आईसीयू में नहीं मिल रहे बेड:मरीज के परिजनों को 200 फीट दूर से लाने पड़ रहे ऑक्सीजन सिलेंडर, वार्डों में फैला है कचरा

सीकर6 महीने पहलेलेखक: यादवेंद्रसिंह राठौड़
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अस्पताल में कई वार्ड ऑक्सीजन प्लांट से दूर हैं। इस कारण मरीज के परिजनों को ऐसे लाने पड़ते हैं ऑक्सीजन सिलेंडर। - Dainik Bhaskar
अस्पताल में कई वार्ड ऑक्सीजन प्लांट से दूर हैं। इस कारण मरीज के परिजनों को ऐसे लाने पड़ते हैं ऑक्सीजन सिलेंडर।
  • सांवली कोविड डोंट केयर हॉस्पिटल यानी हर जगह अव्यवस्था

जिले में दो दिन में 1600 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। 20 लोगों की मौत हो गई। एक तरफ संकट बढ़ता जा रहा है, वहीं कोरोना मरीजों की जिंदगी बचाने और उन्हें स्वस्थ करने के लिए बनाया गया सांवली कोविड हाॅस्पिटल खुद बीमार है। समय पर इलाज मिलना तो दूर मरीजों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।

ऑक्सीजन के सिलेंडर तक मरीजों के परिजनों को लाने पड़ रहे हैं। वार्डों में गंदगी है। मरीज को डिस्चार्ज करने के बाद उसके बेड के आसपास से संक्रमित कचरा उठाए बिना ही दूसरे मरीज को भर्ती कर लिया जाता है। कई बाथरूम में पानी की व्यवस्था तक नहीं है। पीले रंग के कचरा पात्र भी भरे हुए हंै। ऐसे में पीपीई किट भी खुले में फेंके जा रहे हैं। लाल कचरा पात्र में सिरींज, केनुला, ग्लव्ज व अन्य संक्रमित कचरा भरे हुए हैं। कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा, विधायक राजेंद पारीक, कलेक्टर अविचल चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी समय-समय पर कोविड अस्पताल का दौरा कर चुके हैं। निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को सब अच्छा दिखाया जाता है, लेकिन फिर व्यवस्था बेपटरी हो जाती है। स्टाफ कोविड वार्ड में मरीज की देखभाल के लिए भी नहीं जा रहा है।

बदइंतजामी का वायरस : सिलेंडर में पूरी ऑक्सीजन भी नहीं मिल रही मरीजों को

कई वार्ड ऑक्सीजन सिलेंडर वाली जगह से 200 फीट दूर हैं। ऐसे में वहां से मरीजों के परिजनों को ही सिलेंडर लाने पड़ रहे हैं। प्लांट से पूरे भरे हुए ऑक्सीजन सिलेंडर भी नहीं दिए जा रहे हैं। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों को एक घंटे में चार लीटर ऑक्सीजन चाहिए। ऐसे में 24 घंटे में मरीज को ढाई सिलेंडर ऑक्सीजन चाहिए। कोविड सेंटर में गंभीर मरीजों को भी जनरल वार्ड में रखा है। वहां भर्ती महिला के बेटे संतोष चौहान ने बताया कि उनकी मां की हालत काफी गंभीर है। अस्पताल प्रबंधन से आईसीयू में भर्ती करने के लिए बात की, लेकिन उन्होंने बेड नहीं होने का हवाला दिया।

वार्डों के बाहर डस्टबिन फुल हो गए हैं। ऐसे में कचरा डस्टबिन के बाहर पड़ा रहता है। ऐसे में मरीज के परिजन, नर्सिंगकर्मी व सफाईकर्मियों के संक्रमित होने का खतरा रहता है। मरीजों की यूज की गई बेडशीट्स भी खुले में पड़ी रहती हैं। वार्ड में कम से कम दो से तीन बार सफाई होनी चाहिए लेकिन एक समय ही सफाई होती है। अस्पताल में एक कक्ष पर गेस्ट रूम लिखा हुआ है। इस रूम में तीन कोरोना पॉजिटिव कैदी हैं। इन मरीजों के पैरों में बेड़ियां डालकर बेड से हथकड़ी लगा रखी है। इनकी निगरानी में लगे पुलिसकर्मी 300 फीट दूर बैठे हुए हैं। ऐसे में कैदी कभी भी गच्चा देकर भाग सकते हैं।

सांवली कोविड सेंटर में मरीजों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। कुछ अव्यवस्था हो सकती है। आधे ऑक्सीजन सिलेंडर भर रहे हैं तो प्लांट में जांच करवाएंगे। ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने की व्यवस्था आज ही सही करवा देंगे। सभी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ सहित सफाई कर्मचारियों को पीपीई किट, मास्क सहित अन्य चीजों को तय कचरा पात्र में डालने के निर्देश दिए हुए हैं। -डॉ. देवेंद्र दाधीच, प्रभारी, सांवली कोविड सेंटर

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