इलाकों में चलाती हैं सफाई अभियान
रजनी ने बताया कि वह कई बार अपने दोस्तों के साथ मिलकर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर समेत कई पहाड़ी इलाकों में सफाई अभियान चला चुकी हैं। वहां आने वाले पर्यटकों को भी सफाई करने के बारे में जागरूक करती हैं।

सहयोग- अंकेश, खंडेला