डॉ. अमित ने कहा:लोगों में तनाव सहने की क्षमता कम हो रही है, ऐसी स्थिति में मानसिक रोगों से घिर रहे हैं

सीकर12 दिन पहले
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एसके मेडिकल काॅलेज के तत्वावधान में 37 वां राज्यस्तरीय मनाेराेग विशेषज्ञाें की कांन्फ्रेस हुई। काॅन्फ्रेंस में देशभर के मनाेराेग विशेषज्ञ शामिल हुए। काेविड-19 के बाद बढ़ी चुनाैतियाें काे लेकर चर्चा की। काॅन्फ्रेंस में लाेगाें में बढ़ते मानसिक राेगाें और उसके बदलते तरीकाे पर विचार-विमर्श हुआ।

मुख्य अतिथि कलेक्टर डॉ अमित यादव ने कहा कि संयुक्त परिवार कम हो रहे है। लाेगाें में तनाव सहने की क्षमता कम हाे रही है। ऐसी स्थिति में लाेग मानसिक राेगाें से घिर रहे हैं। कलेक्टर ने कहा कि लाेग मनाेराेग विशेषज्ञाें से इलाज करवाने में झिझकते हैं।

इसलिए जरूरत है कि लाेगाें में मनाेराेग के प्रति जागरूकता बढ़ाएं। विशिष्ट अतिथि प्रिंसिपल डॉ. केके वर्मा ने कहा कि डाॅक्टराें काे चिकित्सा ज्ञान काे अपडेट रखने के लिए ऐसी काॅन्फ्रेंस की जरूरत हाेती है। अधीक्षक डॉ महेंद्र खीचड़ ने कहा की मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग द्वारा किए आयाेजन काे गर्व का विषय बताया। आयोजन के चेयरपर्सन और विभागाध्यक्ष डॉ. महेश चाैधरी ने बताया कि सीकर में पहली बार राजस्थान चैप्टर की काॅन्फ्रेंस हुई।

डॉ विक्रम बगड़िया ने बताया कि देशभर के 160 से ज्यादा मनोरोग विशेषज्ञ जुटे। कांफ्रेस में एसएमएस के प्राेफेसर डाॅ. आरके साेलंकी, एम्स दिल्ली के डाॅ. नंदकुमार, बैंगलुरु के डाॅ. सुरेश बदमठ, केजीएमसी लखनऊ के प्राे. श्रीकांत श्रीवास्तव, एम्स ऋषिकेस के डाॅ. रविकुमार, एम्स जाेधपुर के प्राे. डाॅ. नरेश नेबिनानी ने व्याख्यान दिए।

आयोजन कोषाध्यक्ष डाॅ. रामचंद्र लांबा ने मनोचिकित्सको के शोध कार्यों का अवार्ड पेपर और पोस्टर प्रस्तुतीकरण किया। वरिष्ठ विशेषज्ञ डाॅ. वीडी मील और डाॅ. अजय वशिष्ठ द्वारा संपादित स्मारिका विमाेचन हुआ। कार्यक्रम में डॉ शिव प्रसाद खेदड़, डॉ. मनीष मील व डॉ. अशोक सिनसिनवार भी माैजूद रहे। मंच संचालन डॉ. नेहा शिवरान और डॉ. नेहा चौधरी ने किया।

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