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  • Of The 593 Patients Admitted In Seven Days, 442 Did Not Undergo Screening; Lungs Worsen 90%, Then Arrived In Hospital

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जानलेवा साबित हो रही ये लापरवाही:सात दिन में भर्ती हुए 593 मरीजों में से 442 ने जांच नहीं कराई; फेफड़े 90% खराब हो गए, तब पहुंचे अस्पताल

सीकर10 दिन पहले
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सांवली कोविड अस्पताल में बेड फुल हो गए हैंं। ऐसे में सोमवार को एक गंभीर महिला को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ नीचे ही लेटा दिया गया। - Dainik Bhaskar
सांवली कोविड अस्पताल में बेड फुल हो गए हैंं। ऐसे में सोमवार को एक गंभीर महिला को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ नीचे ही लेटा दिया गया।
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कोरोना के हालात भयावह हो चुके हैं। महज 12 दिन (22 अप्रैल से 3 मई तक) में 7,590 पॉजिटिव मिल चुके हैं, 85 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। इसकी वजह है लोगों की लापरवाही। इसे सांवली कोविड अस्पताल के आंकड़ों से समझ सकते हैं। 26 अप्रैल से 2 मई तक सांवली अस्पताल में भर्ती हुए 593 मरीजों में से 442 ऐसे हैं, जो उस वक्त कोविड अस्पताल आए, जब उनकी तबीयत ज्यादा खराब हाे गई। इन्होंने कोविड का आरटी-पीसीआर टेस्ट भी नहीं कराया था। इन सभी का ये टेस्ट अस्पताल में ही हुआ, जिससे पहली बार पता चला कि वे पॉजिटिव हैं।

लोग कोरोना को बेहद हल्के में ले रहे हैं। लापरवाही का नतीजा यह होता है, जब तक उन्हें कोविड होने के बारे में पता चलता है, उस वक्त तक उनके फेफड़े 90 फीसदी तक खराब हो चुके होते हैं। 442 में 60 फीसदी ऐसे लोग थे, जिनके फेफड़े 70 से 90 प्रतिशत तक संक्रमित मिले। ऑक्सीजन सेचुरेशन भी 50 तक मिल रहा था। ऐसे मरीज रिकवर होने के बजाय हालत बिगड़ती गई। कई मरीज तो ऐसे थे, जिनके आरटी-पीसीआर के सैंपल भी मौत के बाद हो पाए। इसलिए अचानक अप्रैल में पॉजिटिव मरीजों की मौत का आंकड़ा बढ़ा।

कोरोना के लक्षण दिखते ही जांच कराएं, डॉक्टर की सलाह जरूर लें, ऐसा नहीं करने पर गंभीर हो सकती है स्थिति
कोरोना से संक्रमित होने पर ध्यान कैसे रखें?

अगर मामूली लक्षण हैं तो आप घर पर रह कर ही अपना ध्यान रख सकते हैं। खुद को कमरे में आइसोलेट कर लें। हल्का बुखार है या फिर बुखार थोड़ी थोड़ी देर में आ रहा है तो डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामॉल ले सकते हैं। दिन में 10 से 15 बार बुखार और ऑक्सीजन सेचुरेशन चेक करें। शरीर में ऑक्सीजन लेवल 94 प्रतिशत से कम होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। दिनभर में 8 से 10 ग्लास पानी पिएं।

मामूली लक्षण होने पर क्या करें?
-कोई भी दवाई डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लें।

लक्षण गंभीर होने पर क्या करें?
-लक्षण गंभीर होने पर पांच से सात दिन तक तेज बुखार आएगा और ऑक्सीजन लेवल भी 94 प्रतिशत से नीचे रहेगा। इसलिए बुखार और ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें। अगर ऑक्सीजन लेवल तेजी से नीचे जा रहा है तो तुरंत अस्पताल जाएं। ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए सरकारी एजेंसियों से संपर्क करें।

क्या हैं नए संक्रमण के लक्षण?
-नए लक्षण में बुखार के साथ पेट दर्द, उल्टी व दस्त, घबराहट, सर्दी-जुकाम शामिल हैं। कई मरीजों को बदन में दर्द, गैस, भूख न लगना, मांसपेशियों में अकड़न जैसी शिकायतें भी हैं।

क्या तेजी से फैल रहा है नया संक्रमण?
- कोरोना के ज्यादातर मामलों में अब भी न के बराबर या काफी हल्के लक्षण नजर आ रहे हैं, मगर समय के साथ-साथ वायरस अधिक घातक हो गया है। जिन लोगों को पहले से ही कोई बीमारी है, उन पर इसका कहर अधिक है। इसलिए अधिक लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती करवाना पड़ रहा है।

क्या गैस की समस्या होना भी खतरनाक है?
-कोरोना वायरस के नए मामलों में एसिडिटी या गैस की शिकायत काफी आम है। शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था, लेकिन अब डॉक्टर इस बात को लेकर काफी चिंतित है। अपच, डायरिया, पेट में दर्द और उल्टी आदि के चलते मरीजों में गैस की शिकायतें बढ़ रही हैं। इसके अलावा नया वायरस अहम अंगों को भी क्षतिग्रस्त कर रहा है, ऐसे में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

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